
गर्मी के दिनों में पानी की एक-एक बूंद कितनी कीमती हो जाती है, यह बात उन गांवों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता जहां पीने का पानी भी रोज संघर्ष के बाद मिलता है. छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के सुदूर वनांचल ग्राम शिवलखार में रहने वाले बैगा समुदाय के लोग पिछले कई महीनों से इसी मुश्किल का सामना कर रहे थे. लेकिन अब प्रशासन की त्वरित पहल से गांव में राहत लौट आई है.
खराब पड़े सोलर पंप को सुधारकर दोबारा चालू कर दिया गया है, जिसके बाद गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल हो गई है. इस कदम से खास तौर पर महिलाओं और बच्चों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था.
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा हाल ही में मुंगेली जिले के दौरे पर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के साथ अचानकमार ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम शिवलखार में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने गांव की सबसे बड़ी समस्या यानी पेयजल संकट को प्रमुखता से उठाया. लोगों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए दो ड्यूल सोलर पंपों में से एक लंबे समय से खराब पड़ा हुआ था.
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ग्रामीणों के मुताबिक, सोलर पंप खराब होने के कारण पूरे गांव में पानी की भारी दिक्कत हो रही थी. विशेष रूप से बैगा जनजाति की महिलाओं और बच्चों को पीने का पानी लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था. गर्मी बढ़ने के साथ हालात और ज्यादा गंभीर हो गए थे. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की थी.
समस्या की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने चौपाल में ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद विभाग ने क्रेडा विभाग के साथ समन्वय बनाकर खराब सोलर पंप को बदलने और सुधारने का काम तेजी से पूरा किया. प्रशासन की सक्रियता के चलते कुछ ही समय में पंप दोबारा चालू हो गया.
सोलर पंप के शुरू होते ही गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल हो गई है. इससे ग्रामीणों में खुशी का माहौल है. ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि समय पर हुई कार्रवाई से उन्हें बड़ी राहत मिली है. खासकर महिलाओं और बच्चों को अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा.
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