अगर स्कूल में जांच न होती तो... 10 साल के त्रिशांत की कहानी आपको भावुक कर देगी

Published : Jul 12, 2026, 06:39 PM IST
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सार

Chirayu Yojana Success Story: छत्तीसगढ़ के धमतरी में चिरायु योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की मदद से 10 वर्षीय त्रिशांत यादव की जन्मजात हृदय बीमारी का समय रहते पता चला। रायपुर में पूरी तरह मुफ्त हार्ट सर्जरी के बाद बच्चे को नई जिंदगी मिली।

कई बार एक छोटी-सी स्वास्थ्य जांच किसी बच्चे की पूरी जिंदगी बदल देती है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत संचालित 'चिरायु' टीम ने उसके जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान की। इसके बाद सरकारी व्यवस्था के जरिए पूरी तरह निःशुल्क इलाज और सफल हार्ट सर्जरी कराकर बच्चे को नया जीवन मिला। यह मामला समय पर जांच और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की प्रभावशीलता का उदाहरण बनकर सामने आया है।

स्कूल में जांच के दौरान सामने आई गंभीर बीमारी

धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड स्थित सिंधौरीखुर्द गांव का रहने वाला त्रिशांत यादव सामान्य रूप से स्कूल जाता था। परिवार को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वह जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) से जूझ रहा है।

स्कूल में आयोजित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान 'चिरायु' टीम ने उसके दिल की धड़कनों में असामान्यता महसूस की। प्राथमिक जांच के बाद परिजनों को तत्काल उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी गई। जिला अस्पताल धमतरी में विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि बच्चे के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द ऑपरेशन जरूरी है।

धमतरी से रायपुर तक मुफ्त इलाज, सफल रही हार्ट सर्जरी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने रेफरल से लेकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं तेजी से पूरी कराईं। इसके बाद त्रिशांत को रायपुर के एमएमआई अस्पताल में भर्ती कराया गया।

8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उसके हृदय का सफल ऑपरेशन किया। इलाज पूरी तरह निःशुल्क रहा। ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। चिरायु टीम डिस्चार्ज के बाद भी उसके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है।

गरीब परिवार के लिए बनी उम्मीद, RBSK की अहम भूमिका

त्रिशांत के माता-पिता का कहना है कि यदि स्कूल में स्वास्थ्य जांच नहीं होती, तो उन्हें बेटे की बीमारी का पता ही नहीं चलता। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण लाखों रुपये का इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था। उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग का आभार जताते हुए कहा कि इस योजना ने उनके बेटे के साथ-साथ पूरे परिवार की खुशियां लौटा दीं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत संचालित 'चिरायु' योजना केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच, रेफरल, निःशुल्क उपचार, सर्जरी और ऑपरेशन के बाद फॉलो-अप तक पूरी प्रक्रिया को सुनिश्चित करती है। धमतरी का यह मामला दिखाता है कि समय पर स्क्रीनिंग और प्रभावी सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बच्चों के जीवन को नई दिशा दे सकती हैं।

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