कर्नाटक मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS प्रमुख को पत्र लिखकर संगठन के रजिस्ट्रेशन दस्तावेज़ मांगे हैं। उन्होंने कहा कि RSS को कानून के दायरे में काम करना चाहिए। खरगे ने संगठन की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं।

नई दिल्ली: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा है कि उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत को चिट्ठी लिखकर संगठन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कागजात मांगे हैं. उन्होंने साफ किया, 'ये चिट्ठी मैंने प्रियांक खरगे के तौर पर नहीं, बल्कि सरकार की तरफ से लिखी है. मुझे उम्मीद है कि वो हमारे पत्र का जवाब देंगे. अगर वो जवाब नहीं देते, तो आगे देखेंगे कि क्या करना है.'

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RSS अपने रीति-रिवाज माने, लेकिन हर काम कानून के दायरे में करे

खरगे ने मंगलवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हम उनके रीति-रिवाजों में कोई दखल नहीं देंगे. लेकिन मैंने सिर्फ इतना कहा है कि जो भी करें, कानून के दायरे में करें.' उन्होंने आगे कहा, 'कर्नाटक में कोई भी धार्मिक संगठन हो, उसे कानून के तहत काम करना होगा. आपको बताना होगा कि आपका संगठन किस कानून के तहत बना है. आपका रजिस्ट्रेशन कहां है? आपके आयोजक कौन हैं? आपकी संस्था का प्रमुख कौन है? मैंने चिट्ठी में यही सब पूछा है. मैंने धर्म के रजिस्ट्रेशन के बारे में नहीं, बल्कि आपकी संस्था के रजिस्ट्रेशन के बारे में सवाल किया है. किसी भी बात का गोलमोल जवाब मत दीजिए.'

मेरे सवालों का जवाब मिला तो मैं RSS दफ्तर जाने को तैयार

खरगे ने चुनौती देते हुए कहा, 'बताइए कि मेरे सवालों में क्या गलत है. मोहन भागवत ने मेरी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया है. उनका जो बयान चल रहा है, वो पुराना है. मैंने चिट्ठी 15 तारीख को लिखी थी और उनका बयान 13 तारीख का है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. मुझे उम्मीद है कि वो मेरी चिट्ठी का जवाब देंगे. अगर नहीं दिया, तो आगे देखेंगे. अगर वो मेरे सवालों का जवाब देते हैं, तो मैं RSS दफ्तर जाने के लिए तैयार हूं. मैं अपने वकीलों के साथ जाऊंगा, वो भी अपने वकीलों के साथ आएं.'

जवाबदेही होनी चाहिए या नहीं?

उन्होंने पूछा, 'जवाबदेही होनी चाहिए या नहीं? पारदर्शिता मांगना क्या गलत है? जब पारदर्शिता की बात करते हैं तो बीच में धर्म को क्यों ले आते हैं? चंदे के बारे में जानकारी देनी चाहिए या नहीं? अयोध्या के चंदे के मामले में बहुत बड़ा कन्फ्यूजन हुआ है. अब तो ऐसी नौबत आ गई है कि खुद राम ही जवाब देंगे. ऐसे में जो लोग श्रीराम के नाम पर पथ संचलन करते हैं, क्या उन्हें हिसाब नहीं देना चाहिए?' खरगे ने आगे कहा, 'मोहन भागवत को टैक्सपेयर्स के पैसे से सुरक्षा दी जा रही है. इसकी कोई जवाबदेही है या नहीं? हमारे पुलिसकर्मी आपके पथ संचलन के लिए ड्यूटी करते हैं, वो भी टैक्सपेयर्स का पैसा है. अपने लोगों (BJP) से बात मत करवाइए. आप बस कागजात दीजिए.'

खरगे ने RSS की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, 'आप पाकिस्तान से रिश्तों पर बात करते हैं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर अपनी राय देते हैं. फिर आप कैसे कहते हैं कि संगठन पॉलिटिकल नहीं है? अमेरिका में एक रिपोर्ट में इस संस्था को गलत बताया गया था. इसे ठीक करने के लिए एक लॉ फर्म को तीन करोड़ रुपये दिए गए. ये पैसा इनके पास कहां से आया?'

कानूनी दर्जा साफ करें

खरगे ने कहा कि RSS अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है. इस मौके पर उसे अपनी कानूनी स्थिति साफ करनी चाहिए और पैसों के लेन-देन में पारदर्शिता लानी चाहिए. उन्होंने बताया कि RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले कर्नाटक में 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक बैठकें और 60 मासिक मंडलियां चलती हैं. इसके अलावा, 500 से ज्यादा पथ संचलन और लाखों लोगों की भागीदारी वाले 'समाजोत्सव' होते हैं. खरगे ने कहा, 'इतने बड़े पैमाने पर होने वाले कार्यक्रमों को 'निजी या अनौपचारिक' नहीं माना जा सकता. इनके लिए ली गई सरकारी अनुमतियों का ब्योरा देना चाहिए. हर संस्था को कानून के दायरे में रहना होता है.' उन्होंने सवाल किया कि जब आम नागरिक, मजदूर संगठन, NGO, ट्रस्ट और कंपनियां सरकारी नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन कराकर अपनी आय-खर्च का ब्योरा देते हैं, तो RSS को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए? उन्होंने कहा कि संगठन का 100वें साल में कानूनी रूप से रजिस्ट्रेशन कराना और पारदर्शिता से काम करना ही देश के लिए सबसे बड़ा तोहफा होगा.