
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार राजधानी में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने और उन्हें चलाने की मंजूरी देने पर विचार कर रही है। यह जानकारी दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को दी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में लंबे समय से ऐसे संस्थानों की मांग की जा रही है।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रस्तावित बिल पर ANI से बात करते हुए आशीष सूद ने कहा कि सरकार एक ऐसा ढांचा बनाने पर काम कर रही है, जिससे दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज काम कर सकें। उन्होंने कहा
काफी समय से यह मांग थी कि दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को काम करने की इजाजत दी जानी चाहिए. सरकार दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के संचालन को आसान बनाने के बारे में सोच रही है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक ऐसे कानून पर चर्चा चल रही है, जिसका मकसद राजधानी में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के लिए रास्ता बनाना है. अभी तक दिल्ली में हायर एजुकेशन के लिए मुख्य रूप से सेंट्रल, स्टेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज पर ही निर्भरता रही है।
दिल्ली में देश के कई बड़े और नामी संस्थान हैं, जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी। UGC के मुताबिक, एक रेगुलर यूनिवर्सिटी सीधे संसद या राज्य विधानसभा के कानून के तहत बनती है. वहीं, एक डीम्ड या डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी को सरकार की तरफ से उसके ऊंचे एकेडमिक स्टैंडर्ड के आधार पर यूनिवर्सिटी के बराबर का दर्जा दिया जाता है।
अगर यह कानून लागू होता है, तो उम्मीद है कि इससे हायर एजुकेशन के मौके बढ़ेंगे, छात्रों के लिए संस्थानों की संख्या में इजाफा होगा और शिक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम राजधानी और आसपास के इलाकों के छात्रों के बीच क्वालिटी हायर एजुकेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मदद कर सकता है।
हालांकि, मंत्री ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि बिल में कौन-कौन से खास प्रावधान शामिल हो सकते हैं. रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, योग्यता के नियम और निगरानी के तरीकों से जुड़ी जानकारी भी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। दिल्ली सरकार का यह प्रस्ताव राजधानी के हायर एजुकेशन सिस्टम में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है और जैसे-जैसे बिल का ड्राफ्ट आगे बढ़ेगा, इस पर सबकी नजरें रहेंगी।
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