
दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने के हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता लगातार ग्राउंड पर हैं। रविवार को करीब तीन घंटे तक घटनास्थल पर रहकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी करने के बाद मुख्यमंत्री सोमवार सुबह एक बार फिर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति देखी और अधिकारियों को जरूरी संसाधनों के साथ अभियान तेज रखने के निर्देश दिए।
घटनास्थल पर NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD समेत कई एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। रातभर चले ऑपरेशन के बाद भी मलबे को पूरी तरह हटाने और किसी संभावित फंसे व्यक्ति की तलाश का काम जारी रहा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल करने और रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए।
हादसे के बाद सरकार ने अब सिर्फ राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय भवनों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। भवन मालिक के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और जिन सरकारी अधिकारियों की निगरानी में चूक सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता लगातार एक्शन मोड में हैं। कल घटनास्थल पर तीन घंटे बिताने के बाद मुख्यमंत्री आज सुबह फिर से स्थिति का जायजा लेने ग्राउंड जीरो पर पहुँचीं और बचाव व राहत कार्यों की सीधी समीक्षा की।
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प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सत्य निकेतन की यह पुरानी इमारत पेइंग गेस्ट यानी PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के समय इमारत में मरम्मत और निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को बताया कि बेसमेंट में पानी जमा था और पुरानी इमारत में चल रहे काम के साथ यह स्थिति हादसे की वजह बनी।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि बेसमेंट में पानी भरने की समस्या पहले से थी और इमारत की संरचनात्मक स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। हालांकि हादसे की पूरी वजह की जांच अभी जारी है और अंतिम जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय होगी। हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने आसपास के कुछ असुरक्षित ढांचों को खाली कराया है और खतरनाक इमारतों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में भवन मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दिल्ली सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस बीच MCD ने दक्षिण क्षेत्र के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। अधिकारियों पर कार्रवाई का आधार उनकी कथित निगरानी संबंधी चूक की जांच से जुड़ा है। यानी सरकार का फोकस अब सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई पर नहीं, बल्कि यह पता लगाने पर भी है कि एक पुरानी और संवेदनशील इमारत में चल रही गतिविधियों पर निगरानी किस स्तर पर हुई।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार अब सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों के लिए सुरक्षा नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सरकार MCD के साथ मिलकर ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन जरूरी होगा।
इस दायरे में PG, नर्सिंग होम, स्कूल और इस तरह की दूसरी इमारतें शामिल होंगी। बिना जरूरी सुरक्षा प्रमाणन के किसी भवन में सार्वजनिक गतिविधि की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव है। यह कदम खास तौर पर उन इलाकों के लिए अहम माना जा रहा है जहां पुराने रिहायशी मकानों को PG, हॉस्टल या दूसरे व्यावसायिक इस्तेमाल में बदल दिया गया है।
CM रेखा गुप्ता ने यह भी कहा है कि सत्य निकेतन और आसपास के इलाके में खतरनाक इमारतों की पहचान की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे ढांचों को गिराने की कार्रवाई भी होगी। हादसे वाली इमारत के पास मौजूद एक अन्य असुरक्षित इमारत को भी खाली कराया गया है और उसे हटाने की कार्रवाई की बात सामने आई है। प्रशासन का उद्देश्य साफ है—एक हादसे के बाद किसी दूसरे जर्जर या कमजोर ढांचे को अगला खतरा बनने से पहले चिन्हित किया जाए।
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के करीब होने के कारण छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय इलाका है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और निजी हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में एक छात्र आवासीय इमारत के ढहने से PG और स्टूडेंट हाउसिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
यही वजह है कि सरकार की प्रस्तावित स्ट्रक्चरल ऑडिट व्यवस्था का असर सिर्फ सत्य निकेतन तक सीमित नहीं रहने वाला। अगर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है तो दिल्ली के दूसरे इलाकों में चल रहे PG, हॉस्टल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की सुरक्षा जांच भी तेज हो सकती है।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है—इमारत कितनी भी पुरानी हो, उसमें लोगों की जान जोखिम में डालकर कोई गतिविधि नहीं चलने दी जाएगी। लापरवाही सामने आने पर मालिक से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक, कार्रवाई की जाएगी।
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