दिल्ली के व्यापारियों ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, 2000 करोड़ के नुकसान पर मांगा मुआवजा

Published : Oct 16, 2026, 06:34 PM IST
Shops at Palika Bazaar during the protest (Photo/ANI)

सार

दिल्ली के प्रमुख व्यापारी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर बाजारों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से व्यापारियों को करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

नई दिल्ली। दिल्ली के बड़े व्यापारी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है। इनमें फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन (APMA) और सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन (SMSA) शामिल हैं। इन व्यापारियों ने हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों की वजह से हुए भारी आर्थिक नुकसान के बाद अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए पीएम से तुरंत दखल देने की मांग की है। 
व्यापारियों ने बताया कि 10 अक्टूबर के आसपास बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों ने बाजारों में अफरातफरी और डर का माहौल बना दिया। इस वजह से इवेंट के 4-5 दिन पहले और बाद तक ग्राहक बड़े बाजारों से दूर रहे।

अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के त्योहारी सीजन (जिसमें नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली शामिल हैं) को लेकर कारोबारी काफी टेंशन में हैं। इन व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री, केंद्र सरकार और न्यायपालिका से अपील की है कि दिल्ली के कमर्शियल इलाकों में सभी तरह के प्रदर्शनों और मार्च पर तुरंत बैन लगाया जाए, ताकि जनता और लोकल इकॉनमी को बचाया जा सके। व्यापारी सेंट्रल कमर्शियल हब में बड़े पैमाने पर होने वाले प्रदर्शनों पर तुरंत रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। करीब 2,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान के बाद वे अपने व्यापार को बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। व्यापारियों ने इस बात पर जोर दिया कि साल की सबसे ज्यादा कमाई वाले समय में बार-बार होने वाले अचानक प्रदर्शनों से उनका धंधा चौपट हो रहा है।

फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने 15 अक्टूबर को लिखा,

10 अक्टूबर के प्रदर्शन की वजह से बाजार में 4-5 दिन पहले और 4-5 दिन बाद तक सन्नाटा पसरा रहा। इससे हमें करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ। हम पूरे साल अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर (नवरात्रि, दिवाली आदि) का इंतजार करते हैं क्योंकि हमारी सबसे ज्यादा सेल इसी दौरान होती है। ऐसे समय में प्रदर्शन हमारे व्यापार को पूरी तरह ठप कर देते हैं। हमारी दुकानों से ही हमारे परिवारों का खर्च, स्टाफ की सैलरी, बुजुर्ग माता-पिता का इलाज, बच्चों की पढ़ाई, किराया और घर का खर्च चलता है।

ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर को लिखा,

10 अक्टूबर के प्रदर्शन की वजह से बाजारों में डर का माहौल बन गया, जिससे ग्राहक कई दिनों तक दूर रहे। अगर इन अहम महीनों में राजधानी को प्रदर्शनों का अखाड़ा बना दिया गया, तो दुकानदार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।

सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन ने 15 अक्टूबर को लिखा,

व्यापार में अचानक आई इस गिरावट का सीधा असर दुकानदारों, कर्मचारियों और उन पर निर्भर हजारों परिवारों पर पड़ता है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर बहुत अहम महीने हैं, जहां होने वाली सेल हमारी सालाना कमाई का एक बड़ा हिस्सा होती है।

व्यापारिक संगठनों ने मांग की है कि आर्थिक नुकसान का आकलन किया जाए और इसकी भरपाई सीधे प्रदर्शन के आयोजकों से की जाए। लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन और APMA ने कहा,

10 अक्टूबर के प्रदर्शन से हुए नुकसान का सही और पारदर्शी तरीके से आकलन होना चाहिए। इसकी पूरी भरपाई मुख्य आयोजकों और प्रदर्शनकारियों से की जानी चाहिए। 20-30 लोगों का एक खास ग्रुप—जिसमें हाई-प्रोफाइल हस्तियां और पेशेवर एक्टिविस्ट शामिल हैं जो पहले ही करोड़ों कमा चुके हैं—बार-बार प्रदर्शन बुलाते हैं, जिससे आम मिडिल-क्लास दुकानदारों की रोजी-रोटी बर्बाद हो जाती है।

सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन (SMSA) ने कहा,

हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करते हैं। लेकिन, जहां कानून के तहत काम में रुकावट डालने की जिम्मेदारी तय होती है, वहां आयोजकों की जवाबदेही तय करने और प्रभावित दुकानदारों को उचित मुआवजा देने के लिए कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

