छत्तीसगढ़ की नदियों को बचाने के लिए सरकार का बड़ा मास्टर प्लान, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

Published : Jun 15, 2026, 09:55 PM IST
CG News Government Unveils Major River Revival Plan Chief Secretary Issues Key Directions

सार

Chhattisgarh River Revival: छत्तीसगढ़ में नदियों के पुनर्जीवन और संरक्षण के लिए मुख्य सचिव ने क्या निर्देश दिए? नदी कैचमेंट क्षेत्रों में जल संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए किन योजनाओं का उपयोग किया जाएगा? छात्रों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नदी संरक्षण अभियान से कैसे जोड़ा जाएगा?

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध प्राकृतिक संपदा और जल संसाधनों से जुड़ी रही है। लेकिन बदलते पर्यावरणीय हालात, बढ़ते शहरीकरण और जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव के बीच नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश की प्रमुख नदियों के पुनरुद्धार और पुनर्जीवन कार्यों की व्यापक समीक्षा की है।

सोमवार को रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव विकासशील ने की, जिसमें विभिन्न जिलों में बहने वाली नदियों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के लिए चल रही योजनाओं की समीक्षा की गई।

हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप होगा नदी पुनर्जीवन कार्य

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नदियों के पुनर्जीवन और पुनरुद्धार से जुड़े कार्य उच्च न्यायालय की गाइडलाइन के अनुरूप किए जाएं। उन्होंने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य, जल सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे जनउपयोगी कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनका सीधा लाभ स्थानीय समुदाय को मिल सके और जो दीर्घकालिक रूप से जल संरक्षण में सहायक हों।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरपंचों को जोड़ने पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि नदी संरक्षण अभियान को जनभागीदारी से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि अपने-अपने जिलों में उद्गम लेने वाली नदियों के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व का दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि नई पीढ़ी को अपनी प्राकृतिक धरोहर के बारे में जानकारी मिल सके।

छात्रों को नदी संरक्षण से जोड़ने की पहल

बैठक में शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता को भी विशेष महत्व दिया गया। मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि स्कूलों के छात्र-छात्राओं को नदियों के उद्गम स्थलों का भ्रमण कराया जाए। इसके साथ ही नदी संरक्षण और जल प्रबंधन विषयों पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। उन्होंने नदियों के उद्गम स्थलों पर मेला, उत्सव और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी बात कही, ताकि स्थानीय लोगों का जुड़ाव बढ़ सके।

वृक्षारोपण, वाटर रिचार्ज और जल संरक्षण परियोजनाओं पर फोकस

बैठक में नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जलग्रहण संरचनाओं के निर्माण, वाटर रिचार्ज और जल संरक्षण परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबीजीआरएएम, कैम्पा, मनरेगा, डीएमएफ और अन्य उपलब्ध वित्तीय स्रोतों का उपयोग करते हुए व्यापक कार्ययोजनाएं तैयार की जाएं। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

नदी तटों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

राज्य सरकार अब नदियों के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे स्थलों की पहचान कर पर्यटन विकास की कार्ययोजना तैयार की जाए।

नदियों में अपशिष्ट डालने पर होगी सख्त निगरानी

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नदियों में किसी भी प्रकार का कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट या प्रदूषक पदार्थ न डाले जाएं। इसके लिए नियमित निगरानी व्यवस्था विकसित करने और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया।

विशेषज्ञों ने साझा की तकनीकी जानकारी

बैठक में जल संरक्षण और नदी प्रबंधन के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रोफेसर डॉ. एम.के. वर्मा ने नदी जल संरक्षण की तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं एनआईटी के जल विज्ञानी प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नदी संरक्षण, भूजल प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी साझा की।

कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में जल संसाधन विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, खनिज विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। राज्य सरकार का मानना है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।

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