
रायपुर। छत्तीसगढ़ सहित देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं जलाशयों, तालाबों और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर रही हैं।
सूरजपुर जिले के लोकप्रिय पर्यटन स्थल पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम से निर्मित जलाशय इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। यहां मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बोटिंग सेवा शुरू कर स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखा है।
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 सदस्यीय समूह ने स्थानीय पर्यटन को आजीविका का माध्यम बनाया है। समूह द्वारा पिलखा जलाशय में आने वाले पर्यटकों के लिए बोटिंग सुविधा शुरू की गई है। पर्यटक इस प्राकृतिक स्थल का आनंद लेने के साथ बोटिंग का भी अनुभव कर सकते हैं। इसके लिए प्रति व्यक्ति 50 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। इस पहल ने महिलाओं को आय का एक नया और स्थायी स्रोत उपलब्ध कराया है।
इस पहल की शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआती समय में समूह को संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि महिलाओं ने इन चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर में बदलने का संकल्प लिया।
समूह की महिलाओं ने अपनी मेहनत, एकजुटता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर बोटिंग संचालन की पूरी जिम्मेदारी स्वयं संभाली। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर पूरे परिसर के प्रबंधन तक हर कार्य को सफलतापूर्वक संचालित किया और आज यह पहल एक सफल मॉडल बन चुकी है।
महिलाओं की इस सराहनीय पहल का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह अब तक लगभग 74 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर चुका है। इस आय से समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और उनका आत्मविश्वास भी पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। आज ये महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में योगदान देने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर, आवश्यक सहयोग और कार्य करने का मंच मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकती हैं। पिलखा जलाशय में संचालित बोटिंग गतिविधि आज महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। इसके साथ ही यह पहल स्थानीय पर्यटन को भी नई पहचान देने और क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान देने का काम कर रही है।
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