पहले 2 जन्म प्रमाण पत्र, फिर डेथ सर्टिफिकेट, हैरान कर देगा फर्जीवाड़े का ये खेल

Published : Feb 06, 2025, 01:37 PM ISTUpdated : Feb 06, 2025, 06:01 PM IST
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सार

सीतामढ़ी में फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली कहानी, पहले दो जन्म प्रमाण पत्र, फिर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर डीलर बनने का खेल। जांच में खुलासा होने के बाद दोषियों के खिलाफ FIR का आदेश। पढ़ें पूरी खबर।

सीतामढ़ी। सीतामढ़ी का यह मामला भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की उन हदों को पार कर गया, जिसे सुनकर कोई भी दंग रह जाएगा। एक शख्स ने अपनी एक गलती को छिपाने के लिए एक और बड़ी गलती कर दी। खास यह है कि डीएम कोर्ट से उसे क्लीन चिट मिल गई, लेकिन राज्य सरकार के लेवल पर जांच में पोल खुल गई। अब दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।

क्या है मामला?

इस पूरे मामले की शुरुआत हुई परिहार प्रखंड की नरंगा उत्तरी पंचायत में वर्ष 2019 में। जहां सरकारी राशन वितरण के लिए डीलर की बहाली होनी थी। जिसका विज्ञापन भी प्रकाशित हुआ था। इस प्रॉसेस में शिवशंकर कुमार को डीलर लाइसेंस नंबर-49/19 दिया गया था। लेकिन बाद में, प्रशासन ने यह लाइसेंस रद्द कर दिया और नया लाइसेंस राजेश कुमार उर्फ संजय कुमार को जारी कर दिया। शिवशंकर कुमार को लगा कि उनके साथ अन्याय हुआ है, और उन्होंने इस फैसले को डीएम कोर्ट में चुनौती दी।

ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा

शिवशंकर कुमार ने अपनी शिकायत में यह दावा किया कि जिस व्यक्ति (राजेश कुमार) को डीलर नियुक्त किया गया,उसके पास दो जन्म प्रमाण-पत्र हैं। पहला प्रमाण-पत्र साल 2009 में, जब उसने पहली बार बोर्ड परीक्षा दी थी, उस समय का है। तब उसने अपना नाम "राजेश कुमार" लिखा था और जन्मतिथि 4 जनवरी 1994 बताई थी। दूसरा प्रमाण-पत्र साल 2014 का है, जब उसने दोबारा मैट्रिक परीक्षा दी, तब उसका नाम "संजय कुमार" था और जन्मतिथि 5 फरवरी 1998 दर्ज की गई थी। यह एक गंभीर अनियमितता थी, क्योंकि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि पर दो बोर्ड परीक्षाएं देना कानूनी अपराध है।

डीएम कोर्ट में राहत, लेकिन बढ़ता गया मामला

शिवशंकर कुमार द्वारा किए गए इस खुलासे के बावजूद, डीएम कोर्ट ने राजेश कुमार को राहत दे दी। राजेश कुमार ने अपनी दलील में कहा कि उसके पास सिर्फ एक ही जन्म प्रमाण-पत्र है, और दूसरा प्रमाण-पत्र उसके मृतक भाई संजय कुमार का है। राजेश कुमार ने अपने भाई के नाम से डेथ सर्टिफिकेट भी पेश किया, जिसे देखकर डीएम कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन शिवशंकर कुमार हार मानने वाले नहीं थे।

आयुक्त ने योजना एवं विकास विभाग के हवाले कर दी जांच

डीएम कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर, शिवशंकर कुमार ने इस मामले को उच्च अधिकारियों के पास ले जाने का फैसला किया। उन्होंने आयुक्त के समक्ष अपील दायर की। आयुक्त ने इस मामले को योजना एवं विकास विभाग को सौंप दिया। प्रधान सचिव ने इस केस को गंभीरता से लिया और जांच के लिए सदर एसडीओ एवं जिला सांख्यिकी अधिकारी को जिम्मेदारी दी।

जांच रिपोर्ट ने कर दिया हैरान

एसडीओ की रिपोर्ट में बताया गया कि राजेश कुमार और संजय कुमार के जन्म प्रमाण-पत्र अलग-अलग वर्षों में जारी किए गए हैं। लेकिन परिहार प्रखंड कार्यालय में संजय कुमार के मृत्यु प्रमाण-पत्र से संबंधित कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं था। पंचायत सचिव ने पुष्टि की कि 2006 से 2016 तक वंशावली प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया था। जिला सांख्यिकी अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संजय कुमार के नाम से कोई मृत्यु प्रमाण-पत्र पंचायत से निर्गत नहीं किया गया।

फर्जीवाड़े का हो गया पर्दाफाश

जांच अधिकारियों की रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि राजेश कुमार ने अपने पक्ष में फैसला करवाने के लिए संजय कुमार के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र तैयार करवाया था। प्रधान सचिव ने इस पर कड़ा रुख अपनाया और आदेश दिया कि इस फर्जी प्रमाण-पत्र की गहन जांच की जाए। दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।

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