
दिल्ली में पानी की सप्लाई को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि पिछले 18 महीनों में राजधानी की जल व्यवस्था को केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय पाइपलाइन, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और जमीनी स्तर के कामों पर आगे बढ़ाया गया है। अब एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से मिलने वाली ₹2,500 करोड़ की वित्तीय मदद इस बदलाव को और तेज करेगी।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सरकार का फोकस मजबूत जल बुनियादी ढांचे, 24x7 पानी की सप्लाई और यमुना को साफ करने पर है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दिल्ली में पानी की उपलब्धता, पुरानी पाइपलाइनों, लीकेज और जल वितरण में असमानता जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।
In just 18 months, Delhi’s water story has moved decisively from plans to pipes, plants and progress on the ground.
Now, a ₹2,500 crore ADB-backed boost will accelerate this transformation further.
Our focus remains clear, stronger water infrastructure, 24x7 water supply and a… pic.twitter.com/n9QiF0CAYN— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 25, 2026
दिल्ली सरकार के मुताबिक, जल आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए ADB से ₹2,500 करोड़ का लोन मिलेगा। इसमें परियोजनाओं की करीब 70 फीसदी लागत ADB द्वारा और शेष 30 फीसदी दिल्ली सरकार द्वारा वहन की जाएगी। यह फंडिंग केंद्र के वित्त मंत्रालय के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस निवेश का मकसद दिल्ली के पानी के पूरे नेटवर्क को मजबूत करना है—यानी ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर ट्रांसमिशन नेटवर्क, डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन और घरों के कनेक्शन तक। सरकार की कोशिश सिर्फ ज्यादा पानी उपलब्ध कराने की नहीं है। व्यवस्था में जहां पानी रास्ते में लीक या बर्बाद होता है, उसे भी कम करना इस योजना का अहम हिस्सा है।
इस योजना में वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कमांड एरिया में जल आपूर्ति सुधारने के लिए दो पैकेजों को मंजूरी दी गई है। पैकेज-1 की लागत करीब ₹805 करोड़ और पैकेज-2 की लागत करीब ₹935 करोड़ बताई गई है। इससे वजीराबाद प्लांट से जुड़े इलाकों में जल वितरण नेटवर्क को ज्यादा व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाने का लक्ष्य है। प्रस्तावित आधुनिक नेटवर्क करीब 43.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में काम करेगा। इसमें नौ अंडरग्राउंड रिजर्वायर यानी UGR कमांड एरिया और आठ विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।
परियोजना का आकार सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार करीब 836 किलोमीटर का जल वितरण नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसमें लगभग 570 किलोमीटर नई या पुरानी पाइपलाइनों को बदलने का काम शामिल है। इसका असर उन इलाकों में खास तौर पर दिख सकता है जहां पुरानी पाइपलाइन, कम दबाव या लीकेज के कारण पानी की सप्लाई प्रभावित होती रही है।
परियोजना के दायरे में Mukherjee Nagar, Model Town, Jahangirpuri, Azadpur, Keshavpuram, Pitampura, Shalimar Bagh, Tri Nagar, Paschim Vihar, Rani Bagh, Wazirpur और Ashok Vihar जैसे इलाके शामिल हैं।
दिल्ली की जल व्यवस्था में एक बड़ी समस्या पानी की बर्बादी और लीकेज रही है। इसे नियंत्रित करने के लिए परियोजना के तहत 131 District Metered Areas यानी DMAs बनाए जाने की योजना है। DMA में नेटवर्क के एक हिस्से को अलग करके उसमें आने और बाहर जाने वाले पानी की निगरानी की जाती है। इससे यह पता लगाना आसान होता है कि कितना पानी सप्लाई किया गया और रास्ते में कितना पानी गायब हो गया। सरकार का लक्ष्य Non-Revenue Water यानी NRW को घटाकर 15 फीसदी तक लाना है। इसके लिए पाइपलाइन सुधार, सटीक मीटरिंग, DMA आधारित निगरानी और लीकेज नियंत्रण को एक साथ लागू किया जाएगा।
