
छत्तीसगढ़ में मानसून के सक्रिय दौर को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। बाढ़, अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली और भूस्खलन जैसी संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र, राहत एवं बचाव तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने आगामी दिनों में संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने बैठक में राज्य की मौजूदा आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान संभावित बाढ़, भारी बारिश, आकाशीय बिजली और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की गई हैं।
बैठक में राज्य और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (Emergency Operation Centre) की कार्यप्रणाली, राहत एवं बचाव व्यवस्था और आपसी समन्वय की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य तेजी से शुरू हो और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचे।
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बैठक के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि आपदा के समय अलग-अलग एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता के लिए बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से संयुक्त कार्रवाई की रणनीति और प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।
बैठक में आधुनिक तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) की प्रभावशीलता पर भी चर्चा की गई। 'सचेत' प्लेटफॉर्म और सेल ब्रॉडकास्ट आधारित अलर्ट सिस्टम के बेहतर उपयोग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने समय पर लोगों तक चेतावनी पहुंचाने के महत्व पर बल दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के संयुक्त सलाहकार संजीव सही ने राज्य में चल रहे आपदा प्रबंधन कार्यों में NDMA के सहयोग और भविष्य की रणनीति की जानकारी साझा की।
बैठक में मॉक एक्सरसाइज, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता और संसाधनों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान संवेदनशील जिलों में पहले से तैयारियां पूरी रखी जाएं, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत किया जाए और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएं।
बैठक के अंत में सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जा सके और प्रभावित लोगों को समय पर राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके। मानसून के दौरान बढ़ते जोखिम को देखते हुए राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
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