18 साल की उड़ान: समायरा बनीं भारत की सबसे युवा कमर्शियल पायलट

Published : Dec 05, 2024, 12:29 PM IST
18 साल की उड़ान: समायरा बनीं भारत की सबसे युवा कमर्शियल पायलट

सार

विजयपुरा की 18 वर्षीय समायरा हुल्लूर ने कमर्शियल विमान उड़ाने का लाइसेंस हासिल कर देश की सबसे कम उम्र की पायलट बनने का गौरव हासिल किया है। केवल डेढ़ साल की ट्रेनिंग में उन्होंने छह परीक्षाएं पास कीं और 200 घंटे की उड़ान का अनुभव प्राप्त किया।

विजयपुरा: 18 साल की उम्र में कई लोग तो साइकिल या बाइक भी ठीक से नहीं चला पाते, लेकिन कर्नाटक के विजयपुरा जिले की 18 साल की एक लड़की ने कमर्शियल विमान उड़ाने का लाइसेंस हासिल कर देश की सबसे कम उम्र की पायलट बनने का गौरव हासिल किया है। कर्नाटक के विजयपुरा जिले की समायरा हुल्लूर ने यह उपलब्धि हासिल की है। विमान उड़ाने से संबंधित केंद्र नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा आयोजित कुल छह परीक्षाएं समायरा हुल्लूर ने पास की हैं, साथ ही 200 घंटे की उड़ान का अनुभव भी उनके पास है। केवल डेढ़ साल की ट्रेनिंग में उन्होंने सभी परीक्षाएं पास कर देश की सबसे कम उम्र की कमर्शियल पायलट बन गई हैं। 

दिल्ली के विजय यादव एविएशन अकादमी में ट्रेनिंग शुरू करने के बाद समायरा ने महाराष्ट्र के बारामती स्थित कार्वर एविएशन अकादमी में एडवांस फ्लाइंग ट्रेनिंग भी पूरी की। विजयपुरा के सैनिक स्कूल में समायरा ने शुरुआती शिक्षा प्राप्त की और बाद में केंद्रीय विद्यालय से विज्ञान की पढ़ाई की। इसी शिक्षा ने उनकी महत्वाकांक्षाओं की नींव रखी। 

विजयपुरा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित विजयपुरा उत्सव में उन्होंने हेलीकॉप्टर राइड देखी थी, जिससे उनके मन में भी विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाने का सपना पनपा। इंटीरियर डिजाइनर के रूप में काम करने वाले उनके पिता अमीर हुल्लूर ने उनके इस सपने को प्रोत्साहन दिया और समायरा ने विमानन क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया। 

केवल 17 साल की उम्र में ही समायरा ने डीजीसीए द्वारा आयोजित 6 में से 5 परीक्षाएं पास कर ली थीं। लेकिन आखिरी परीक्षा रेडियो ट्रांसमिशन टेक्नोलॉजी से संबंधित थी, जिसे लिखने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य था। इसलिए 18 साल की होते ही समायरा ने यह परीक्षा भी पास कर ली और अब देश की सबसे कम उम्र की कमर्शियल पायलट बन गई हैं। 

समायरा की ट्रेनिंग में रात में उड़ान भरना और मल्टी-इंजन विमानों का संचालन भी शामिल था। उनके 200 घंटे के उड़ान अनुभव का बहुत महत्व है। अपनी इस उपलब्धि के लिए उन्होंने अपने प्रशिक्षकों कैप्टन तपेश कुमार और विनोद यादव को धन्यवाद दिया और साथ ही माता-पिता के निरंतर समर्थन को भी श्रेय दिया। 
 

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