योजना के तहत करीब 2.15 लाख घरेलू जल कनेक्शनों को शामिल किया जाएगा और उपभोक्ता कनेक्शनों की 100 फीसदी मीटरिंग का लक्ष्य रखा गया है। इससे पानी की खपत का वास्तविक आंकड़ा सामने आने और बिलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिल सकती है। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार पानी की सप्लाई को सिर्फ बढ़ाने के बजाय उसके इस्तेमाल और नुकसान का हिसाब भी रखने की दिशा में बढ़ना चाहती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली में 24x7 पानी की सप्लाई सुनिश्चित करना है। इसके लिए ऐसा आधुनिक नेटवर्क तैयार करने पर जोर है जिसमें सप्लाई का दबाव, पानी की मात्रा और नेटवर्क में होने वाले नुकसान की निगरानी की जा सके। हालांकि, 24x7 जलापूर्ति सिर्फ पाइपलाइन बदलने से संभव नहीं होगी। इसके लिए पर्याप्त जल स्रोत, ट्रीटमेंट क्षमता, स्टोरेज, पंपिंग और सीवर व्यवस्था—इन सभी कड़ियों को एक साथ मजबूत करना होगा। यही वजह है कि सरकार जल व्यवस्था को पूरे सिस्टम के तौर पर देखने की बात कर रही है।
रेखा गुप्ता ने अपने पोस्ट में साफ किया कि सरकार की प्राथमिकताओं में साफ यमुना भी शामिल है। दिल्ली की जल व्यवस्था और यमुना की सफाई एक-दूसरे से अलग मुद्दे नहीं हैं। सीवर नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बेहतर होने पर नदी में जाने वाले प्रदूषित पानी को रोकने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली सरकार पहले ही जल और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रही है। सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यमुना के कायाकल्प के लिए 45-सूत्रीय एक्शन प्लान में सीवर नेटवर्क, वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और जल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं।
दिल्ली के जल नेटवर्क को लेकर सरकार की योजना सिर्फ ADB की ₹2,500 करोड़ की मदद तक सीमित नहीं है। सरकार ने पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के दो जोन में करीब ₹11,427 करोड़ के निवेश की योजना भी बताई है। इससे लगभग 36.4 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने और करीब 3,830 किलोमीटर के जल नेटवर्क को मजबूत करने का लक्ष्य है। इस प्रस्ताव में केंद्र और दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी के साथ लोन और PPP मॉडल के जरिए फंड जुटाने की योजना बताई गई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि पिछले 18 महीनों में दिल्ली की जल व्यवस्था में बदलाव की दिशा में काम शुरू हुआ है और अब ₹2,500 करोड़ की ADB मदद से इसे और गति मिलेगी। लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहर में किसी भी जल परियोजना की असली परीक्षा घोषणा नहीं, बल्कि उसके जमीन पर असर से होगी। नई पाइपलाइन कब बिछती है, लीकेज कितना कम होता है, पानी का दबाव कितना सुधरता है और कितने घरों को नियमित पानी मिलता है- इन पैमानों पर आने वाले समय में इस योजना का मूल्यांकन होगा।
यह भी महत्वपूर्ण है कि दिल्ली का पुराना ड्रेनेज और जल ढांचा कई जगहों पर बुनियादी सुधार की मांग करता है। हाल की भारी बारिश और जलभराव के बाद मुख्यमंत्री ने भी राजधानी की पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर समस्याओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया है।
फिलहाल सरकार के सामने लक्ष्य साफ है- दिल्ली को ज्यादा भरोसेमंद जल आपूर्ति, कम लीकेज और बेहतर जल प्रबंधन की ओर ले जाना। ₹2,500 करोड़ की ADB सहायता इस दिशा में एक बड़ा वित्तीय सहारा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पाइपलाइन से लेकर घर के नल तक इसका असर कितनी तेजी से पहुंचता है।
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