
पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में दो ट्रेनों के बीच हुए रेल हादसे में 9 लोगों की मौत के साथ 15 से अधिक लोग घायल हुए हैें। सभी को अस्पताल भेजा गया है, लेकिन एनडीआरएफ और रेस्क्यू टीम के देरी से पहुंचने से आम लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि घटना के करीब दो घंटे के बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची हालांकि तब तक आधे से ज्यादा रेस्क्यू कार्य ग्रामीण और पुलिस कर चुकी थी। ज्यादातर घायलों को ट्रेन से निकालकर अस्पताल भेजा जा चुका था और शवों को भी निकाला जा चुका था। हादसा न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से करीब 11 किलोमीटर पहले हुआ था।
ई रिक्शा से अस्पताल भेजे गए घायल
बंगाल रेल हादसे में एनडीआरएफ और प्रशासन की लापरवाही भी उजागर हुई। हालात ये थे ग्रामीणों और पुलिस के कुछ जवानों ने ज्यादातर घायलों का रेस्क्यू किया। हालात ये थे कि सूचना देने के बाद भी मौके पर एंबुलेंस तक नहीं पहुंच सकी थी। घायलों को ई-रिक्शा और प्राइवेट वाहनों से किसी तरह अस्पताल भेजा गया था। ट्रेन में फंसे लोगों को निकालने के लिए लोग अपने घरों से खिड़कियां आदि काटने के लिए कुछ न कुछ औजार लेकर आए थे। काफी संख्या में जुटे ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू कार्य संभव हो सका।
रेल मंत्री ने दिए जांच के आदेश
बंगाल में हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने जांच के आदेश दिए हैं। वह दोपहर में घटनास्थल पर भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। इस दौरान सिग्नल खराब होने के बारे में भी जानकारी मिली। रेल मंत्री अस्पताल में घायलों से मिलने के लिए भी पहुंचे।
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