Chhattisgarh Foundation Day 2026: 1 नवंबर से सजेगा राज्योत्सव, पलक मुच्छल से अभिजीत तक, जानें 3 दिन का पूरा कार्यक्रम

Published : Nov 01, 2026, 09:17 AM IST
Chhattisgarh rajyotsav 2026

सार

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का आगाज 1 नवंबर से होगा। तीन दिन पलक मुच्छल, स्वास्ति मेहुल, अभिजीत भट्टाचार्य और लोककलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और कला-संगीत की झलक एक बार फिर बड़े मंच पर देखने को मिलेगी। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर से नवा रायपुर अटल नगर में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का आयोजन होने जा रहा है। 1 से 3 नवंबर तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक संगीत का भी शानदार संगम देखने को मिलेगा।

राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से आए कलाकार पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य, लोकगीत और आदिवासी संगीत जैसी पारंपरिक विधाओं की प्रस्तुतियां देंगे। वहीं बॉलीवुड के लोकप्रिय गायक-गायिकाएं भी अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे। पहले दिन पलक मुच्छल, दूसरे दिन स्वास्ति मेहुल और अंतिम दिन अभिजीत भट्टाचार्य की संगीतमय प्रस्तुतियां महोत्सव का खास आकर्षण रहेंगी।

नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मैदान में होने वाले इस आयोजन का शुभारंभ 1 नवंबर को शाम 6 बजे होगा। तीनों दिन अलग-अलग अतिथियों की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा अंतिम दिन राज्य अलंकरण समारोह भी होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।

Chhattisgarh Rajyotsav 2026: उद्घाटन में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया होंगे मुख्य अतिथि

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के उद्घाटन समारोह में 1 नवंबर को केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

राज्योत्सव के दूसरे दिन यानी 2 नवंबर को राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे। इस दौरान विधायक राजेश मूणत, पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, सुनील सोनी, अनुज शर्मा और इंद्र कुमार साहू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

तीन दिवसीय महोत्सव का समापन 3 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। समापन दिवस पर राज्य अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें कला, संस्कृति, साहित्य, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।

Chhattisgarh Rajyotsav 2026 Day 1: पलक मुच्छल की गायिकी से सजेगी पहली शाम

राज्योत्सव के पहले दिन 1 नवंबर को मुख्य मंच पर शाम 5 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे। शुरुआत दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकारों की प्रस्तुतियों से होगी। शाम 5 से 6 बजे तक कलाकार प्रादेशिक और राज्यस्तरीय लोकसंगीत पेश करेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे रायपुर के कलाकार अनुराग शर्मा अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। शाम 6.30 से रात 8 बजे तक राज्योत्सव का उद्घाटन समारोह आयोजित होगा।

उद्घाटन कार्यक्रम के बाद रात 8 बजे बॉलीवुड की मशहूर पार्श्व गायिका पलक मुच्छल मंच संभालेंगी। अपनी सुरीली आवाज और लोकप्रिय गीतों के जरिए वह दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। पहले दिन उनकी प्रस्तुति को लेकर संगीत प्रेमियों में खास उत्साह रहने की उम्मीद है।

Rajyotsav Day 2: 'मैं अयोध्या हूं' नाटक और स्वास्ति मेहुल की होगी प्रस्तुति

राज्योत्सव के दूसरे दिन 2 नवंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नाटक और संगीत का खास मेल देखने को मिलेगा। शाम 6 से 7 बजे तक 'मैं अयोध्या हूं' नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। इस नाटक के जरिए अयोध्या की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़े पहलुओं को भी दर्शकों के सामने रखा जाएगा। शाम 7 से 8 बजे तक रायपुर के कलाकार सुनील सोनी अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके बाद रात 8 बजे से बॉलीवुड पार्श्व गायिका स्वास्ति मेहुल अपनी गायिकी से समां बांधेंगी। उनके गीतों के साथ राज्योत्सव की दूसरी शाम संगीत के रंग में रंग जाएगी।

