
दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित नैनी झील को जल्द ही नया रूप दिया जाएगा। नगर निगम दिल्ली (MCD) ने झील के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए 9.73 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की है। इस योजना की खास बात यह है कि झील में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले उपचारित पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह परियोजना अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0 (AMRUT 2.0) के तहत शुरू की गई है। रविवार को परियोजना का उद्घाटन दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, विधायक अशोक गोयल, क्षेत्रीय पार्षद विकेश सेठी और MCD के डिप्टी कमिश्नर मोहित बंसल की मौजूदगी में किया गया।
परियोजना के तहत कोरोनेशन पिलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी को पाइपलाइन के जरिए नैनी झील तक पहुंचाया जाएगा। इससे झील में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के साथ-साथ उपचारित सीवेज के दोबारा उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना में केवल झील को पानी उपलब्ध कराने तक ही काम सीमित नहीं रहेगा। झील की जरूरत से अधिक उपचारित पानी का इस्तेमाल आसपास के नगर निगम पार्कों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। यानी एक ही व्यवस्था के जरिए जल संरक्षण और हरित क्षेत्रों की सिंचाई, दोनों पर काम होगा।
MCD की योजना में नैनी झील के आसपास बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट भी शामिल है। इसके तहत हरित क्षेत्र को बेहतर बनाने और झील के आसपास के माहौल को अधिक आकर्षक बनाने का काम किया जाएगा। इसके अलावा झील के किनारे बने RCC ड्रेन का रीमॉडलिंग किया जाएगा। मौजूदा ग्रिल और झील की सीमा से जुड़ी संरचनाओं की मरम्मत भी होगी। इससे झील परिसर की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
नैनी झील को मनोरंजन और सार्वजनिक उपयोग के लिहाज से बेहतर बनाने के लिए यहां डेकोरेटिव लाइटिंग भी लगाई जाएगी। इसके साथ ही झील परिसर में दो म्यूजिकल फाउंटेन स्थापित किए जाएंगे। इन कामों का उद्देश्य झील को सिर्फ जलाशय के तौर पर विकसित करना नहीं, बल्कि इसे स्थानीय लोगों के लिए बेहतर मनोरंजक और सार्वजनिक स्थान के रूप में तैयार करना भी है।
इस परियोजना का एक अहम पहलू दिल्ली में उपचारित सीवेज के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना है। आमतौर पर सीवेज ट्रीटमेंट के बाद प्राप्त पानी का इस्तेमाल सीमित रूप से होता है, लेकिन इस योजना के तहत इसे झील और आसपास के पार्कों के लिए उपयोगी बनाया जाएगा।
MCD के मुताबिक, परियोजना से नैनी झील के पर्यावरणीय और मनोरंजक महत्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही उपचारित पानी का उत्पादक इस्तेमाल सुनिश्चित होगा। MCD के एक अधिकारी ने कहा कि यह परियोजना नैनी झील के पर्यावरणीय और मनोरंजक मूल्य को बेहतर करने के साथ-साथ उपचारित अपशिष्ट जल के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करेगी।
नैनी झील के कायाकल्प की यह परियोजना केंद्र सरकार के AMRUT 2.0 मिशन के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। इस मिशन का व्यापक उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति, जल निकायों के पुनरुद्धार और पानी के बेहतर प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना है। नैनी झील परियोजना में भी इसी दिशा में काम किया जा रहा है, जहां झील के पुनरुद्धार के साथ उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल को जोड़ा गया है।
MCD के मुताबिक, नैनी झील के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण का पूरा काम जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद झील की जल उपलब्धता, आसपास का हरित क्षेत्र, ड्रेनेज, रोशनी और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर, 9.73 करोड़ रुपये की यह परियोजना नैनी झील को नया रूप देने के साथ दिल्ली में वेस्टवॉटर रीयूज और शहरी जल निकायों के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
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