क्या दिल्ली में जुटे 6 शिवसेना (UBT) सांसद नया राजनीतिक खेल रच रहे हैं, जिससे उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? क्या MPs के फोन बंद होना और अलग-अलग रास्तों से दिल्ली पहुंचना किसी बड़े दलबदल ऑपरेशन का संकेत है? क्या ‘ऑपरेशन टाइगर’ फिर सक्रिय हो चुका है ? क्या NDA से नजदीकियों की खबरें 2022 जैसी एक और बड़ी बगावत की पटकथा लिख रही हैं?

मुंबई/दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में चार साल पहले जो पटकथा विधायकों के जरिए लिखी गई थी, ठीक वैसी ही बगावत की गूंज अब देश की संसद में सुनाई देने लगी है। शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों ने जिस तरह बेहद गोपनीय और फिल्मी अंदाज में उद्धव ठाकरे को चकमा देकर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया है, उसने मुंबई से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में भूकंप ला दिया है। अलग-अलग शहरों से शुरू हुए रोड ट्रिप, कमर्शियल फ्लाइट्स और चार्टर्ड विमानों के इस गोपनीय सफर ने यह साफ कर दिया है कि उद्धव ठाकरे एक बार फिर अपने ही सिपहसालारों के हाथों सबसे बड़ा सियासी धोखा खाने की कगार पर खड़े हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

अलग रास्ते, एक ही खुफिया मंज़िल: कैसे बुना गया दिल्ली का चक्रव्यूह?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, उद्धव कैंप को कानों-कान खबर न हो, इसलिए इन छह सांसदों ने एक साथ सफर न करके अलग-अलग रास्तों और साधनों को चुना। हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर ने पहले हडगांव से हैदराबाद तक घंटों खुद गाड़ी चलाई और फिर वहां से दिल्ली की कमर्शियल फ्लाइट पकड़ी। दूसरी तरफ, यवतमाल के सांसद संजय देशमुख और परभणी के सांसद संजय जाधव ने अलग-अलग गाड़ियों से सड़क मार्ग के जरिए नांदेड़ एयरपोर्ट का रुख किया और वहां से एक सीक्रेट चार्टर्ड फ्लाइट में सवार होकर दिल्ली लैंड कर गए। इसी तरह, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर मुंबई से और शिरडी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे ने अपने क्षेत्र से सीधी फ्लाइट पकड़ी। मुंबई के सांसद संजय दीना पाटिल भी एक अन्य चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। मुंबई में बैठे उद्धव ठाकरे और उनके सिपहसालार जब तक कुछ समझ पाते, तब तक इन सभी सांसदों के फोन बंद हो चुके थे और वे पार्टी की पहुंच से 1,400 किलोमीटर दूर जा चुके थे।

Scroll to load tweet…

'ऑपरेशन टाइगर' का खौफ: 15 करोड़ के एडवांस और महुआ मोइत्रा का तंज

इस हाई-प्रोफाइल दलबदल की सुगबुगाहट के बीच शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बड़ा धमाका किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी खेमा सांसदों को पाला बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये का एडवांस पेमेंट ऑफर कर रहा है। राउत ने लिखा, “अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाला और घिनौना है कि महाराष्ट्र के सांसदों को आज रात पाला बदलने के लिए हर एक को ₹15 करोड़ ऑफर किए जा रहे हैं।” इस पोस्ट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी चुटकी लेते हुए इस रकम को काफी "कम" बताया। इसके जवाब में राउत ने सस्पेंस खोलते हुए कहा: "नहीं नहीं-महुआ जी, हर MP के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस ₹50 करोड़ तय है। ₹15 करोड़ तो बस एडवांस है। सच कहूँ तो, ये लोग ₹50,000 के भी लायक नहीं हैं। उनकी कीमत सिर्फ़ शिवसेना और TMC ब्रांड लेबल की वजह से बढ़ी है।”

दिल्ली क्यों बनी महा-संग्राम का केंद्र: लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की तैयारी

2022 की बगावत जहां विधायकों और राज्य सरकार पर कब्जे को लेकर थी, वहीं 2026 की यह जंग संसद के भीतर राजनीतिक प्रतीकों और वजूद को लेकर है। 2024 के लोकसभा चुनावों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) महाराष्ट्र में सबसे मजबूत विपक्षी ताकत बनकर उभरी थी। ऐसे में संसद के भीतर यह फूट उद्धव के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है, जिन्होंने पिछले चार साल खून-पसीना बहाकर अपना संगठन दोबारा खड़ा किया था। सूत्रों के मुताबिक, ये बागी सांसद दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करने वाले हैं। रणनीति यह है कि पहले लोकसभा के भीतर एक अलग पार्लियामेंट्री ग्रुप (संसदीय दल) बनाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और उसके बाद इस पूरे गुट का विलय एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली असली शिवसेना में कर दिया जाएगा।

2022 की वो कड़वी गूंज: बिना रिसॉर्ट के हो गया बड़ा खेल?

महाराष्ट्र के लोगों के लिए यह पूरा घटनाक्रम 2022 की यादें ताजा करा रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सूरत या गुवाहाटी के आलीशान रिसॉर्ट्स की तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि उनके स्थान पर दिल्ली के रनवे पर लैंड करती चार्टर्ड फ्लाइट्स और अचानक साइलेंट मोड पर चले गए मोबाइल फोन्स की खामोशी है। उद्धव ठाकरे के करीबी नेता और पूरी लीडरशिप इस वक्त असहाय होकर केवल जवाब तलाश रही है, लेकिन कूटनीति के इस चक्रव्यूह में फिलहाल बाजी शिंदे गुट के हाथ लगती दिख रही है। अब सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली हलचलों पर टिकी हैं, जहां महाराष्ट्र की सियासत का एक और बड़ा फैसला होने जा रहा है।