
Self Help Group Ramsheela Kashyap Success Story: कोंडागांव जिले का दूरस्थ गांव कुधुर, जो कभी माओवाद से प्रभावित रहा है, आज विकास और आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी लिख रहा है। शासन की योजनाओं की बेहतर पहुंच ने इस क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं गांव की निवासी श्रीमती रमशीला कश्यप।
रमशीला कश्यप ने वर्ष 2018 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ‘जय मां दंतेश्वरी’ स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत की। उस समय गांव में सिर्फ एक ही किराना दुकान थी, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी होती थी।
गांव में जरूरत की वस्तुएं आसानी से उपलब्ध न होने के कारण लोगों को करीब 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल जाना पड़ता था। इस समस्या को समझते हुए रमशीला कश्यप ने गांव में ही किराना दुकान खोलने का फैसला किया। स्व-सहायता समूह से उन्हें 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली, जिससे उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने दुकान में सामान बढ़ाया और अपने काम को मजबूत किया।
आज रमशीला की यह छोटी-सी दुकान पूरे गांव के लिए बड़ी सुविधा बन गई है। अब ग्रामीणों को जरूरी सामान के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। इससे गांव के लोगों का समय और पैसा दोनों बच रहा है।
रमशीला कश्यप अब अपनी दुकान से हर महीने करीब 20 से 25 हजार रुपये की आय कमा रही हैं। पहले उनका परिवार केवल खेती पर निर्भर था, लेकिन अब उनके पास एक अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
रमशीला कश्यप की सफलता पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने अपनी सफलता के लिए शासन और प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया है, जिनकी योजनाओं ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया।
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