Delhi EoDB Bill 2026: बिजनेस शुरू करना होगा आसान, जानें नए नियम

Published : Sep 04, 2026, 02:34 PM IST
delhi ease of doing business bill 2026

सार

दिल्ली में कारोबार आसान बनाने के लिए Ease of Doing Business Bill 2026 को मंजूरी मिली। Single Window, तेज मंजूरी और सरल Compliance से उद्यमियों को राहत मिलेगी।

दिल्ली में कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली कैबिनेट ने Delhi Ease of Doing Business Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून का मकसद कारोबारियों और उद्यमियों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर, बार-बार दस्तावेज जमा करने और लंबे समय तक मंजूरी का इंतजार करने से राहत देना है।

सरकार का फोकस अब ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है जिसमें Single Window System, डिजिटल आवेदन, समयबद्ध मंजूरी और आसान Compliance के जरिए कारोबार करना कम जटिल हो। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित व्यवस्था में दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी DSIIDC को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा।

Delhi Ease of Doing Business Bill 2026: क्या बदलेगा?

फिलहाल किसी व्यवसाय को शुरू करने या विस्तार देने के लिए अलग-अलग विभागों से कई तरह की मंजूरियां, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और NOC लेने पड़ सकते हैं। यही प्रक्रिया कई बार कारोबारियों के लिए समय और लागत दोनों बढ़ा देती है। नए बिल का उद्देश्य इसी बिखरी हुई व्यवस्था को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। इसके तहत कारोबारी एक ही ऑनलाइन सिस्टम के जरिए approvals, registrations, licences, consents और No Objection Certificates के लिए आवेदन कर सकेंगे। बिल के दायरे में बिल्डिंग प्लान, फायर अप्रूवल, पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन जैसी सेवाओं को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। यानी सोच साफ - कारोबारी का समय सरकारी प्रक्रियाओं में कम और कारोबार बढ़ाने में ज्यादा लगे।

Single Window System से कम होंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर

बिल का सबसे अहम हिस्सा Single Window Online System है। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की प्रक्रियाओं को एक जगह जोड़ना है। नई व्यवस्था लागू होने पर उद्यमियों को एक ही जानकारी अलग-अलग विभागों में बार-बार देने की जरूरत कम होगी। आवेदन और जरूरी दस्तावेज डिजिटल तरीके से जमा किए जा सकेंगे और प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की कोशिश होगी।

दिल्ली सरकार पहले से Single Window व्यवस्था पर काम कर रही है। दिल्ली इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम में दिल्ली फायर सर्विस, लेबर, पावर, DPCC, MCD, PWD और अन्य एजेंसियों से जुड़ी 51 लाइसेंस सेवाएं एकीकृत की जा चुकी थीं। प्रस्तावित बिल इस तरह की व्यवस्था को ज्यादा व्यापक और कानूनी आधार देने की दिशा में कदम है।

Deemed Approval से मंजूरी में देरी पर लगेगा ब्रेक

बिल में Deemed Approval का प्रावधान भी खासा महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि अगर संबंधित विभाग तय समयसीमा के भीतर किसी आवेदन पर फैसला नहीं करता, तो निर्धारित नियमों के अनुसार वह मंजूरी स्वतः स्वीकृत मानी जा सकती है और आवेदक पोर्टल से उसे डाउनलोड कर सकेगा। कारोबारियों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार किसी एक मंजूरी में देरी होने से पूरा प्रोजेक्ट अटक जाता है। समयबद्ध व्यवस्था इस अनिश्चितता को कम कर सकती है।

Low-Risk Business के लिए Self-Certification

प्रस्तावित कानून में कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए Self-Certification की व्यवस्था भी रखी गई है। ऐसे मामलों में कारोबारियों को हर छोटी प्रक्रिया के लिए विभागीय निरीक्षण या अनुमति पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। बिल में जोखिम के आधार पर कारोबारों को देखने की सोच अपनाई गई है। इससे प्रशासन का ध्यान ज्यादा जोखिम वाले मामलों पर केंद्रित करने और कम जोखिम वाले कारोबारों पर अनावश्यक नियामकीय बोझ घटाने की कोशिश की जा रही है।