Rajyotsav Day 3: पद्मश्री उषा बारले का पंथी नृत्य और अभिजीत भट्टाचार्य के गीत

राज्योत्सव के अंतिम दिन 3 नवंबर को छत्तीसगढ़ की लोककला के साथ बॉलीवुड संगीत का भी आकर्षण रहेगा। शाम 6 से 6.30 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे। इसके बाद शाम 6.30 से 7 बजे तक प्रदेश की प्रसिद्ध पंथी नृत्य कलाकार पद्मश्री उषा बारले अपनी प्रस्तुति देंगी। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंथी कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली उषा बारले की प्रस्तुति कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।

शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक राज्य अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को राज्य के प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जाएगा। समारोह के बाद रात 9 बजे बॉलीवुड के लोकप्रिय पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य अपनी प्रस्तुति देंगे। उनके चर्चित गीतों के साथ तीन दिवसीय राज्योत्सव का समापन होगा।

Chhattisgarh Rajyotsav Shilpgram: तीन दिनों में होंगी 30 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

मुख्य मंच के अलावा राज्योत्सव में शिल्पग्राम भी आकर्षण का बड़ा केंद्र रहेगा। यहां प्रदेश के स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। शिल्पग्राम मंच पर प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे। तीन दिनों में कुल 30 प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।

इन कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के कलाकार अपनी पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य और नाट्य विधाओं का प्रदर्शन करेंगे। पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य, कथक, ओडिसी, लोकमंच, लोकगीत, भजन, सूफी संगीत, गजल, शास्त्रीय नृत्य और आदिवासी लोकसंगीत को कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। इस आयोजन का उद्देश्य केवल दर्शकों को मनोरंजन देना नहीं है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच उपलब्ध कराना भी है। इससे प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को पहचान मिलेगी और नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सकेगी।

1 नवंबर: शिल्पग्राम में पंडवानी, लोकसंगीत और शास्त्रीय नृत्य का आयोजन

राज्योत्सव के पहले दिन 1 नवंबर को शिल्पग्राम में कुल नौ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। कार्यक्रमों की शुरुआत रायपुर के शिवेन्द्र मंडावी के लोकसंगीत और गिटार वादन से होगी। इसके बाद राजीव श्रीवास्तव का रिदम बैंड और संतोष कुमार सिंहा का फ्यूजन बैंड अपनी प्रस्तुतियां देंगे। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दुर्ग के चेतन देवांगन और रायपुर की दुर्गा साहू अपनी गायन प्रस्तुतियां देंगे।

शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति अनुष्का सुल्ताना देंगी। वहीं दुर्ग की रजनी रजक लोकमंच और ढोलामारू की प्रस्तुति से दर्शकों को परिचित कराएंगी। बिलासपुर की वंदिता साहू लोकसंगीत और पायल साहू लोकमंच की प्रस्तुति देंगी। इस तरह पहले दिन शिल्पग्राम में लोकसंगीत से लेकर पंडवानी और शास्त्रीय नृत्य तक कई विधाओं का आनंद लिया जा सकेगा।

2 नवंबर: ओडिसी, कथक, सुआ नृत्य और पंडवानी से सजेगा शिल्पग्राम

राज्योत्सव के दूसरे दिन 2 नवंबर को शिल्पग्राम मंच पर 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। इस दिन लोकनृत्य के साथ शास्त्रीय संगीत और नृत्य की भी झलक देखने को मिलेगी। श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी लोकसंगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देंगी। सुष्मिता दास ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी, जबकि दुर्ग की समप्रिया पूजा निषाद पंडवानी गाथा के जरिए छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा को जीवंत करेंगी।

