
दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने निर्माण गतिविधियों की निगरानी और सख्त करने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि अब बड़े निर्माण स्थलों पर सिर्फ कागजी जांच या मौके पर होने वाले निरीक्षण के भरोसे नहीं रहा जाएगा। Dust Portal और AI-enabled कैमरों के जरिए इन साइट्स पर नजर रखी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अनदेखी होती दिखे तो इसकी जानकारी तुरंत MCD, संबंधित विधायक या उन्हें सीधे दी जाए। उनका संदेश साफ है- नियम तोड़ने वालों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ने का दौर अब नहीं चलेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण स्थलों की निगरानी Dust Portal के जरिए की जाएगी। यहां लगे कैमरों और सेंसर से मिलने वाली जानकारी को डिजिटल सिस्टम के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने जुलाई में Dust Portal 2.0 शुरू किया था। DPCC के इस अपग्रेडेड सिस्टम में GIS Mapping, 360 डिग्री PTZ कैमरे, PM10 और PM2.5 सेंसर तथा AI आधारित एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद निर्माण और ध्वस्तीकरण वाली साइट्स पर धूल नियंत्रण के नियमों की रियल-टाइम निगरानी करना है। सरकार के मुताबिक, इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी साइट पर धूल रोकने के जरूरी इंतजाम किए गए हैं या नहीं। सिस्टम में गड़बड़ी या उल्लंघन सामने आने पर संबंधित अधिकारियों तक अलर्ट पहुंचाया जा सकेगा।
Inform, tag, complain and stop them!
Last time, even under GRAP, some construction continued behind covers.
This time, sites above 500 sq. metres will be monitored through the Dust Portal and AI-enabled cameras. Alerts will reach our Control and Command Centre. Notices,… pic.twitter.com/5H2EOn3zUw— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 21, 2026
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में खास तौर पर कहा कि इस बार निर्माण स्थलों की निगरानी सिर्फ साइट विजिट तक सीमित नहीं रहेगी। Dust Portal से मिलने वाले अलर्ट दिल्ली के Control and Command Centre तक पहुंचेंगे। यानी अगर किसी साइट पर धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो कार्रवाई की प्रक्रिया तेजी से शुरू की जा सकेगी। पहले जहां अधिकारियों को निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचना पड़ता था, वहीं AI और कैमरा आधारित व्यवस्था शुरुआती स्तर पर ही संभावित उल्लंघन को चिन्हित करने में मदद करेगी।
सरकार ने यह सिस्टम इसलिए भी मजबूत किया है क्योंकि निर्माण और सड़क से उठने वाली धूल दिल्ली के वायु प्रदूषण में बड़ा योगदान देती है। दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से पैदा होने वाली धूल की हिस्सेदारी गर्मियों में करीब 27 प्रतिशत और सर्दियों में करीब 15 प्रतिशत तक बताई गई है।
CM रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में पिछली बार की व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले GRAP लागू होने के बावजूद कुछ जगहों पर निर्माण कार्य कवर के पीछे जारी रहने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी वजह से इस बार सरकार निगरानी को तकनीक से जोड़ रही है। कैमरों, सेंसर और AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करके निर्माण स्थल की स्थिति पर लगातार नजर रखने की कोशिश की जा रही है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। अब सरकार ने इन्हें पहले से तय व्यापक विंटर पॉल्यूशन फ्रेमवर्क के साथ जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
दिल्ली सरकार के नए विंटर पॉल्यूशन फ्रेमवर्क के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले खुले निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों पर रोक रहेगी। जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सीमित छूट दी गई है। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सबसे सख्त अवधि लागू होगी। इस दौरान निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर और कड़े प्रतिबंध रहेंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस अवधि में केवल जरूरी सार्वजनिक उपयोगिता या आपात स्थिति से जुड़े कुछ सरकारी प्रोजेक्ट ही अपवाद के तौर पर जारी रह सकेंगे। निर्माण सामग्री लेकर आने वाले वाहनों पर भी इस अवधि में रोक का प्रावधान है।
हालांकि, सरकार के व्यापक नियमों में यह अंतर भी महत्वपूर्ण है कि नवंबर से जनवरी की सामान्य प्रतिबंध अवधि और 10 दिसंबर से 20 जनवरी की सख्त अवधि एक जैसी नहीं हैं। कुछ साइट्स पर अंदरूनी फिनिशिंग, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल कार्य निर्धारित धूल नियंत्रण नियमों के तहत जारी रह सकते हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि निगरानी का उद्देश्य केवल डेटा जमा करना नहीं है। उल्लंघन मिलने पर नोटिस, चेतावनी और जुर्माने जैसी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही बार-बार नियम तोड़ने वाले निर्माण स्थलों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता भी खुला रहेगा। DPCC का Dust Portal 2.0 इसी तरह की डिजिटल निगरानी और enforcement को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है।
CAQM ने भी निर्माण और ध्वस्तीकरण वाली साइट्स पर धूल नियंत्रण नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है। अगस्त 2026 में जारी संशोधन के जरिए 500 वर्ग मीटर से छोटे स्थलों पर गंभीर उल्लंघन के मामलों में भी NCR के अधिक स्थानीय निकायों को कार्रवाई और अभियोजन की प्रक्रिया में सक्षम बनाया गया है।
रेखा गुप्ता ने लोगों से सीधे निगरानी में भागीदार बनने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर किसी निर्माण स्थल पर प्रतिबंध के बावजूद काम होता दिखे या धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन नजर आए तो लोग इसकी सूचना MCD, अपने MLA या मुख्यमंत्री को सीधे दे सकते हैं।
सरकार की रणनीति साफ दिख रही है- सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल पर पहले से निगरानी रखी जाए और उल्लंघन सामने आते ही कार्रवाई की जाए। इस पूरी व्यवस्था में अब कैमरा, सेंसर और AI सिर्फ तकनीकी शब्द नहीं रहेंगे। सरकार इन्हें जमीन पर कार्रवाई का आधार बनाने की कोशिश कर रही है। असली परीक्षा हालांकि सर्दियों में होगी, जब दिल्ली की हवा पर प्रदूषण का दबाव सबसे ज्यादा बढ़ता है।
दिल्ली की राजनीति, मेट्रो-ट्रैफिक अपडेट्स, प्रदूषण स्तर, प्रशासनिक फैसले और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी पाएं। राजधानी की रियल-टाइम रिपोर्टिंग के लिए Delhi News in Hindi सेक्शन देखें — सटीक और तेज़ समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।