रिश्वतखोरी के मामले में फंसा जज, कोर्ट में मच गई उथल-पुथल, आखिर में लेना पड़ा ये फैसला

Published : May 24, 2025, 03:02 PM ISTUpdated : May 24, 2025, 03:24 PM IST
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सार

Judge Bribery Allegations: दिल्ली हाई कोर्ट ने GST केस में रिश्वत मांगने के आरोप में एक विशेष जज का तबादला किया है। कोर्ट स्टाफ पर भी भ्रष्टाचार का आरोप, मामले की जाँच जारी।

नई दिल्ली (ANI): दिल्ली हाई कोर्ट ने 2023 में दर्ज GST से जुड़े एक मामले में आरोपी को जमानत देने के लिए रिश्वत मांगने के आरोपों के बीच राउज एवेन्यू कोर्ट के एक विशेष जज का तबादला कर दिया है। 16 मई, 2025 को, उनके कोर्ट स्टाफ (रिकॉर्ड कीपर) के खिलाफ इस संबंध में भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
हाई कोर्ट ने 20 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट से संबंधित विशेष जज के तबादले का आदेश जारी किया।
 

कोर्ट स्टाफ ने प्राथमिकी रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालाँकि, हाई कोर्ट ने उसे कोई तत्काल राहत नहीं दी है। हालाँकि, राज्य को नोटिस जारी किया गया है। 20 मई को न्यायमूर्ति अमित महाजन के समक्ष सुनवाई के दौरान, राज्य के अतिरिक्त वकील ने प्रस्तुत किया कि संबंधित सामग्री जनवरी 2025 में पहले ही दिल्ली सरकार के विधि प्रमुख सचिव को भेज दी गई थी, इसे रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से इस न्यायालय की प्रशासनिक समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। 
यह भी प्रस्तुत किया गया कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को सही ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री रिकॉर्ड में है, जिसकी जांच की आवश्यकता है।
 

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मोहित माथुर ने प्रस्तुत किया कि वर्तमान प्राथमिकी विशेष न्यायाधीश, (पीसी अधिनियम), राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा पारित 16 मई, 2025 के एक आदेश के बाद दर्ज की गई है, जिसके तहत संयुक्त आयुक्त भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था कि क्यों न्यायालय की अवमानना ​​के लिए हाई कोर्ट को रेफरेंस न किया जाए। 
 

यह भी प्रस्तुत किया गया है कि याचिकाकर्ता उक्त न्यायालय में अहलमद (रिकॉर्ड कीपर) के रूप में तैनात था और वर्तमान प्राथमिकी 16 मई, 2025 को दर्ज की गई थी। 
उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई 29 मई को सूचीबद्ध की। याचिकाकर्ता अदालत के कर्मचारी ने उच्च न्यायालय से निष्पक्ष और उचित जांच के लिए मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्थानांतरित करने की प्रार्थना की है और या यह निर्देश दिया जा सकता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्तमान आरोपों को एक साथ जोड़ा जाए और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार सीबीआई के उसी जांच अधिकारी द्वारा जांच की जाए।
 

उन्होंने कथित तौर पर गुप्त सौदे, भ्रष्टाचार, ब्लैकमेलिंग, आपराधिक धमकी, पद का दुरुपयोग, राज्य मशीनरी का दुरुपयोग, जालसाजी और दस्तावेजों के निर्माण, अपहरण, गवाहों को धमकाने और आधिकारिक रिकॉर्ड को नष्ट करने के लिए दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के दो अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच का भी निर्देश मांगा है। उन्होंने व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम, 2011 की धारा 11(2) के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न से सुरक्षा मांगी है।
 

इस बीच, आरोपी अदालत के कर्मचारी ने अग्रिम जमानत के लिए निचली अदालत का रुख किया, जिसे 22 मई को खारिज कर दिया गया। विशेष न्यायाधीश दीपाली शर्मा ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने एसीबी को गिरफ्तारी की स्थिति में, यदि कोई हो, धारा 41, 41 ए सीआरपीसी (बीएनएसएस की धारा 35) के तहत पूर्व सूचना देने का निर्देश दिया है। (ANI) 
 

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