दिल्ली दंगा 2020: शरजील-उमर खालिद की जमानत पर SC ने भेजा पुलिस को नोटिस

Published : Sep 22, 2025, 04:53 PM IST
Supreme Court of India

सार

2020 दिल्ली दंगा: UAPA मामले में शरजील इमाम व उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा। HC के जमानत खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शरजील इमाम, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और शिफा उर रहमान की याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। इन याचिकाओं में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े UAPA मामले में जमानत देने से इनकार करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को तय की है। वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- वे छात्र हैं और पांच साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। बेंच ने आदेश दिया, “हां, हम आपकी बात सुनेंगे और इसका निपटारा करेंगे…सभी को नोटिस जारी करें।” 

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को इमाम, खालिद और सात अन्य- मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा को जमानत देने से इनकार कर दिया था। 2 सितंबर को ही एक अन्य आरोपी तसलीम अहमद की जमानत याचिका को हाई कोर्ट की एक अलग बेंच ने खारिज कर दिया था।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगे को लेकर कोर्ट को क्या बताया था…

दिल्ली पुलिस ने उनकी जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा था कि यह अचानक हुए दंगों का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मामला है जहां "एक भयावह मकसद और सोची-समझी साजिश के साथ दंगों की योजना पहले से बनाई गई थी"। हाई कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में पूरी साजिश में इमाम और खालिद की भूमिका "गंभीर" थी, जिन्होंने "मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को बड़े पैमाने पर लामबंद करने के लिए उकसाने" के लिए सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण दिए थे। उन्होंने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगा मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कड़े प्रावधानों के तहत बड़ी साजिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी।

CAA-NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हुई थी 53 मौत

2020 में दिल्ली पुलिस ने इमाम को UAPA के तहत गिरफ्तार किया था और उन्हें दिल्ली दंगा मामले के पीछे मुख्य साजिशकर्ता बताया था। यह हिंसा तत्कालीन प्रस्तावित नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की थी और इसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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