Hormuz Strait News: अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी डील की संभावना तेज हो गई है। मार्को रुबियो और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद होर्मुज स्ट्रेट, तेल व्यापार और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर की नजरें इस समझौते पर टिक गई हैं।
US Iran Ceasefire Agreement: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब एक ऐसी कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिक गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर पहली बार इतने सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान कहा कि “अगले कुछ घंटों में ईरान को लेकर अच्छी खबर आ सकती है।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, तेल बाजार और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

रुबियो का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक संभावित समझौता अंतिम दौर में पहुंच चुका है। अगर यह डील सफल होती है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी पड़ेगा।
भारत दौरे पर मार्को रुबियो ने क्या कहा?
चार दिन के आधिकारिक भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले 48 घंटों में बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर समाधान निकलने की उम्मीद जताई। रुबियो के बयान को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले महीनों में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस मार्ग को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
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ट्रंप ने भी दिए समझौते के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति को खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलने पर बातचीत अंतिम चरण में है। ट्रंप ने लिखा कि समझौते के आखिरी बिंदुओं पर चर्चा जारी है और जल्द इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस डील में प्रतिबंधों, तेल निर्यात और परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्या शर्तें शामिल होंगी।
यूरेनियम पर अब भी बनी हुई है सबसे बड़ी अड़चन
समझौते की चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान अपने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक को सीमित करने या हटाने पर सैद्धांतिक सहमति जता सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 30 से 60 दिनों के भीतर इस विषय पर विस्तृत बातचीत हो सकती है। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने की मांग करता रहा है। हालांकि बाद में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने इन दावों को खारिज कर दिया। रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि अभी जो शुरुआती समझौता तैयार हो रहा है, उसमें परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है और ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर कोई सहमति नहीं दी है।
IAEA की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास इस समय करीब 400 किलो 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञ इसे हथियार बनाने की क्षमता के काफी करीब मानते हैं। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश किसी भी समझौते में परमाणु कार्यक्रम को सबसे अहम मुद्दा मान रहे हैं। पश्चिमी देशों का मानना है कि यदि इस कार्यक्रम पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो क्षेत्र में नया सुरक्षा संकट खड़ा हो सकता है।
ब्रिटेन ने भी रखी अपनी शर्त
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले किसी भी समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शर्त और बिना रुकावट के पूरी तरह खोलना जरूरी होना चाहिए। स्टार्मर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वह बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता सफल होता है, तो इसका सीधा असर भारत पर भी दिखाई दे सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित और सामान्य संचालन से कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वैश्विक शिपिंग लागत भी कम हो सकती है और भारत जैसे आयातक देशों को आर्थिक फायदा मिलेगा।
क्या वाकई खत्म हो सकता है तनाव?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों तरफ से सकारात्मक बयान जरूर आए हैं, लेकिन कई मुद्दों पर अब भी स्पष्ट सहमति नहीं बनी है। खासकर परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर मतभेद कायम हैं। फिर भी, पिछले कुछ दिनों में जिस तेजी से बातचीत आगे बढ़ी है, उसने दुनिया को यह उम्मीद जरूर दी है कि शायद पश्चिम एशिया में लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब किसी बड़े समझौते की तरफ बढ़ रहा है।
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