
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के साथ मिलकर 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' को पेश किया। यह प्लान 'विकसित भारत' के विजन के तहत दिल्ली के शहरी विकास का एक लंबा रोडमैप है। मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' के तहत राजधानी की बढ़ती आबादी के लिए 30 से 40 लाख नए घर बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे ज्यादा ध्यान सस्ते यानी किफायती घर बनाने पर होगा।
Delhi Master Plan 2047 sets the course for the capital’s next era of planned, inclusive and future-ready growth.
Under Chief Minister Smt. Rekha Gupta, the Delhi Government will lead its implementation with a clear resolve to turn this roadmap into visible change across the… pic.twitter.com/QIj0BUirEn— CMO Delhi (@CMODelhi) August 20, 2026
प्रेस कॉन्फ्रेंस में खट्टर ने बताया कि दिल्ली की आबादी दशकों से तेजी से बढ़ी है। जो आबादी 1991 में 94 लाख थी, वो 2001 में 1.38 करोड़ और 2021 में 2.12 करोड़ हो गई। अभी दिल्ली की आबादी करीब 2.40 करोड़ है और अनुमान है कि 2047 तक यह 3.20 करोड़ तक पहुंच जाएगी। खट्टर ने कहा,
शहर का कुल एरिया तो 1,483 वर्ग किलोमीटर ही है, जो बढ़ नहीं सकता। ऐसे में बढ़ती आबादी से जगह और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव पड़ता है। इसी वजह से एक योजना के तहत शहरी विकास की जरूरत है।
आने वाले समय में 80 लाख की आबादी बढ़ने और एकल परिवारों (Nuclear families) के बढ़ते चलन को देखते हुए, इस नए प्लान में 30 से 40 लाख नए घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें किफायती घरों पर खास फोकस रहेगा। खट्टर ने बताया कि यह प्लान इसलिए बनाया गया है ताकि दिल्ली का भविष्य में होने वाला विस्तार एक योजना के तहत हो और लोगों की बदलती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लोगों को आने-जाने में आसानी हो, इसके लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें मेट्रो रेल, बस नेटवर्क और RRTS शामिल हैं। इन बड़े ट्रांजिट रूट्स के किनारे घनी आबादी वाले विकास के लिए एक खास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी भी होगी।
चौबीसों घंटे खुले रहने वाले इलाकों के प्रस्ताव पर जोर देते हुए खट्टर ने कहा,
शहर में '24-घंटे वाले जोन' बनाने का भी प्रस्ताव है, जहां दिन-रात काम चलता रहेगा। इन जगहों के लिए 24 घंटे ट्रांसपोर्ट सर्विस, खासकर मेट्रो कनेक्टिविटी, सुनिश्चित करने के लिए भी नियम बनाए जा रहे हैं।
कम घनत्व वाले विकास क्षेत्रों (low-density development areas) पर खट्टर ने कहा,
कम घनत्व वाले इलाकों के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें 18 मीटर चौड़ी अंदरूनी सड़कें और 45 मीटर राइट ऑफ वे (ROW) वाली मास्टर ट्रंक सड़कें बनाने का प्रावधान है। जाम को सही तरीके से मैनेज करने के लिए, 15 से 18 मीटर की अंदरूनी सड़कों के दोनों तरफ प्लॉट के साथ खुली जगह छोड़ना जरूरी होगा।
जमीन के विकास से जुड़े नियमों के बारे में समझाते हुए खट्टर ने कहा,
इन जोन में काटे गए प्लॉट के मालिकों को 2.5 एकड़ के स्टैंडर्ड बेंचमार्क के आधार पर टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) और एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर किसी का प्लॉट 2.5 एकड़ से छोटा भी है, तो भी मालिक को 2.5 एकड़ के प्लॉट से जुड़ा पूरा एफएआर का फायदा मिलेगा। इसका नतीजा यह होगा कि इन कम घनत्व वाले विकास क्षेत्रों में 2.5 एकड़ से छोटे प्लॉट पर फार्महाउस नहीं बनाए जा सकेंगे।
दिल्ली की शहरी प्लानिंग के इतिहास के बारे में बताते हुए खट्टर ने कहा कि 1957 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की स्थापना हुई थी, जिसके बाद 1962 में शहर का पहला डेवलपमेंट प्लान बना। उन्होंने कहा,
दिल्ली के विस्तार को पड़ोसी इलाकों से बेहतर ढंग से जोड़ने और क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए 1985 में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड बनाया गया था। इसके बाद 1991 में दूसरा डेवलपमेंट प्लान (2001 प्लान) और 2007 में तीसरा (दिल्ली डेवलपमेंट प्लान 2021) आया। आज, 2026 में, दिल्ली विकास योजना 2047 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है, जो विकसित भारत के मौजूदा विजन के साथ मिलकर राजधानी के 2047 तक के विकास के लिए एक स्ट्रक्चर्ड रोडमैप तैयार करेगा।
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