Bhagat Singh 119th Jayanti पर CM रेखा गुप्ता का भावुक संदेश, जानें क्या कहा

Published : Sep 28, 2026, 10:32 AM IST
Bhagat Singh 119th Jayanti पर CM रेखा गुप्ता का भावुक संदेश, जानें क्या कहा

सार

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की 119वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भगत सिंह को 'भारत की वीरता का अमर प्रतीक' बताया। पीएम मोदी और ओम बिरला समेत कई नेताओं ने भी उनके बलिदान को याद किया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भगत सिंह को "भारत की वीरता, साहस और गौरव का अमर प्रतीक" बताया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन आज भी हर पीढ़ी में देशभक्ति जगाता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में सीएम गुप्ता ने पंजाब से भगत सिंह के जुड़ाव और देश की यादों में उनकी जगह को याद किया। उन्होंने लिखा, "पंजाब की मिट्टी में जन्मे, जिनकी वीरता की दहाड़ दिल्ली तक गूंजी, और जिनका नाम भारत माता के दिल में अमर हो गया... वो नाम है शहीद-ए-आजम भगत सिंह।"

मुख्यमंत्री ने भगत सिंह की जवानी और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनके समर्पण पर भी बात की। उन्होंने कहा, "भरी जवानी में सदियों जितना बड़ा संकल्प। आंखों में आजाद भारत का सपना, दिल में मातृभूमि के लिए असीम प्यार और इतने तेज विचार जिन्होंने पूरे देश में आजादी की लौ जला दी।"

गुप्ता ने कहा कि भगत सिंह का जीवन नागरिकों में कर्तव्य की भावना को प्रेरित करता है। उन्होंने आगे कहा, "शहीद भगत सिंह जी भारत की वीरता, साहस और गौरव के अमर प्रतीक हैं। उनका जीवन हर पीढ़ी में देशभक्ति जगाता है और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य और समर्पण की भावना भरता है।"

अपने संदेश के आखिर में उन्होंने कहा, "भारत माता के अमर सपूत, शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।"

देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी और उन्हें "युवाओं के लिए प्रेरणा" बताया। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "भारत माता के वीर सपूत, अमर शहीद भगत सिंह जी की जयंती पर मैं उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं। उनका साहस, देशभक्ति और आदर्श युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनके समर्पण और योगदान का कर्ज देश कभी नहीं चुका सकता।"

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी भगत सिंह की 119वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भगत सिंह को "युवा चेतना, वैचारिक साहस और अन्याय के खिलाफ लड़ाई का प्रतीक" बताया। एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने भगत सिंह को "क्रांति, विचारधारा और अदम्य देशभक्ति का अमर प्रतीक" कहा। उन्होंने लिखा, "क्रांति, विचारधारा और अदम्य देशभक्ति के अमर प्रतीक शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।"

इतिहास में उनकी जगह को याद करते हुए बिरला ने कहा, "भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में शहीद भगत सिंह जी का नाम युवा चेतना, वैचारिक साहस और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के प्रतीक के रूप में हमेशा अमर रहेगा।"

उनके जीवन को याद करते हुए बिरला ने कहा कि देश के लिए उनके इस बलिदान ने उस दौर के युवाओं में आजादी और राष्ट्र की चेतना को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, "बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने देश की आजादी और बड़े सामाजिक बदलाव को अपने जीवन का मकसद बना लिया था। उनका संघर्ष सिर्फ विदेशी शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं था; बल्कि उन्होंने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जहां शोषण, असमानता और अन्याय के लिए कोई जगह न हो। उनकी शहादत ने उस दौर के युवाओं में आजादी और राष्ट्र की चेतना पर गहरा असर डाला।"

उन्होंने आगे कहा, "छोटी सी उम्र में उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास की उन अमर गाथाओं में शामिल है, जिन्हें देश हमेशा श्रद्धा और सम्मान के साथ याद रखेगा।"

संदेश के आखिर में बिरला ने उनके साहस, विचारों, अध्ययनशीलता और बलिदान को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "आज उनकी जयंती पर, हम भगत सिंह जी के साहस, विचारों, अध्ययनशीलता और बलिदान को नमन करते हैं।"

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर शेयर किए गए एक वीडियो संदेश में भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भगत सिंह को "हर भारतीय, खासकर देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत" बताया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और लोगों, खासकर युवाओं से एक ज्ञानवान, मूल्य-आधारित और सक्षम उत्तर प्रदेश बनाने में योगदान देने की अपील की।

एक क्रांतिकारी का जीवन और विरासत

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। वह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक बनकर उभरे।

8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने अंग्रेजी कानूनों के विरोध में दिल्ली की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के अंदर बम फेंके थे। उन्होंने जानबूझकर सरेंडर किया और बाद की अदालती कार्यवाही का इस्तेमाल ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना संदेश देने के लिए किया।

बाद में भगत सिंह को लाहौर साजिश मामले में दोषी ठहराया गया और 23 मार्च 1931 को 23 साल की उम्र में शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के साथ उन्हें फांसी दे दी गई।

(हेडलाइन को छोड़कर, इस खबर को हमारी टीम ने संपादित नहीं किया है और इसे सिंडिकेटेड फीड से प्रकाशित किया गया है।)

PREV

दिल्ली की राजनीति, मेट्रो-ट्रैफिक अपडेट्स, प्रदूषण स्तर, प्रशासनिक फैसले और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी पाएं। राजधानी की रियल-टाइम रिपोर्टिंग के लिए Delhi News in Hindi सेक्शन देखें — सटीक और तेज़ समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

सड़क की जांच से थप्पड़ विवाद तक... तिलक नगर में प्रवेश वर्मा और AAP आमने-सामने
INDIA Bloc Meeting: CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष की बड़ी बैठक, केजरीवाल-डीएमके ने बनाई दूरी?