Dharmasthala Controversy: सूदखोर, शराब माफिया और धर्मांतरण नेटवर्क क्यों मंदिर को बदनाम करने में लगे हैं?

Published : Aug 14, 2025, 09:06 PM ISTUpdated : Aug 14, 2025, 09:10 PM IST
Dharmasthala Controversy

सार

Dharmasthala Controversy:श्री धर्मस्थल मण्जुनाथेश्वर मंदिर ने गरीबों को ऋणमुक्त किया, नशा मुक्ति, शिक्षा और पेंशन योजनाओं से लाखों की जिंदगी बदली। जानें क्यों मंदिर पर विवाद और साजिश के बादल छा गए हैं। 

Dharmasthala Controversy: सदियों से श्री धर्मस्थल मण्जुनाथेश्वर मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का मजबूत स्तंभ रहा है। गरीबों को ऋणमुक्त करने से लेकर नशा मुक्ति, शिक्षा, मुफ्त इलाज और सामूहिक विवाह जैसी पहल से इसने लाखों जिंदगियां बदलीं। लेकिन अब यह मंदिर एक ऐसे विवाद में घिरा है जिसे समर्थक एक सुनियोजित बदनाम करने की साजिश बता रहे हैं।

सूदखोरों के मुनाफे पर सीधा वार

मंदिर के समर्थकों का कहना है कि मंदिर की श्री क्षेत्र धर्मस्थल ग्रामीण विकास परियोजना (SKDRDP) ने हजारों परिवारों को साहूकारों के चंगुल से निकाला। जहां पहले साहूकार 60% से ज्यादा ब्याज वसूलते थे, SKDRDP ने सिर्फ 12% ब्याज पर ऋण देकर इस शोषण का अंत किया। हर ऋणमुक्त परिवार, सूदखोरों के मुनाफे पर सीधा प्रहार है।

नशा मुक्ति से नए दुश्मन

लोग बताते हैं कि जन जागृति वेदिके अभियान के जरिए मंदिर ने शराबबंदी की मुहिम छेड़ी, 1.3 लाख से ज्यादा लोगों को नशा मुक्ति शिविरों से जोड़ा और नवजीवी समितियां बनाकर संयम बनाए रखने में मदद की। कई गांवों में शराब बिक्री घटने से शराब माफिया के मुनाफे पर असर पड़ा और इसके खिलाफ साजिश करने वालों की लिस्ट लंबी होती गई।

धर्म, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा

  • मुफ्त स्वास्थ्य सेवा
  • ग्रामीण युवाओं की शिक्षा
  • सामूहिक विवाह और पेंशन योजनाएं
  • 60 लाख+ स्वयं सहायता समूह जो कृषि, व्यवसाय और शिक्षा के लिए ऋण ले रहे हैं
  • किसानों को 37.85 करोड़ रुपये डेयरी परियोजनाओं के लिए
  • बुजुर्गों को 110 करोड़ रुपये पेंशन सहायता

सफलता पर हमला क्यों?

दरअसल, विभिन्न पहलों ने ग्रामीण समुदाय को आत्मनिर्भर बनाया और धर्मांतरण नेटवर्क को कमजोर किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, सूदखोर, शराब माफिया और धर्मांतरण गिरोह, जिनके आर्थिक हित मंदिर की पहल से प्रभावित हुए हैं ने, अब मिलकर इसकी छवि खराब करने में जुटे हैं। समर्थक कहते हैं कि यह हमला सिर्फ एक मंदिर पर नहीं, बल्कि उस सशक्त सामाजिक मॉडल पर है जिसने 23 लाख+ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और ग्रामीण कर्नाटक की रीढ़ को मजबूत किया।

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