छत्तीसगढ़ में क्यों इतना खास माना जाता है तीज पर्व? CM साय ने बताई पूरी कहानी

Published : Sep 04, 2025, 10:10 AM IST
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सार

Chhattisgarh Teeja Festival 2025 रायपुर में धूमधाम से मनाया गया। CM विष्णु देव साय और डॉ. रमन सिंह ने महिला शक्ति और संस्कृति पर जोर दिया। तीजा महिलाओं के लिए मायके की यादों, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बना।

Chhattisgarh Teej Festival 2025: छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति और परंपराओं से होती है। यहां के त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं बल्कि समाज को जोड़ने का काम भी करते हैं। इन्हीं में से एक है तीजा पर्व, जो खासतौर पर महिलाओं से जुड़ा है। रायपुर में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के निवास पर आयोजित तीजा मिलन समारोह ने पूरे प्रदेश को संस्कृति और आस्था की रंगीन छटा में डुबो दिया।  पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं, लोकगीतों की मधुर धुनें और नृत्य की गूंज ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। लेकिन आखिर क्यों तीजा पर्व को छत्तीसगढ़ की संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता है? आइए जानते हैं…

तीजा पर्व का महत्व महिलाओं के जीवन में क्या है?

तीजा पर्व को महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए मनाती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा-पाठ करती हैं। यह दिन सिर्फ धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की भावनाओं, रिश्तों और मायके की यादों से भी जुड़ा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्या कहा?

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीजा को समाज को जोड़ने का बेहतर माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व महिलाओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। साथ ही कजली एकादशी जैसे पर्व न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं बल्कि भाईचारे और एकता का संदेश भी देते हैं।

डॉ. रमन सिंह ने महिलाओं की भूमिका पर क्यों दिया जोर?

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं न केवल घर-परिवार को संभाल रही हैं बल्कि शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा में भी प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं को संस्कृति की संरक्षक और समाज की शक्ति बताया।

टंक राम वर्मा ने तीजा को मायके की यादों से क्यों जोड़ा?

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि तीजा सिर्फ उपवास का पर्व नहीं है। यह महिलाओं को मायके से जुड़ी यादों को ताजा करने का अवसर देता है। महिलाएँ मायके जाकर तीजा मनाती हैं, एक-दूसरे से मिलती हैं और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेती हैं। यही इस पर्व की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

तीजा मिलन में लोकगीत और व्यंजनों की क्या रही खासियत?

इस तीजा मिलन में छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य और गीत-संगीत ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं और एक-दूसरे को तीजा की शुभकामनाएं दीं। पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू और लोकगीतों की धुन ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।

तीजा पर्व को सामाजिक एकता का प्रतीक क्यों कहा जाता है?

तीजा पर्व में समाज के सभी वर्ग शामिल होते हैं। महिलाएं एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं और साथ मिलकर उत्सव मनाती हैं। यही वजह है कि इसे सामाजिक एकता और भाईचारे का पर्व कहा जाता है।

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