Delhi Engineering Cadre: रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, PWD को मिली नई ताकत

Published : Sep 10, 2026, 10:32 AM IST
Delhi Chief Minister Rekha Gupta (Photo/ANI)

सार

दिल्ली PWD के लिए स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर को केंद्र की मंजूरी मिल गई है। 36 कैटेगरी के 3,214 इंजीनियरिंग पद अब अलग कैडर में शामिल होंगे।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत दिल्ली के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के लिए अलग और स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाया जाएगा। केंद्र की इस मंजूरी के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि दिल्ली के लिए अलग PWD इंजीनियरिंग कैडर की जरूरत करीब तीन दशक से महसूस की जा रही थी, लेकिन यह मामला लंबे समय से अटका हुआ था। उनके मुताबिक, दिल्ली सरकार ने इस दिशा में फैसला लेकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और अब केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद राजधानी को अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

Delhi PWD Engineering Cadre: 3,214 इंजीनियरिंग पद होंगे अलग

इस फैसले के तहत दिल्ली PWD में 36 अलग-अलग कैटेगरी के कुल 3,214 स्वीकृत इंजीनियरिंग पदों को सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट यानी CPWD कैडर से अलग किया जाएगा। इन पदों को अब स्वतंत्र 'दिल्ली PWD इंजीनियरिंग कैडर' के तहत लाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली PWD को अपने इंजीनियरिंग स्टाफ पर ज्यादा प्रशासनिक नियंत्रण मिलेगा। खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी और विभाग में इंजीनियरिंग अधिकारियों की जिम्मेदारियों को दिल्ली सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।

CM Rekha Gupta का दावा- डेढ़ साल में आगे बढ़ा 30 साल पुराना मामला

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में अलग इंजीनियरिंग कैडर की जरूरत करीब 30 साल से बनी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने इस मामले में फैसला लिया और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिसके बाद करीब डेढ़ साल में यह प्रस्ताव केंद्र की मंजूरी तक पहुंच गया।

सीएम के मुताबिक, स्वतंत्र कैडर बनने से खाली इंजीनियरिंग पदों को तेजी से भरा जा सकेगा। इससे सड़कों, पुलों और सरकारी इमारतों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी मजबूत होगी और निर्माण कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी की इस तीन दशक पुरानी जरूरत को पूरा करने और दिल्ली के विकास को नई ताकत देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद।

Delhi Infrastructure Projects: सड़कों, पुलों और सरकारी इमारतों पर फोकस

दिल्ली सरकार के लिए यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राजधानी में कई बड़े निर्माण और विकास कार्यों की तैयारी चल रही है। इनमें नया सचिवालय बनाने के साथ-साथ दिल्ली के सभी 11 जिलों में मिनी-सचिवालय स्थापित करने की योजना भी शामिल है। इसके अलावा मंडियों, खेल के मैदानों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित हैं। इन सभी कार्यों के लिए लगातार इंजीनियरिंग सपोर्ट की जरूरत होगी। राजधानी में सड़कों, पुलों और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी काम होना है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनने से इन परियोजनाओं की प्लानिंग, क्रियान्वयन और निगरानी में ज्यादा निरंतरता आएगी।

Delhi PWD में जवाबदेही और निगरानी पर जोर

सरकार के मुताबिक, स्वतंत्र PWD इंजीनियरिंग कैडर बनाने का उद्देश्य सिर्फ इंजीनियरिंग पदों के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना नहीं है। इसके पीछे सार्वजनिक निर्माण कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश भी है। अलग कैडर होने के बाद इंजीनियरिंग अधिकारियों की जिम्मेदारियों और उनके काम की निगरानी को दिल्ली सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था से ज्यादा प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकेगा। इससे अधिकारियों के काम की मॉनिटरिंग और प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नजर रखना आसान होने की उम्मीद है।

दिल्ली PWD को मिलेगा ज्यादा प्रशासनिक नियंत्रण

केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ अब दिल्ली PWD के स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर को स्थापित करने का औपचारिक आधार मिल गया है। सरकार का मानना है कि इससे विभाग पहले के मुकाबले ज्यादा आत्मनिर्भर तरीके से काम कर सकेगा। स्वतंत्र कैडर के जरिए इंजीनियरिंग अधिकारियों की नियुक्ति, जिम्मेदारी और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था को दिल्ली की जरूरतों के हिसाब से बेहतर तरीके से संचालित करने की उम्मीद है। इसका सीधा असर राजधानी में चलने वाले सार्वजनिक निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गति और निगरानी पर पड़ सकता है।

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