
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा को लेकर एक नई ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है। इसे एक महीने के लिए पब्लिक डोमेन में रखा गया है, ताकि लोग और स्टेकहोल्डर्स इस पर अपने सुझाव दे सकें। इस पॉलिसी का मकसद ई-रिक्शा के संचालन को बेहतर बनाना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और जाम की समस्या को खत्म करते हुए लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, सरकार दिल्ली में ई-रिक्शा की अधिकतम संख्या 2.5 लाख तय करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही फिटनेस सर्टिफिकेट, वैध लाइसेंस और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन को भी अनिवार्य किया जाएगा। इससे यह तय होगा कि केवल योग्य गाड़ियां ही शहर की सड़कों पर चलें।
परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि यह पॉलिसी यात्रियों की जरूरतों और ट्रैफिक मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा आज के समय में एक जरूरी और सस्ता साधन है, खासकर पतली गलियों और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए। परिवहन मंत्री ने कहा,
एक बार लोगों के सुझाव आ जाएं, फिर हम उनकी समीक्षा करेंगे और जरूरत के हिसाब से बदलाव करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि ई-रिक्शा सिस्टमैटिक तरीके से चलें, लोगों को अच्छी सर्विस मिले और इनसे ट्रैफिक जाम न लगे। जो गाड़ियां तय मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, खासकर जुगाड़ से बनी असुरक्षित गाड़ियां, उन्हें चलने की इजाजत नहीं मिलेगी।
रिलीज में बताया गया है कि इस नई पॉलिसी से ओवरलोडिंग की समस्या पर भी लगाम लगेगी। साथ ही, पैसेंजर कैपेसिटी, फिटनेस और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। लोगों के फीडबैक के बाद सरकार रूट और किराये जैसे अन्य मुद्दों पर भी विचार करेगी। पॉलिसी फाइनल होने के 90 दिनों के भीतर इसे लागू करने की योजना है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार अपने बस नेटवर्क को भी मजबूत कर रही है। इसके तहत रिहायशी और बाहरी इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए छोटी बसें चलाई जा रही हैं। पंकज कुमार सिंह ने कहा कि ई-रिक्शा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बेहतर तालमेल से यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी और दिल्ली का ट्रैफिक भी सुधरेगा।
वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज और मनीष सिसोदिया ने खानपुर में एक आयुष्मान आरोग्य मंदिर की हालत को लेकर सवाल उठाए थे। इस पर पलटवार करते हुए सिंह ने कहा कि छत के एक छोटे से हिस्से में खराबी आ गई थी, जिसकी मरम्मत चल रही है। उन्होंने कहा कि इस छोटी सी घटना को पूरे हेल्थकेयर सिस्टम की नाकामी के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय दिल्ली के हेल्थकेयर सिस्टम का क्या हाल था, यह जनता अच्छे से जानती है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर सही से काम कर रहे हैं और लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। सरकार दवाइयों की उपलब्धता समेत अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रही है। छत के एक छोटे से हिस्से की मरम्मत को लेकर पूरे हेल्थ मॉडल पर सवाल उठाना बिल्कुल गलत है।
परिवहन मंत्री ने आगे कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया को ग्राउंड रियलिटी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कामकाज का खुद आकलन करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सुविधाओं से दिल्ली वालों को फायदा हो रहा है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार पब्लिक सर्विस को मजबूत करने पर पूरा फोकस कर रही है। एक महीने के पब्लिक कंसल्टेशन पीरियड के दौरान मिले सुझावों पर विचार करने के बाद ही ड्राफ्ट ई-रिक्शा पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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