नैनो यूरिया ने बदल दी किसान की किस्मत, आधुनिक खेती तकनीक अपनाकर लिखी सफलता की नई कहानी

Published : Jun 03, 2026, 11:49 AM IST
nano urea farming success

सार

SMART FARMING: क्या नैनो यूरिया खेती की तस्वीर बदल रहा है? क्या अब भारी खाद की बोरियों से मिलेगी राहत? क्या कम लागत में बढ़ सकती है पैदावार? बलौदाबाजार के किसान शैलेंद्र कुमार ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया अपनाकर आधुनिक खेती में बड़ी सफलता हासिल की है।

रायपुर। पारंपरिक खेती के तरीकों से अलग हटकर जब किसान नई तकनीक को अपनाता है, तो वह केवल अपनी आय नहीं बढ़ाता बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे आज ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुके हैं। पिछले दो वर्षों से वे अपनी खेती में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे नैनो उर्वरकों का उपयोग कर स्मार्ट और आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।

खेती की बढ़ती लागत से परेशान होकर अपनाई नैनो तकनीक

किसान शैलेंद्र कुमार ने बताया कि खेती में लगातार बढ़ रही लागत और पारंपरिक खाद की भारी बोरियों को दुकान से खेत तक पहुंचाने की परेशानी ने उन्हें नई तकनीक की ओर सोचने के लिए प्रेरित किया। कृषि विभाग की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का इस्तेमाल शुरू किया। शुरुआत में यह एक नया प्रयोग था, लेकिन इसके नतीजे बेहद सकारात्मक और उम्मीद से बेहतर मिले।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से खर्च में बड़ी बचत

शैलेंद्र के अनुसार नैनो उर्वरक पारंपरिक खाद की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो जाते हैं। इससे खेती की शुरुआती लागत कम हो गई। साथ ही खाद की ढुलाई और भंडारण की समस्या से भी राहत मिली। उन्होंने बताया कि अब भारी-भरकम बोरियों को ढोने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि आधा लीटर की छोटी बोतल आसानी से खेत तक ले जाई जा सकती है।

फसलों की गुणवत्ता और पैदावार में हुआ सुधार

किसान शैलेंद्र ने बताया कि नैनो उर्वरक को पानी में मिलाकर सीधे फसलों पर छिड़काव किया जाता है, जिससे पौधों को पोषक तत्व सही मात्रा में मिलते हैं। इससे खाद की बर्बादी कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। उन्होंने दावा किया कि इस तकनीक के उपयोग से प्रति एकड़ उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

इस साल भी नैनो उर्वरक पर भरोसा कायम

अपनी सफलता से उत्साहित शैलेंद्र कुमार ने इस वर्ष भी पूरी खेती में केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग का फैसला किया है। उनकी यह पहल अब पूरे बलौदाबाजार जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी शैलेंद्र की सफलता को रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर किसानों को आधुनिक और कम लागत वाली खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

कृषि विभाग किसानों को कर रहा जागरूक

कृषि विभाग लगातार किसानों को नैनो तकनीक के फायदों के बारे में जानकारी दे रहा है। विभाग का मानना है कि इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान आत्मनिर्भर बन सकेंगे। शैलेंद्र कुमार जैसे किसानों की सफलता अब ग्रामीण क्षेत्रों में नई कृषि क्रांति का संकेत मानी जा रही है।

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