E20 पेट्रोल से क्या खराब हो रहा है आपकी गाड़ी का इंजन? मारुति और टोयोटा ने बता दी सच्चाई

Published : Jul 04, 2026, 09:19 PM IST
E20 Fuel

सार

E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियों ने भरोसा जताया है कि पुरानी गाड़ियों में भी इससे कोई नुकसान नहीं मिला है। 

E20 Fuel Impact: देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की बातें चल रही हैं। कुछ लोग इसे पर्यावरण के लिए बेहतर मानते हैं, तो कुछ के मन में सवाल है कि क्या यह पुरानी गाड़ियों के लिए सुरक्षित है? क्या इससे इंजन को नुकसान हो सकता है? क्या माइलेज कम हो जाएगा? अब इन सभी सवालों पर ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर के बड़े एक्सपर्ट्स ने खुलकर जवाब दिया है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) और टोयोटा (Toyota) समेत ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों ने दिल्ली में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि E20 पेट्रोल को जल्दबाजी में नहीं लाया गया, बल्कि सालों की टेस्टिंग और रिसर्च के बाद इसे लागू किया गया है।

E20 से क्या पुरानी गाड़ियों को होगा नुकसान?

सबसे बड़ा डर और सवाल यही है कि जो गाड़ियां E20 सर्टिफाइड नहीं हैं यानी 3-4 साल पुरानी गाड़ियों में यह पेट्रोल डालने से इंजन में जंग (Corrosion) लग जाएगी या पार्ट्स टूट जाएंगे। इस पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने ग्राहकों का सारा डर दूर कर दिया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने कुल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की। इनमें से 1.5 करोड़ से ज्यादा कारें 3 साल से अधिक पुरानी थीं, जो E20 सर्टिफाइड नहीं थीं। मारुति सुजुकी का दावा है कि इन 1.5 करोड़ से ज्यादा पुरानी गाड़ियों की जमीनी जांच (Field Reports) में E20 पेट्रोल की वजह से इंजन में जंग लगने, घिसावट होने या किसी भी कंपोनेंट के खराब होने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। गाड़ियां बिल्कुल परफेक्ट चल रही हैं।

क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम हो जाता है?

E20 पेट्रोल को लेकर यह भी बड़ी चिंता रहती है कि इससे माइलेज घट सकता है। मारुति सुजुकी के अनुसार, E20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू (ऊर्जा क्षमता) E10 के मुकाबले करीब 3 से 3.5% कम होती है। इसका मतलब है कि माइलेज में सिर्फ इसी सीमा तक मामूली अंतर आता है। मतलब अगर आपकी कार 20 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो E20 पेट्रोल से यह घटकर करीब 19.4 किमी (सिर्फ 0.6 किमी प्रति लीटर का अंतर) रह जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, माइलेज में होने वाली इस मामूली सी कमी की भरपाई E20 पेट्रोल के बड़े फायदों से हो जाती है। एथनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ी को बेहतर एक्सीलरेशन (Pick-up) मिलता है, एंटी-नॉकिंग (इंजन की स्मूथनेस) बढ़ती है और शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले प्रदूषण बहुत कम होता है। इसके अलावा, टायर में हवा का कम होना, गलत गियर बदलना, अचानक ब्रेक लगाना और खराब मेंटेनेंस जैसी चीजें माइलेज को इससे कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।

टोयोटा ने क्या कहा?

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने साफ किया कि एथनॉल कोई नया या खतरनाक ईंधन नहीं है, बल्कि यह एक हाई-परफॉर्मेंस और क्लीन फ्यूल है जिसका इस्तेमाल 1900 के दशक की शुरुआत से और यहां तक कि फॉर्मूला रेसिंग में भी होता आ रहा है। उन्होंने बताया कि पुरानी गाड़ियों पर बेहद कड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर के परीक्षण (Rigorous Testing) करने के बाद ही E20 को बाजार में उतारा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 स्टेशंस सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) गाड़ियों के लिए हैं, आम गाड़ियों के लिए नहीं। टेस्टिंग एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों पर गुलाटी ने बताया कि टेस्टिंग के नियम सिर्फ भारत में तय नहीं होते, भारत UNECE का सदस्य है और टेस्टिंग प्रक्रिया पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत है। उनके मुताबिक, ये एजेंसियां एक्सपोर्ट होने वाली गाड़ियों की भी टेस्टिंग करती हैं, इसलिए इन प्रोटोकॉल से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

हीरो मोटोकॉर्प का जवाब

वहीं दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनियों में से एक हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने भी पुष्टि की कि उनके सर्विस डेटा के विश्लेषण में E20 पेट्रोल के कारण बाइक या स्कूटरों में किसी भी तरह के अतिरिक्त नुकसान का कोई मामला नहीं मिला है।

बाजार में मिलने वाली नकली 'फिक्सिंग किट' से सावधान

पैनल में मौजूद विशेषज्ञों ने वाहन मालिकों को एक बेहद जरूरी चेतावनी भी दी है। आजकल बाजार में कई लोग पुरानी गाड़ियों को E20 कंपैटिबल बनाने के लिए 'रेट्रोफिटमेंट किट' (Retrofitment Kit) बेचने का दावा कर रहे हैं। मारुति सुजुकी ने साफ किया कि कंपनियों ने गाड़ियों को सुरक्षा के मानकों से काफी आगे जाकर डिजाइन किया है। बाजार में ऐसी कोई भी आधिकारिक किट उपलब्ध नहीं है और ऐसी तकनीकें अभी सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) स्तर पर ही सीमित हैं। इसलिए बाहर से कोई भी नकली किट लगवाकर अपने पैसे बर्बाद न करें।

E20 पूरी तरह BIS स्टैंडर्ड और BS-VI एमिशन नॉर्म्स के अनुसार

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व सीएमडी वर्तिका शुक्ला ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श करके तैयार किया गया है और यह वैज्ञानिक प्रमाणों और ऑटोमोबाइल निर्माताओं की गहन टेस्टिंग पर आधारित है। उन्होंने बताया कि E20 फ्यूल BIS मानकों और BS-VI उत्सर्जन मानदंडों का पूरी तरह पालन करता है और देशभर के पेट्रोल पंपों पर एक समान उपलब्ध है।

 

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