व्यापारियों ने भीड़भाड़ वाले संकरे बाजारों में बिना बताए होने वाली रैलियों से जुड़े सुरक्षा खतरों पर भी चिंता जताई है। अक्सर प्रदर्शन बिना किसी सही इंतजाम के होते हैं। इनमें एंबुलेंस के लिए अलग रास्ता, फायर टेंडर या फर्स्ट-एड जैसी बुनियादी इमरजेंसी सुविधाएं नहीं होती हैं। इससे ग्राहकों और काम करने वालों के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा हो जाता है। संगठनों ने गुजारिश की है कि 16 अक्टूबर या आने वाले पूरे त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली में किसी भी प्रदर्शन, मार्च या रैली की इजाजत न दी जाए। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सामने कई मांगें रखी हैं। उन्होंने प्रदर्शन से हुए व्यापारिक नुकसान का आधिकारिक और पारदर्शी आकलन करने और आयोजकों से मुआवजा वसूलने की मांग की है। 

इन मांगों में अक्टूबर से दिसंबर के त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली के बाजार इलाकों में प्रदर्शनों, रैलियों और मार्च पर पूरी तरह से बैन लगाना शामिल है। साथ ही, प्रदर्शन की इजाजत देने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की गई है, जिसमें लोकल मार्केट एसोसिएशन से पहले सलाह लेना जरूरी हो। इसके अलावा, व्यापारियों ने एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं की बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने और बाजार वाले इलाकों में नॉर्मल ट्रैफिक बनाए रखने के लिए कदम उठाने की भी मांग की है। पालिका बाजार और कनॉट प्लेस जैसे बड़े कमर्शियल हब में, दुकानदारों का कहना है कि रिटेल कैलेंडर के सबसे बिजी सीजन में भी उनके कॉरिडोर सूने पड़े हैं।

पालिका बाजार के एक दुकानदार ने ANI को बताया, "दुकान में काम खत्म हो गया है... रोज नए प्रदर्शन हो रहे हैं... काम पूरी तरह से रुक गया है... हम सब बहुत परेशान हैं... यह त्योहारों का समय है, लेकिन बाजार खाली पड़ा है।"

ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों और मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े आरोपों को लेकर विपक्ष और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारी सीजन के दौरान व्यापार में नुकसान को लेकर व्यापारियों की चिंताओं के बीच, कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के खिलाफ तत्काल निर्देश देने से इनकार कर दिया।

इसी तरह, एक रेस्टोरेंट मालिक ने चल रहे प्रदर्शनों के कारण हुए नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने यह भी अपील की है कि CJP को शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में भीड़ जुटाने की इजाजत न दी जाए। शुक्रवार को, सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारी सीजन के दौरान व्यापार में नुकसान को लेकर व्यापारियों की चिंताओं के बीच, कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ तत्काल निर्देश देने से इनकार कर दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जोयमाल्या बागची की बेंच ने लोगों को परेशानी न होने की अपील करते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि लोगों में बेहतर समझ आएगी।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दशहरा की छुट्टियों के बाद 26 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा।

यह याचिका दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन ने दायर की थी। उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन और इलाके में गतिविधियों को रोकने वाले NDMC के नोटिस के कारण भारी कमर्शियल नुकसान का डर था।

व्यापारियों की तरफ से पेश हुए वकील जय अनंत देहाद्रई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस रुकावट से एक दिन में 200 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो सकता है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान। जस्टिस बागची ने कहा, "यह अलग नहीं है। ये सब आपस में जुड़े हुए हैं। कोई प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है, कोई कानून-व्यवस्था चाहता है; सब जुड़े हुए हैं।" जस्टिस बागची ने माना कि प्रदर्शनकारियों, व्यापारियों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की चिंताएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

CJI ने कहा कि कोर्ट त्योहारी सीजन के दौरान छोटे दुकानदारों और उनके परिवारों को व्यापार में होने वाली रुकावट से होने वाली परेशानी को समझता है। बेंच ने कहा, "हमें उम्मीद है कि हर किसी में बेहतर समझ आएगी... हम जानते हैं कि सभी छोटे दुकानदार इन्हीं दिनों में अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। हम जानते हैं कि पूरे परिवारों को कितनी मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।"

जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि क्या NDMC की पाबंदियां गैर-जरूरी थीं। अगर व्यापारियों को गैरकानूनी तरीके से व्यापार में नुकसान हुआ है, तो संवैधानिक टॉर्ट (constitutional tort) और सार्वजनिक कानून के सिद्धांतों के तहत मुआवजे पर विचार किया जाएगा। जज ने कहा,

अगर व्यापार का नुकसान होता है, और हम मानते हैं कि यह आपके मुवक्किलों के लिए गैरकानूनी है, तो हम संवैधानिक टॉर्ट अधिकार क्षेत्र के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। जब वह समय आएगा, तब हम उस पर विचार करेंगे।

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