Gyan Bharatam National Manuscript Survey: 31 मई तक पूरा होगा ज्ञानभारतम् अभियान, पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण के निर्देश

Published : Apr 23, 2026, 06:39 PM IST
CG Gyan Bharatam National Manuscript Survey update

सार

मुख्य सचिव विकासशील ने ज्ञानभारतम् पांडुलिपि सर्वेक्षण को तेज करने के निर्देश दिए हैं। 31 मई तक सर्वे पूरा करने, पांडुलिपियों की पहचान, डिजिटलीकरण और संरक्षण पर जोर दिया गया है। जनभागीदारी बढ़ाने के लिए नए प्रयास भी सुझाए गए हैं।

रायपुर। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि राज्य में संरक्षित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए सभी शासकीय और निजी संस्थानों को सक्रिय रूप से प्रयास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, महाविद्यालयों और अन्य संस्थानों में कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां सुरक्षित हो सकती हैं, जिन्हें पहचानकर संरक्षित करना बेहद जरूरी है।

पारंपरिक समुदाय और पुरातात्विक क्षेत्रों पर विशेष फोकस

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पारंपरिक समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों में भी पांडुलिपियों की खोज पर विशेष ध्यान दिया जाए। इन क्षेत्रों में प्राचीन ज्ञान-संपदा मिलने की संभावना अधिक होती है, इसलिए सर्वेक्षण को व्यापक और गहन बनाया जाए।

जनभागीदारी बढ़ाने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” का सुझाव

उन्होंने आम लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचार कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया। इससे जनभागीदारी बढ़ेगी और लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान दे सकेंगे।

मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक: सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में ‘ज्ञानभारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अभियान समिति के सदस्य और सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

31 मई तक सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सर्वेक्षण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और निर्देश दिया कि यह कार्य 31 मई तक हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण अभियान है।

पांडुलिपियों की पहचान, डिजिटलीकरण और संरक्षण पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति बनाई जाए, नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं और सर्वेक्षण टीमों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।

प्रतिभागियों को प्रोत्साहन और विशेषज्ञों की भागीदारी

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही स्थानीय पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों को इस अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि अभियान अधिक प्रभावी बन सके।

पारदर्शिता और स्वामित्व अधिकारों का सम्मान

सर्वेक्षण के दौरान पांडुलिपियों के स्वामित्व अधिकारों का पूरा सम्मान करने, बिना अनुमति किसी भी सामग्री का स्थानांतरण न करने और सभी कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

विशेषज्ञों का सुझाव: शोध से मजबूत होगा अभियान

बैठक में पर्यटन, संस्कृति और जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रस्तुति के माध्यम से अभियान की रूपरेखा और उद्देश्य समझाए। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि शोधकर्ताओं के सहयोग से दूरदराज के क्षेत्रों से भी महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की जानकारी जुटाई जा सकती है, जिससे अभियान और मजबूत होगा।

अधिकारियों की उपस्थिति और समन्वय पर जोर

इस बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी, संस्कृति संचालक श्री विवेक आचार्य सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने के लिए बेहतर समन्वय और प्रयासों पर जोर दिया।

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