
रायपुर। भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के अनुसार कोरबा जिले में खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त खाद और बीज उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में उर्वरकों और बीजों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। कृषि विभाग के उप संचालक श्री डी.पी.एस. कंवर ने बताया कि जिले में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि समय पर किसानों को सभी आवश्यक सामग्री मिल सके।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने उर्वरकों के भंडारण और वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई विक्रेता खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या अनियमित वितरण करते पाया जाता है तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को सही दाम पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना है।
कृषि विभाग द्वारा इस बार जैव उर्वरकों और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नील हरित काई और हरी खाद वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं। इससे मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणवत्ता बेहतर होती है और जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ती है।
किसानों को हरी खाद के रूप में प्रति एकड़ 8 किलोग्राम ढैंचा बीज और 4 किलोग्राम मूंग बीज वितरित किया जा रहा है। वहीं नील हरित काई का उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्र लखनपुर, कृषि महाविद्यालय कटघोरा, शासकीय उद्यान रोपणी पत्ताड़ी और चयनित किसानों के खेतों में कराया जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर इस बार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रशासन ने रासायनिक खादों के साथ जैविक और हरी खाद के संतुलित उपयोग पर जोर दिया है। सहकारी समितियों में पिछले वर्ष की मांग के अनुसार 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया गया है। बाकी मात्रा नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और एनपीके उर्वरकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यह पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा और किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे।
कोरबा जिले की सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता को लेकर प्रशासन ने विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं। सहकारी क्षेत्र के लिए कुल 12 हजार 700 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 7 हजार 132.58 मीट्रिक टन यानी लगभग 56.16 प्रतिशत उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। किसानों द्वारा अब तक 1 हजार 129.94 मीट्रिक टन खाद का उठाव किया जा चुका है, जबकि 6 हजार 2.64 मीट्रिक टन खाद अभी भी समितियों में उपलब्ध है।
इसके अलावा जिले में कुल 11 हजार 886 लीटर नैनो तरल उर्वरक का भंडारण किया गया था, जिसमें 6 हजार 842 लीटर नैनो यूरिया और 5 हजार 44 लीटर नैनो डीएपी शामिल है। इनमें से 483.50 लीटर का वितरण किया जा चुका है और शेष 11 हजार 402.50 लीटर स्टॉक अभी उपलब्ध है।
किसानों को सही दाम और गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने के लिए उर्वरक निरीक्षक लगातार खाद विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। 1 अप्रैल 2026 से अब तक जिले के 115 विक्रय केंद्रों की जांच की जा चुकी है। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर अनियमितताएं सामने आईं।
गड़बड़ी पाए जाने पर 28 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि 8 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस या बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। एक मामले में अवैध भंडारण और अनियमितता पाए जाने पर 58 बोरी यूरिया भी जब्त किया गया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टर के निर्देश पर यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाएं, शिक्षा-रोजगार अपडेट्स, नक्सल क्षेत्र समाचार और स्थानीय विकास रिपोर्ट्स पढ़ें। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की खबरों के लिए Chhattisgarh News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — सबसे विश्वसनीय राज्य कवरेज यहीं।