Chhattisgarh Khet Bachao Abhiyan: दंतेवाड़ा बना मॉडल जिला, मिलेट्स मिशन से बड़ा बदलाव

Published : Jun 08, 2026, 06:17 PM IST
Khet Bachao Abhiyan Dantewada Millet Mission

सार

Chhattisgarh News: क्या दंतेवाड़ा का ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों की किस्मत बदल देगा? क्या मिलेट्स खेती बनेगी नई कमाई का जरिया? क्या 40 बीज बैंक कृषि को नई ताकत देंगे? क्या दंतेवाड़ा पूरे देश के लिए टिकाऊ खेती का मॉडल बनने जा रहा है?

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने, कृषि भूमि की गुणवत्ता सुधारने और लोगों तक पौष्टिक खाद्यान्न पहुंचाने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती तथा मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। प्राकृतिक खेती ऐसी पद्धति है जो मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने के साथ जल संरक्षण में भी मदद करती है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त और सुरक्षित खाद्य उत्पाद प्राप्त होते हैं। इस खेती में किसानों को महंगे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे खेती की लागत घटती है और लाभ बढ़ने की संभावना बनती है।

दंतेवाड़ा में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’

कृषि भूमि की उत्पादकता को संरक्षित रखने, किसानों के खर्च को कम करने और प्राकृतिक कृषि को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए दंतेवाड़ा जिले में “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा तैयार इस विशेष कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना, पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रखना और प्राकृतिक खेती के दायरे का विस्तार करना है। यह अभियान दंतेवाड़ा को प्राकृतिक कृषि, जैव विविधता संरक्षण और किसान समृद्धि के मॉडल जिले के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मिलेट्स आधारित खेती पर रहेगा विशेष फोकस

जिले की भौगोलिक परिस्थितियों, आदिवासी परंपराओं और समृद्ध जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए इस अभियान को दंतेवाड़ा के सभी चार विकासखंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। अभियान का मूल संदेश है कि मिट्टी केवल फसल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिक तंत्र है, जिसकी सुरक्षा भविष्य की खाद्य सुरक्षा और किसानों की समृद्धि से जुड़ी हुई है।

ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इन फसलों को ‘सुपरफूड’ और ‘श्री अन्न’ की श्रेणी में रखा गया है। मिलेट्स कम पानी और कम संसाधनों में भी अच्छी उपज देते हैं तथा सूखे की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

खेत बचाओ अभियान के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?

खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, प्राकृतिक खेती का विस्तार, पारंपरिक बीजों का संरक्षण तथा जल और नमी संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। किसानों को धीरे-धीरे रासायनिक खेती से प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर प्रेरित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेती की लागत भी कम हो सके।

पांच चरणों में लागू होगी खेत बचाओ अभियान की कार्ययोजना

अभियान के तहत सबसे पहले जिले में मृदा स्वास्थ्य मैपिंग को मजबूत किया जाएगा और सॉयल हेल्थ कार्ड व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। दूसरे चरण में रागी, कोदो और कुटकी जैसे पौष्टिक मिलेट्स तथा स्थानीय फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

तीसरे चरण में किसानों को जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और ब्लू-ग्रीन एल्गी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि बाहरी कृषि आदानों पर उनकी निर्भरता कम हो सके। इसके बाद पारंपरिक बीज मंडियों और सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय बीजों का संरक्षण और उपयोग बढ़ सके।

अंतिम चरण में खेतों की मेड़ों पर ग्लिरिसिडिया जैसे हरित खाद प्रदान करने वाले पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। अभियान के तहत एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

135 ग्राम पंचायतों में लागू होगी खेत बचाओ योजना

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की 135 ग्राम पंचायतों में इस अभियान को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि 4,300 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है। साथ ही 40 सामुदायिक बीज बैंक स्थापित किए जाएंगे।

सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से मिलेट्स आधारित खाद्यान्नों के वितरण को भी बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके अलावा मिलेट्स आधारित उत्पाद तैयार करने वाले उद्यमियों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

किसानों को मिलेंगे आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी फायदे

अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले तीन वर्षों में खेतों में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ने की संभावना है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में कमी आने से किसानों की उत्पादन लागत 35 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा में उत्पादित मिलेट्स को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के नए अवसर भी तैयार होंगे।

पोषण की दृष्टि से भी मिलेट्स बेहद लाभकारी माने जाते हैं। इनमें आवश्यक सूक्ष्म एवं स्थूल पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। ये हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं, हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, एनीमिया की रोकथाम में सहायक हैं और मधुमेह के जोखिम को कम करने में योगदान देते हैं। साथ ही स्वस्थ वजन बनाए रखने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी मददगार होते हैं।

टिकाऊ कृषि मॉडल बनने की दिशा में दंतेवाड़ा

दंतेवाड़ा जिले में रागी के अलावा कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन फसलों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है ताकि उनकी आय के स्रोत बढ़ें और कृषि अधिक टिकाऊ बन सके।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल खेती की तकनीक बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी, जल संसाधनों, जैव विविधता और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक व्यापक पहल है। यदि यह योजना अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करती है, तो दंतेवाड़ा प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि के सफल मॉडल के रूप में पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन सकता है।

PREV

छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाएं, शिक्षा-रोजगार अपडेट्स, नक्सल क्षेत्र समाचार और स्थानीय विकास रिपोर्ट्स पढ़ें। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की खबरों के लिए Chhattisgarh News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — सबसे विश्वसनीय राज्य कवरेज यहीं।

Read more Articles on

Recommended Stories

CG News: किरंदुल में 1 Cr के तैलीय सदन का लोकार्पण, कर्मा महोत्सव में शामिल हुए डिप्टी CM अरुण साव
‘मोर गांव-मोर पानी’ बना जनआंदोलन, छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण से बदल रही गांवों की तस्वीर