Chhattisgarh News: रायपुर के गरबा महोत्सवों में पहुंचे CM विष्णुदेव साय, नारी शक्ति पर दिया बड़ा संदेश

Published : Oct 18, 2026, 12:23 PM IST
Vishnu Deo Sai raipur Navratri 2026 Garba Mahotsav

सार

छत्तीसगढ़ के CM विष्णुदेव साय ने रायपुर के गरबा महोत्सवों में नारी शक्ति, महतारी वंदन योजना, 14 लाख लखपति दीदियों और सांस्कृतिक विरासत पर बात की।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि नवरात्रि का पर्व केवल शक्ति की आराधना का अवसर नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति के सम्मान, सामाजिक एकता और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का भी प्रतीक है। महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। महिलाओं की प्रगति से न केवल परिवार मजबूत होता है, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के विकास को भी गति मिलती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शनिवार को राजधानी रायपुर में आयोजित अलग-अलग गरबा और नवरात्रि महोत्सवों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को नवरात्रि की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मां दुर्गा से सभी के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना भी की।

रायपुर में नवरात्रि महोत्सव: CM विष्णुदेव साय ने मां काली के किए दर्शन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सबसे पहले रायपुर के कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने माता के दर्शन और पूजन किए। उन्होंने प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। इसके बाद मुख्यमंत्री कई गरबा और नवरात्रि कार्यक्रमों में शामिल हुए। इनमें मंडी परिसर में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की ओर से आयोजित श्री पाटीदार नवरात्रि महोत्सव, भानपुरी में इसी समाज का गरबा समारोह और गोवर्धन नगर में श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज का नवरात्रि महोत्सव शामिल रहा। इसके अलावा वे अमलीडीह क्षेत्र में आयोजित ढोलिडा रास गरबा-2026 में भी पहुंचे।

इन आयोजनों में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि के दौरान पूरे देश और छत्तीसगढ़ में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का माहौल रहता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह आराधना हमें साहस, संयम, सकारात्मकता और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व हमारी सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। साथ ही समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा देते हैं।

गरबा महोत्सव पर CM साय बोले- यह सिर्फ नृत्य नहीं, आस्था और एकता का उत्सव

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गरबा केवल नृत्य का आयोजन नहीं है। यह मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है। गुजरात से शुरू हुई गरबा की परंपरा आज देश के अलग-अलग हिस्सों में उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत में पर्व और त्योहार समाज को जोड़ने का काम करते हैं। जब अलग-अलग समुदायों के लोग एक साथ उत्सव मनाते हैं, तो उनके बीच प्रेम, सद्भाव और भाईचारा और मजबूत होता है। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खूबी है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के सामाजिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के अलग-अलग समाजों ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को सहेजकर रखा है। इन समुदायों का राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

गरबा महोत्सवों में माताओं, बहनों और बेटियों की बड़ी भागीदारी देखकर मुख्यमंत्री ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता से ऐसे आयोजन और सुंदर तथा गरिमामय बनते हैं। नवरात्रि हमें नारी शक्ति का सम्मान करने के साथ महिलाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद रखने का संदेश भी देती है।

महतारी वंदन योजना: 68 लाख महिलाओं को हर महीने मिल रहे 1,000 रुपये

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर बात करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार माताओं और बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इस दिशा में महतारी वंदन योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस योजना के तहत प्रदेश की करीब 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे भेजी जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतों के लिए आर्थिक सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना का महत्व केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने और परिवार से जुड़े फैसले लेने में उनकी स्वतंत्रता को मजबूत करने का माध्यम भी बनी है।

योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग महिलाएं रोजमर्रा की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी खर्च, बचत और परिवार की अन्य आवश्यकताओं के लिए कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो उसका लाभ पूरे परिवार को मिलता है। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के चेहरों पर आत्मविश्वास और संतोष देखकर सरकार को अपने प्रयासों की सार्थकता का एहसास होता है। सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और वह प्रदेश के विकास में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे सके।

छत्तीसगढ़ में 14 लाख लखपति दीदी, महिला उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब तक 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि प्रदेश की महिलाओं की मेहनत, लगन, उद्यमशीलता और क्षमता को दिखाती है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों के जरिए अपने परिवार की आमदनी बढ़ा रही हैं। उनके प्रयासों से गांवों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, महिलाओं के आर्थिक रूप से सशक्त होने का असर परिवार के जीवन स्तर पर भी दिखाई देता है। इससे बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर बेहतर ध्यान दिया जा सकता है और परिवार में खुशहाली बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के कौशल विकास, आजीविका, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लक्ष्य है कि महिलाओं को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के ज्यादा अवसर मिलें।

छत्तीसगढ़ में मां दंतेश्वरी से मां बम्लेश्वरी तक, नवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान और शक्ति उपासना की परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यहां मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सदियों से शक्ति की उपासना की परंपरा चली आ रही है। नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इस दौरान गांवों और शहरों में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। पूरा प्रदेश माता की भक्ति में डूबा नजर आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परंपरा छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था के साथ-साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी पहचान है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और अध्यात्म का खास मेल दिखाई देता है। यहां के तीज-त्योहार और धार्मिक परंपराएं पीढ़ियों को आपस में जोड़ती हैं। इन परंपराओं को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

‘विकास भी, विरासत भी’: धार्मिक स्थलों और पर्यटन को बढ़ावा दे रही छत्तीसगढ़ सरकार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने देश को ‘विकास भी, विरासत भी’ का मंत्र दिया है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के समग्र विकास के साथ अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर लगातार काम कर रही है। देवी शक्तिपीठों और दूसरे आस्था केंद्रों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही इन स्थलों को छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान और पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की याद नहीं है, बल्कि यह वर्तमान की ताकत और भविष्य के लिए प्रेरणा भी है। आधुनिक विकास के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत हो। नवरात्रि और गरबा जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। इनसे सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती मिलती है तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

CM विष्णुदेव साय ने मां दुर्गा से की प्रदेश की खुशहाली की कामना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि उनकी कृपा प्रदेश के सभी लोगों पर बनी रहे। उन्होंने कामना की कि हर घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आए और छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि तथा विकास के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ता रहे। इन कार्यक्रमों के दौरान विधायक पुरंदर मिश्रा, देवजी भाई पटेल, जयंती पटेल और जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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