
नई दिल्ली। दिल्ली में अपराधों की जांच को अधिक वैज्ञानिक और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) की बैठक में शेख सराय में अत्याधुनिक रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (Regional Forensic Science Laboratory) के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर ₹151.81 करोड़ की लागत आएगी। नई फॉरेंसिक लैब बनने के बाद आपराधिक मामलों से जुड़े सबूतों की वैज्ञानिक जांच में तेजी आने की उम्मीद है। इससे फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने में लगने वाला समय कम हो सकता है और जांच एजेंसियों को मामलों की पड़ताल में बेहतर तकनीकी सहायता मिलेगी।
शेख सराय में प्रस्तावित रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इसका मकसद सिर्फ एक नई इमारत खड़ी करना नहीं, बल्कि दिल्ली की फॉरेंसिक जांच क्षमता को मजबूत करना है। आज के समय में हत्या, साइबर अपराध, यौन अपराध और अन्य गंभीर मामलों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। घटनास्थल से मिले सबूतों की सही और समयबद्ध जांच कई मामलों की दिशा तय करती है। ऐसे में नई लैब जांच प्रक्रिया को और मजबूत आधार दे सकती है।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में शेख सराय में ₹151.81 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निर्माण को स्वीकृति दी गई।
इससे आपराधिक मामलों में साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच तेज होगी, फोरेंसिक रिपोर्ट…— CMO Delhi (@CMODelhi) September 12, 2026
नई रीजनल FSL का सबसे बड़ा फायदा आपराधिक मामलों में मिलने वाले साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच को तेज करने के रूप में होगा। फॉरेंसिक जांच में देरी होने पर कई मामलों में जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। सरकार का मानना है कि इस नई सुविधा से फॉरेंसिक रिपोर्ट तेजी से तैयार की जा सकेंगी। इससे पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ेगी और मामलों की जांच को वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
शेख सराय में बनने वाली इस रीजनल फॉरेंसिक लैब से विशेष रूप से दक्षिण दिल्ली, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली और मध्य दिल्ली के क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। इन इलाकों से जुड़े आपराधिक मामलों के साक्ष्यों की जांच के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर फॉरेंसिक सुविधा उपलब्ध होने से प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। जांच एजेंसियों को भी फॉरेंसिक सहायता के लिए बेहतर संसाधन मिलेंगे।
नई रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शुरू होने का एक अहम फायदा रोहिणी स्थित FSL पर पड़ने वाला काम का दबाव कम होना भी है। दिल्ली जैसे बड़े महानगर में लगातार बढ़ते मामलों के बीच फॉरेंसिक जांच की मांग भी काफी अधिक रहती है। ऐसे में एक अतिरिक्त आधुनिक रीजनल लैब बनने से फॉरेंसिक मामलों का बेहतर वितरण हो सकेगा। इससे रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी आपराधिक मामले में सबूतों की वैज्ञानिक जांच से जांच और अदालत, दोनों स्तरों पर तथ्यों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। ₹151.81 करोड़ की यह परियोजना इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मंजूर की गई है। सरकार का उद्देश्य जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक मजबूत वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंजूर इस परियोजना को दिल्ली की आधुनिक अपराध जांच व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई रीजनल FSL बनने के बाद राजधानी में वैज्ञानिक जांच के बुनियादी ढांचे को और मजबूती मिलेगी। तेज फॉरेंसिक जांच, समय पर रिपोर्ट और जांच एजेंसियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना इस परियोजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। खासकर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और मध्य दिल्ली के मामलों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
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