
आंध्र प्रदेश रिएक्टर हादसा। आंध्र प्रदेश के अच्युता पुरम दवा केमिकल फैक्ट्री के 500 किलोलीटर कैपेसिटर रिएक्टर में 21 अगस्त को विस्फोट हो गया। इसमें 17 लोगों की जान चली गई, जबकि 33 घायल हो गए। हादसे में मारे गए लोगों के परिवार में कोहराम मच गया। इसी बीच दो ऐसी कहानियां निकलकर सामने आई है, जो किसी फिल्म की पटकथा से मिलते-जुलते हो।
पहली कहानी हरिका नाम की एक युवा केमिस्ट की है, जो राखी में अपने परिवार वालों से मिलकर काम पर लौटी थी। आने से पहले उसके भाइयों ने आग्रह किया था कि वो कुछ दिन और रूक जाए। लेकिन काम के प्रति समर्पण की वजह से उसे लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। किसी को क्या ही पता था कि ये उसकी आखिरी यात्रा है। इसके बाद वो अपने परिजनों का चेहरा कभी नहीं देख पाएगी। अब मृतक के सगे संबंधी अपनी बच्ची की लाश का इंतजार कर रहे हैं।
बेटे की शादी की तैयारियों के बीच हादसा
आंध्र प्रदेश रिएक्टर ब्लास्ट में दिल का झकझोर देने वाली एक और कहानी है, जिसमें एक परिवार अपने बेटे की शादी की तैयारी में लगा हुआ था, जो महज 40 दिनों बाद होनी थी। मृतक युवक पार्वतीपुरम मंडल के रहने वाले ITI डिप्लोमा पार्थसारधि की है। लेकिन अब परिजनों की सारी खुशियां एक डरावने सपने में बदल चुकी है, जिसका सामना शायद ही वो मौजूदा वक्त में करना चाहते हो।
हादसे में मारे गए और घायलों के लिए सहायता
बता दें कि हादसे में मारे गए लोगों की लाशों को पोस्टमार्टम के लिए किंग जॉर्ज अस्पताल (KGH) और अनाकापल्ली अस्पताल ले जाया गया। पीड़ित परिवारों ने फैक्ट्री प्रबंधन से उचित मुआवजे और जवाबदेही की मांग की है। इस पर विशाखापत्तनम के जिला कलेक्टर एम. हरेंदिरा प्रसाद ने हर एक मृतक के परिवार को प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपये के अलावा एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। वहीं घायलों को 50 हजार देने की बात कही है।
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