नए कारोबारों को 3 साल तक Routine Inspection से राहत

प्रस्तावित कानून में नए पंजीकृत उद्यमों के लिए तीन साल तक नियमित निरीक्षण से छूट का प्रावधान भी है। हालांकि गंभीर शिकायत मिलने जैसी परिस्थितियों में कार्रवाई या निरीक्षण का रास्ता खुला रहेगा। सरकार इसे Trust-Based Governance की दिशा में बदलाव के तौर पर देख रही है। यानी सामान्य कारोबार में पहले भरोसा, और नियमों के गंभीर उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई।

Negative List Approach से कारोबार शुरू करना होगा आसान

बिल में Negative List आधारित व्यवस्था का प्रस्ताव भी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन गतिविधियों पर स्पष्ट रूप से रोक नहीं है, उन्हें सामान्य तौर पर अनुमति योग्य बनाने की दिशा में व्यवस्था विकसित की जाएगी। यह पारंपरिक 'पहले अनुमति लो, फिर काम करो' मॉडल से अलग सोच है। यह बदलाव खास तौर पर छोटे कारोबार, स्टार्टअप और नए उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियम जमीन पर किस तरह लागू होते हैं।

Entrepreneurs और Investors को क्या फायदा होगा?

दिल्ली सरकार का दावा है कि इन सुधारों से कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और Technology-driven होगी। इससे उद्यमियों के Compliance Cost और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय घटाने में मदद मिल सकती है।

इसका व्यापक असर निवेश पर भी पड़ सकता है। जब किसी शहर में लाइसेंस, मंजूरी और क्लीयरेंस लेने की प्रक्रिया आसान होती है, तो निवेशकों के लिए प्रोजेक्ट की योजना बनाना और उसे समय पर शुरू करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वजह है कि दिल्ली सरकार इसे सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि नौकरियां बढ़ाने और राजधानी को आर्थिक विकास का मजबूत इंजन बनाने से जोड़कर देख रही है।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन से जोड़कर देख रही दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिक रोजगार पैदा करने और आर्थिक विकास को गति देने वाले व्यापक विजन से जोड़ा है। सरकार का जोर ऐसा कारोबारी माहौल तैयार करने पर है जहां उद्यमी दिल्ली में Build, Grow and Invest यानी कारोबार शुरू करने, विस्तार करने और निवेश करने को लेकर ज्यादा भरोसा महसूस करें।

हालांकि किसी भी Ease of Doing Business सुधार की असली परीक्षा कागज पर नहीं, बल्कि उसके Implementation में होती है। विशेषज्ञों ने भी यह सवाल उठाया है कि अलग-अलग विभागों, एजेंसियों और उनके अलग-अलग सिस्टम को वास्तव में एक डिजिटल विंडो के पीछे कितनी प्रभावी तरीके से जोड़ा जा सकेगा।

Delhi Business Reform Bill की असली चुनौती Implementation

Single Window Portal बनाना पहला कदम है, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती अलग-अलग विभागों की प्रक्रियाओं को वास्तव में एक-दूसरे के साथ जोड़ना होगी। डेटा साझा करने, विभागीय जिम्मेदारी तय करने, समयसीमा लागू कराने और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत रहनी जरूरी है।

यानी अगर पोर्टल एक हो, लेकिन पीछे की प्रक्रिया पहले जैसी ही धीमी और अलग-अलग रहे, तो सुधार का असर सीमित रह सकता है। दूसरी ओर, अगर डिजिटल सिस्टम के साथ जवाबदेही और समयसीमा भी प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह दिल्ली के कारोबारी माहौल में बड़ा बदलाव ला सकता है।

फिलहाल Delhi Ease of Doing Business Bill, 2026 ने दिल्ली में बिजनेस रेगुलेशन को सरल बनाने की दिशा में एक स्पष्ट संकेत जरूर दिया है। अब नजर इसके अगले चरण और जमीन पर लागू होने वाली व्यवस्था पर रहेगी।

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