Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में हीरे का बड़ा खजाना! अब शुरू होगी सबसे अहम ड्रिलिंग

Published : Jun 27, 2026, 06:57 PM IST
chhattisgarh diamond project

सार

महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग को मंजूरी मिल गई है। इससे हीरा भंडार का वैज्ञानिक आकलन होगा और व्यावसायिक खनन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ेगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक परियोजना के अगले चरण को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत अब **लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग** शुरू की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार यह चरण परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसी के माध्यम से क्षेत्र में मौजूद वास्तविक हीरा भंडार का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर हीरा खनन का रास्ता साफ हो सकेगा।

डायमंड रिजर्व का होगा वैज्ञानिक आकलन, तैयार होगी फिजिबिलिटी रिपोर्ट

बैठक के दौरान निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक हुई प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। साथ ही निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की तय अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत **फिजिबिलिटी रिपोर्ट (Feasibility Report)** तैयार होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्षेत्र में व्यावसायिक हीरा खदान विकसित की जाएगी या नहीं।

एनसीएल बोर्ड बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

नई दिल्ली में हुई बैठक में एनसीएल के निदेशक मंडल के सदस्य अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार और विनय कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एनएमडीसी और सीएमडीसी का संयुक्त उपक्रम है एनसीएल

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम **एनएमडीसी लिमिटेड** और **छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी)** का संयुक्त उपक्रम है। इसमें एनएमडीसी की 51 प्रतिशत और सीएमडीसी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अब तक कंपनी मुख्य रूप से लौह अयस्क परियोजनाओं पर कार्य करती रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि होने के बाद कंपनी बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

पांच प्राकृतिक हीरे मिलने के बाद बढ़ी परियोजना की संभावनाएं

एनसीएल ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से इस क्षेत्र में किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में कराया गया। परीक्षण के दौरान 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो गया कि इस क्षेत्र की भू-संरचना हीरा युक्त है।

दुनिया के प्रमुख हीरा उत्पादक देशों जैसा दिख रहा संभावित भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में भी शुरुआती चरण में इसी तरह के संकेत मिले थे। बाद में वहां बड़े पैमाने पर व्यावसायिक हीरा भंडार विकसित हुए। इसी अनुभव के आधार पर बलौदा-बेलमुंडी डायमंड परियोजना को न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैलाडीला की लौह अयस्क परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा

बैठक में राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष तक ले जाने की योजना है। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को भी एक करोड़ टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सभी खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग देश की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड परियोजना भविष्य में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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