
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर समाज की सोच पर सीधा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अक्सर लड़कियों को ही यह समझाया जाता है कि उन्हें क्या पहनना है, कहां जाना है, कैसे रहना है और किन चीजों से बचना है। लेकिन सवाल यह है कि लड़कों को क्या सिखाया जा रहा है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में लड़कियों के लिए लगातार ‘डूज एंड डोंट्स’ तय किए जाते हैं, जबकि लड़कों के व्यवहार और जिम्मेदारी पर उतनी चर्चा नहीं होती। उन्होंने इस सोच में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल लड़कियों को सावधान करने से सुनिश्चित नहीं हो सकती।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि लड़कियों से अक्सर कहा जाता है- “तुमको ये नहीं करना चाहिए, तुमको ये करना चाहिए, ऐसा कपड़ा पहनो, वैसा मत करो, वहां मत जाओ।” उनका सवाल था कि इतनी सारी पाबंदियां और सीमाएं आखिर लड़कियों के लिए ही क्यों हों?
रेखा गुप्ता के मुताबिक, परिवार और समाज में बेटियों को जितनी बार उनके व्यवहार को लेकर समझाया जाता है, उतनी ही गंभीरता से बेटों को भी सही और गलत व्यवहार की समझ दी जानी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि लड़कों को यह समझना होगा कि किसी महिला या लड़की की सहमति का सम्मान करना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘No’ का मतलब ‘No’ होता है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
आज एक महिला के रूप में, एक मां के रूप में और एक मुख्यमंत्री के रूप में भी, यहां बैठी हुई मेरी सभी बेटियों से कहना चाहती हूं।
आपकी हर आवाज़ में, आपके हर साहस में, आपकी हर ज़रूरत में और आपकी सुरक्षा की हर स्थिति में, मैं आपके साथ हूं।
कोई भी लड़ाई लड़नी होगी, कुछ भी लेकर आना… pic.twitter.com/dLBpnddFDK— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 30, 2026
रेखा गुप्ता ने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के लाल किले के भाषण से भी जोड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए भाषण में समाज में बेटियों और बेटों के साथ अलग-अलग व्यवहार पर सवाल उठाया था। उन्होंने परिवारों से यह सोचने को कहा था कि देर से घर लौटने पर सवाल केवल बेटियों से क्यों किए जाते हैं और बेटों से क्यों नहीं।
रेखा गुप्ता ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बेटी को अगर सही-गलत और सुरक्षा से जुड़े नियम समझाए जाते हैं, तो बेटे को भी उसके व्यवहार और जिम्मेदारी के बारे में उतना ही समझाना चाहिए। यानी बात सिर्फ लड़कियों को सुरक्षित रखने की नहीं है। बात उस माहौल को बदलने की है जिसमें गलत व्यवहार की जिम्मेदारी भी सही व्यक्ति पर तय हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या पुलिस की नहीं है। परिवार, मां, पिता और पूरी सोसाइटी को इसमें भूमिका निभानी होगी। उनके मुताबिक, बच्चों की परवरिश में शुरुआत से ही सम्मान, सहमति और जिम्मेदारी की समझ शामिल होनी चाहिए। लड़कियों को हर कदम पर रोकने के बजाय लड़कों को भी यह सिखाना जरूरी है कि किसी की सीमा, इच्छा और ‘ना’ का सम्मान कैसे किया जाता है।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हाल के दिनों में फिर चिंता सामने आई है। सितंबर 2026 में दिल्ली में एक किशोरी के साथ कथित गैंगरेप के मामले के बाद छात्रों और महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था और सुरक्षा तथा बिना डर सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने के अधिकार की मांग उठाई थी। ऐसे मामलों के बीच महिलाओं की सुरक्षा को केवल व्यक्तिगत सावधानी या कपड़ों और आने-जाने की पाबंदियों से जोड़ने के बजाय अपराध रोकने और जिम्मेदार व्यवहार की दिशा में भी चर्चा हो रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में गलत व्यवहार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि शहर में चाहे पुरुष हो या महिला, लड़का हो या लड़की, समाज का कोई भी व्यक्ति हो—अगर वह गलत हरकत करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दिल्ली में इस मामले पर कोई समझौता नहीं होगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली सरकार महिला सुरक्षा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग पहलों को आगे बढ़ाने की बात कर रही है। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
हाल में दिल्ली कैबिनेट ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए 1,300 इलेक्ट्रिक ऑटो की ‘DURGA’ योजना को भी मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य रोजगार, सुरक्षित आखिरी-मील परिवहन और समावेशी गतिशीलता को बढ़ावा देना है।
रेखा गुप्ता के बयान का सबसे अहम हिस्सा यही है कि महिलाओं की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर नहीं डाली जा सकती। अगर किसी लड़की को देर रात बाहर जाने, कपड़े पहनने या अपनी पसंद के मुताबिक जीवन जीने को लेकर लगातार निर्देश दिए जाते हैं, तो उसी समय लड़कों को भी यह सिखाना होगा कि सामने वाले व्यक्ति की सहमति और व्यक्तिगत सीमा का सम्मान कैसे किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने इसी सोच को परिवार से लेकर समाज तक लागू करने की बात कही है। उनका संदेश साफ है- सुरक्षा के नाम पर सिर्फ लड़कियों की आजादी सीमित करने के बजाय लड़कों के व्यवहार और जिम्मेदारी पर भी उतनी ही गंभीरता से बात होनी चाहिए। और जहां कानून तोड़ा जाता है, वहां कार्रवाई होनी चाहिए।
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