
छत्तीसगढ़ के गांवों में खेती अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार के साथ बदलती हुई तस्वीर बनती जा रही है। जहां कभी किसान सिर्फ धान की खेती तक सीमित रहते थे, वहीं अब आधुनिक कृषि पद्धतियां उनकी आय और सोच दोनों बदल रही हैं। महासमुंद जिले के छोटे से गांव बोहारपार के किसान नवीन साव इसकी बड़ी मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाई और आज लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। नवीन साव की सफलता यह दिखाती है कि अगर किसान सही तकनीक, सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं तो कम जमीन से भी बड़ी आय हासिल की जा सकती है।
महासमुंद जिले के बसना विकासखंड स्थित ग्राम बोहारपार के रहने वाले नवीन साव पहले अपने खेतों में सिर्फ धान की खेती करते थे। हालांकि मेहनत काफी होती थी, लेकिन आमदनी सीमित थी। प्रति एकड़ करीब 21 क्विंटल धान उत्पादन से उन्हें लगभग 45 हजार 600 रुपये तक का लाभ मिल पाता था। लगातार बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे के बीच उन्होंने खेती में बदलाव का फैसला लिया। इसी दौरान उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इस नई तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया।
यह भी पढ़ें: क्या ईरान मान गया अमेरिका की शर्तें? मार्को रुबियो के बयान ने बढ़ाई हलचल
नवीन साव ने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। उन्होंने खेती में ड्रिप सिंचाई यानी टपक सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। आधुनिक तकनीकों के कारण पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और फसल रोगों से भी सुरक्षित रही। इसका परिणाम यह हुआ कि जहां धान में प्रति एकड़ 21 क्विंटल उत्पादन मिलता था, वहीं ग्राफ्टेड बैंगन से प्रति एकड़ करीब 155 क्विंटल उत्पादन हासिल हुआ। यह बढ़ोतरी सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि आय में भी बड़ा बदलाव लेकर आई।
ग्राफ्टेड बैंगन की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज और ज्यादा पैदावार है। रोपाई के लगभग 45 से 50 दिनों बाद ही फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। एक पौधे से करीब 50 किलो तक बैंगन उत्पादन संभव है। नवीन साव ने बताया कि इस खेती में मेहनत जरूर ज्यादा है, लेकिन मुनाफा पारंपरिक खेती से कई गुना बेहतर मिलता है। यही वजह है कि अब आसपास के किसान भी इस मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं।
नवीन साव ने अपनी फसल को सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की मंडियों में अपने बैंगन बेचे। वहां उन्हें करीब 30 रुपये प्रति किलो की थोक कीमत मिली। सभी खर्च निकालने के बाद उन्होंने लगभग 2 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। यह कमाई धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक रही।
नवीन साव अपनी सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं को देते हैं। उनका कहना है कि समय पर तकनीकी सलाह और योजनाओं का लाभ मिलने से खेती आसान और लाभकारी बनी। वे लगातार नई कृषि तकनीकों और अनुसंधानों की जानकारी लेते रहते हैं। यही वजह है कि उनके खेत अब आसपास के किसानों के लिए सीखने का केंद्र बन चुके हैं। कच्चापाल और बोहारपार क्षेत्र के कई किसान उनके फार्म पर पहुंचकर ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और ग्राफ्टेड खेती की बारीकियां समझ रहे हैं।
नवीन साव की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि खेती में बदलाव सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित नहीं है। सही योजना और तकनीक के जरिए छोटे और मध्यम किसान भी अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उद्यानिकी फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती हैं, क्योंकि इनमें बाजार की मांग, उत्पादन और मुनाफा तीनों ज्यादा हैं। यही कारण है कि अब कई किसान पारंपरिक फसलों से हटकर आधुनिक और नकदी फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: व्लादिमीर पुतिन का ‘महाविनाशक’ हमला! ओरेशनिक मिसाइल ने कीव में मचाई तबाही
छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाएं, शिक्षा-रोजगार अपडेट्स, नक्सल क्षेत्र समाचार और स्थानीय विकास रिपोर्ट्स पढ़ें। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की खबरों के लिए Chhattisgarh News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — सबसे विश्वसनीय राज्य कवरेज यहीं।