
नए भारत की विकास यात्रा में एक और अध्याय जुड़ गया है। गांधी नगर में शुक्रवार को भूमि प्रशासन और आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसकी थीम रही “सुशासन के साथ सतत विकास, आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय”। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भूमि केवल संपत्ति नहीं बल्कि सभ्यता की नींव, किसानों की आय का आधार और आर्थिक प्रगति की धुरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) प्रशासन को पारदर्शी और सरल बना रहा है। उन्होंने गर्व से कहा कि गुजरात ने वर्ष 2005 में ही ई-धरा योजना के माध्यम से किसानों के भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर दिया था।
उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों से जुड़ी 35 से अधिक सेवाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन हैं। आई-ओआरए पोर्टल और जीएआरवीआई 2.0 जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने पैमाइश और रिकॉर्ड प्रक्रिया को 21 दिनों में पूरा करने में सक्षम बनाया है। इससे न केवल भूमि स्वामित्व विवाद कम हुए हैं बल्कि आम नागरिकों को घर बैठे अधिकार पत्र मिल रहे हैं।
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात ने अपने प्रयासों से पारदर्शी प्रशासन को जन-अभिमुख बनाया है। उन्होंने बताया कि राज्य में नागरिकों के लिए भूमि, पंजीयन और स्वामित्व संबंधी सभी सेवाएं एकीकृत एप्लीकेशन पर उपलब्ध होंगी। साथ ही नागरिकों को इंडेक्स 2 और भूमि दस्तावेज अब ऑनलाइन प्राप्त हो रहे हैं।
पटेल ने कहा कि गुजरात ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन को अवसर में बदला है। 2001 के भूकंप के बाद राज्य ने पुनर्निर्माण की दिशा में जो कदम उठाए, उसने देश को प्रेरित किया। आज गुजरात तूफान, भारी वर्षा और चक्रवात जैसी आपदाओं का जीरो कैजुअल्टी के साथ सामना करने में सक्षम है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन परियोजना के तहत 11 तटीय जिलों में 76 बहुउद्देशीय केंद्र बनाए गए हैं।
इस सम्मेलन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए शिक्षण और तकनीकी संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने घुमंतू जातियों के परिवारों को स्वामित्व कार्ड, सुरक्षा किट और आवासीय भूखंड की सनद वितरित की। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस अवसर पर नए राजस्व कार्यालयों और आवासीय भवनों का उद्घाटन, नई नीतियों का प्रदर्शन और राज्य राजस्व डायरी का विमोचन भी किया गया।
केंद्र के भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने बताया कि अब देश में भूमि सर्वेक्षण पारंपरिक तरीकों के बजाय ड्रोन और स्मार्ट तकनीक से किए जा रहे हैं। गुजरात ने इसे सबसे पहले लागू किया है और आगामी 2-3 वर्षों में पूरे राज्य में यह प्रणाली सक्रिय हो जाएगी।
राज्य राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि ने कहा कि भूमि प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी सेवाओं को और आसान बनाने के लिए 2389 नए पटवारियों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान 8 विषयों पर सेमिनार और पैनल चर्चाएँ होंगी जिनमें आई-ओआरए, ई-धरा और एकीकृत भूमि प्रशासन प्रणाली जैसे नवाचारों पर चर्चा की जाएगी।
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