CM रेखा गुप्ता के AI डीपफेक वीडियो पर Delhi High Court का बड़ा एक्शन

Published : Nov 07, 2026, 05:43 PM IST
Delhi High Court (File Photo/ANI)

सार

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीएम रेखा गुप्ता का अपमान करने वाले AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य के नाम पर किसी भी व्यक्ति की गरिमा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ ऐसे AI-जनरेटेड वीडियो, तस्वीरें और सोशल मीडिया पोस्ट तुरंत हटाने का आदेश दिया है, जिनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को कथित तौर पर गलत और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। कोर्ट ने साफ कहा कि राजनीतिक व्यंग्य के नाम पर किसी व्यक्ति की गरिमा को ऐसी चोट नहीं पहुंचाई जा सकती, जिसकी भरपाई न हो सके। जस्टिस मनोज जैन ने शुक्रवार को गुप्ता द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य के खिलाफ सोशल मीडिया पर AI-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट फैलाने के आरोप में दायर एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक हस्तियों और नेताओं की आलोचना होना और उन पर राजनीतिक व्यंग्य किया जाना आम बात है, लेकिन सटायर या बोलने की आजादी के बहाने उनकी गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की, “सटायर किसी की भावना को आहत तो कर सकता है, लेकिन इसे किसी की गरिमा पर ऐसा घाव करने की इजाजत नहीं दी जा सकती, जो कभी भर न सके।”

कानूनी मामले से जुड़ी अहम बातें

गुप्ता ने कथित तौर पर मानहानि करने वाले और AI की मदद से बनाए गए डीपफेक कंटेंट के पब्लिकेशन और इसे फैलाने पर परमानेंट रोक लगाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके केस के मुताबिक, ये विवादित कंटेंट कथित तौर पर AAP के ऑफिशियल और वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट्स से पब्लिश किए गए थे और इनमें उन्हें शराब बेचने वाली, फेरीवाली और डिलीवरी एजेंट के रूप में दिखाया गया था। इन सामग्रियों में कथित तौर पर “हर हर रेखा या घर घर ठेका” नाम की एक तथाकथित योजना का भी जिक्र था। गुप्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि ये वीडियो और तस्वीरें बेहद अपमानजनक और कलंकित करने वाली हैं, इसलिए इन्हें तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाना चाहिए।

AI और गरिमा को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने इन विवादित सामग्रियों के नेचर पर गौर किया, जिनमें एक कंटेंट में कथित तौर पर मुख्यमंत्री को रात में एक झगड़े के बीच पुरुषों को शराब परोसते हुए दिखाया गया था और इसके बैकग्राउंड में एक रोमांटिक गाना बज रहा था। कोर्ट ने एक अन्य वीडियो का भी जिक्र किया जिसमें कथित तौर पर गुप्ता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री को शराब और आइस क्यूब डालते हुए दिखाया गया था। कोर्ट ने कहा कि AI से बनाए गए ये दृश्य एक “लगभग असली जैसी नकल” लग रहे थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कंटेंट से यह गलत प्रभाव पड़ सकता है कि खुद गुप्ता शराब की बिक्री में शामिल थीं, जो उनकी पर्सनल डिग्निटी और मोरल कैरेक्टर को काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

कोर्ट ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि सार्वजनिक पद पर होने से अपने आप ही ज्यादा जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ता है, लेकिन साथ ही, किसी भी व्यक्ति की गरिमा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।” कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में, राजनीतिक दलों को सरकार की नीतियों, फैसलों और प्रशासनिक कामों की आलोचना करने का पूरा हक है। हालांकि, AI कंटेंट के जरिए मुख्यमंत्री को आपत्तिजनक तरीके से दिखाना, जिससे कथित तौर पर उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती हो, उसे राजनीतिक व्यंग्य मानकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आगे कहा कि हास्य और राजनीतिक व्यंग्य और दूसरी तरफ किसी व्यक्ति की गरिमा पर आपत्तिजनक हमले के बीच बहुत ही बारीक अंतर है।

कोर्ट ने टिप्पणी की, “जब बात सिर्फ हास्य या सटायर की हो, तो कोर्ट शायद दखल न दे, लेकिन जब किसी की गरिमा पर हमला किया जाए, उसे कलंकित किया जाए और उसका मजाक उड़ाया जाए, तो कोर्ट का फर्ज बनता है कि वह इसके खिलाफ कड़े कदम उठाए।” जस्टिस जैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर भी बात की और कहा कि तकनीक ने एकदम असली लगने वाले वीडियो और तस्वीरें बनाना काफी आसान कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के कंटेंट को बनाने और पब्लिश करने की जिम्मेदारी आखिरकार इंसान की ही है।

कोर्ट के निर्देश और आगे के कदम

यह पाते हुए कि गुप्ता ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला पेश किया है और सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में है, कोर्ट ने कहा कि यह विवादित कंटेंट सोशल मीडिया के जरिए बिजली की रफ्तार से फैल सकता है, जिससे ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 3, 4 और 5 को शिकायत में बताए गए सभी छह URL तुरंत हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने प्रतिवादियों को समन भी जारी किया और निर्देश दिया कि वे समन मिलने के 30 दिनों के भीतर अपना लिखित बयान दाखिल करें। मामले पर अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी।

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एशियानेट हिंदी स्टाफ ने संपादित नहीं किया है और इसे सिंडिकेट फीड से प्रकाशित किया गया है।)

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