बिलासपुर के अंकित निर्मलकर सूफी, गजल और सुगम गायन पेश करेंगे। गरियाबंद की मिलवंतीन बाई पारंपरिक सुआ नृत्य प्रस्तुत करेंगी। रायपुर की मेघा बोस ताम्रकार लोकसंगीत से दर्शकों को रूबरू कराएंगी। इसके अलावा आंचल पाण्डेय कथक नृत्य, धमतरी की रुखमनी दीवान लोकमंच और आदित्य मिश्रा बैंड अपनी प्रस्तुति देंगे। विनीता त्रिपाठी कथक नृत्य और तेजराम साहू लोकमंच के जरिए कार्यक्रम में विविधता जोड़ेंगे।

3 नवंबर: पंथी नृत्य, आदिवासी लोकसंगीत और भजनों की होंगी प्रस्तुतियां

राज्योत्सव के अंतिम दिन 3 नवंबर को शिल्पग्राम में दस सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दिन भजन, पंथी नृत्य, जसगीत, आदिवासी लोकसंगीत, कथक और नाट्य प्रस्तुति देखने को मिलेगी। रायपुर की आस्था भट्ट भजन गायन करेंगी। दुर्ग की आरती बारले पंथी नृत्य प्रस्तुत करेंगी, जबकि कबीरधाम के राकेश सेन लोकमंच के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े भी पंथी नृत्य की प्रस्तुति देंगे। वहीं पूर्णिमा साहू जसगीत और जगराता भजन पेश करेंगी। अभिषेक सोनकर आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही दीपाली पाण्डेय कथक समूह नृत्य, वृद्धुमन वचस्पति भारती सूफी संगीत और अनुष्णा रॉय चौधरी कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। आनंदकुमार पाण्डेय की नाट्य प्रस्तुति के साथ शिल्पग्राम के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन होगा।

Chhattisgarh Folk Culture: पंडवानी, पंथी और सुआ नृत्य से नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव केवल राज्य स्थापना दिवस मनाने का एक आयोजन नहीं है। यह प्रदेश की पहचान, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने का भी बड़ा अवसर है। खास बात यह है कि इस बार कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकारों के साथ अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य, लोकगीत और आदिवासी नृत्य-संगीत की अहम भूमिका है। ये कलाएं प्रदेश के सामाजिक जीवन, लोकआस्था, इतिहास और सामुदायिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं। इन पारंपरिक विधाओं को राज्योत्सव के मंच पर प्रमुखता देने से इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नई पीढ़ी को भी इन कलाओं को करीब से जानने और समझने का अवसर मिलेगा।

Chhattisgarh Rajyotsav 2026: लोककला और बॉलीवुड संगीत का दिखेगा अनूठा संगम

तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के जरिए प्रदेश की कला और संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। एक तरफ जहां स्थानीय कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता सामने रखेंगे, वहीं दूसरी ओर प्रसिद्ध बॉलीवुड गायक-गायिकाएं आयोजन को और खास बनाएंगे।

नवा रायपुर अटल नगर का राज्योत्सव मैदान 1 से 3 नवंबर तक लोकजीवन, जनजातीय परंपराओं, नृत्य, संगीत और कला का केंद्र बनेगा। इस आयोजन से न सिर्फ स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, बल्कि प्रदेशवासियों को अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ने का भी मौका मिलेगा।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में लोकसंस्कृति और आधुनिक संगीत का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जिसमें प्रदेश की विविधता, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान तीनों की झलक होगी।

PREV

छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाएं, शिक्षा-रोजगार अपडेट्स, नक्सल क्षेत्र समाचार और स्थानीय विकास रिपोर्ट्स पढ़ें। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की खबरों के लिए Chhattisgarh News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — सबसे विश्वसनीय राज्य कवरेज यहीं।

Read more Articles on

Recommended Stories

Chhattisgarh National Unity Day 2026: Deputy CM विजय शर्मा बोले- 'नक्सलवाद के बाद अब बस्तर के विकास पर जोर'
Chhattisgarh Tourism: गुजरात के पर्यटकों को लुभाने की तैयारी, अहमदाबाद में बड़ा रोड शो