ससुर को लाठियों से बचाने दौड़ी गर्भवती बहू, पर घात लगाए बैठे हैवानों ने कोख पर ही कर दिया खौफनाक प्रहार! जानिए भदोही के इस दिल दहला देने वाले कांड का सच।

Bhadohi Pregnant Woman Miscarriage: उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। भमौरा गांव में 12 जुलाई की ढलती शाम हर रोज़ की तरह सामान्य लग रही थी, लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि चंद पलों में यहाँ चीख-पुकार मचने वाली है। गाँव के एक घर के बाहर अचानक पुरानी रंजिश की आग भड़क उठी। चार सगे भाई-सुभाष, जुगेश, रमेश और राकेश-हाथों में लाठियां लहराते हुए एक बुजुर्ग शख्स पर टूट पड़े। लाठियों के वार और बुजुर्ग की दर्दनाक चीखें सुनकर घर के भीतर मौजूद 20 वर्षीय गर्भवती बहू निशा देवी का दिल दहल गया। अपने ससुर को लहूलुहान होते देख वह खुद को रोक नहीं पाई और उन्हें बचाने के लिए घर से बाहर दौड़ पड़ी।

12 जुलाई की शाम क्या हुआ था?

पुलिस के अनुसार, घटना 12 जुलाई की शाम भदोही जिले के भमौरा गांव में हुई। शिकायतकर्ता 20 वर्षीय निशा देवी ने आरोप लगाया कि गांव के ही चार भाई-सुभाष, जुगेश, रमेश और राकेश-एक पुराने विवाद को लेकर उसके बुजुर्ग ससुर पर लाठियों से हमला कर रहे थे। जब निशा अपने ससुर को बचाने के लिए बीच-बचाव करने पहुंची, तो कथित तौर पर आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट शुरू कर दी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों में से रमेश ने उसके पेट पर कई बार लात मारी।

कोख पर बेरहम प्रहार: जब हैवानियत के आगे हार गई ममता

ससुर को लाठियों के वार से बचाने के लिए निशा दोनों पक्षों के बीच-बचाव करने उतरी थी। उसने सोचा होगा कि एक महिला और उसकी गर्भावस्था को देखकर हमलावर रुक जाएंगे, लेकिन दरिंदगी के सिर पर खून सवार था। आरोपियों ने बुजुर्ग को छोड़कर उस निहत्थी महिला पर ही हमला बोल दिया। इस पूरे मामले में सबसे खौफनाक मोड़ तब आया, जब आरोपियों में से एक, जिसकी पहचान रमेश के रूप में हुई है, ने निशा की 8 महीने की गर्भावस्था की परवाह किए बिना उसके पेट पर एक के बाद एक कई ज़ोरदार लात मार दी। इस क्रूर प्रहार को सहने की ताकत उस अजन्मे बच्चे और मां में नहीं थी।

सड़क पर बिखरा खून: अस्पताल की चारदीवारी में दफन हुई एक दुनिया

रमेश की लात लगते ही निशा असह्य दर्द से कराह उठी और देखते ही देखते खून से लथपथ होकर सड़क पर गिर पड़ी। मौके पर मौजूद स्थानीय महिलाओं ने जब यह खौफनाक मंजर देखा, तो उन्होंने बीच-बचाव किया, जिसके बाद चारों आरोपी भाई मौके से फरार हो गए। निशा के पति विपिन कुमार और परिवार के अन्य सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल बुजुर्ग व निशा को आनन-फानन में अस्पताल लेकर भागे। बुजुर्ग ससुर को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया गया, जबकि निशा की लगातार बिगड़ती हालत और अत्यधिक रक्तस्राव को देखते हुए उसे एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद निशा की कोख में पल रहे मासूम बच्चे को नहीं बचाया जा सका और उसका गर्भपात हो गया।

8 दिनों का सन्नाटा और कानून का शिकंजा: क्या मिलेगी दरिंदों को पाताल से भी गहरी सज़ा?

दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि यह वारदात 12 जुलाई की शाम को हुई थी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इसका ज़िक्र होने में पूरे आठ दिन लग गए। दरअसल, घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका था और निशा अस्पताल में ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी। 20 जुलाई को जब निशा अस्पताल से थोड़ी स्वस्थ होकर घर लौटी, तब जाकर पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) राजेश कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पीड़िता निशा देवी की शिकायत के आधार पर चारों आरोपी भाइयों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर और संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने दावा किया है कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं और जल्द ही वे सलाखों के पीछे होंगे। पूरा इलाका इस वक्त इस मासूम की मौत के गम और गुस्से में डूबा हुआ है।