''लैंड फॉर जॉब'' घोटाले में लालू, राबड़ी, मीसा समेत 16 को समन, 5 पॉइंट्स में जानें क्या है पूरा मामला

Published : Feb 28, 2023, 12:26 PM ISTUpdated : Feb 28, 2023, 12:32 PM IST
lalu yadav

सार

आवेदकों से नौकरी के बदले जमीने ली गईं। बिना विज्ञापन और सार्वजनिक नोटिस जारी किए 12 लोगों को ग्रुप डी में नौकरी देने का आरोप है। उसके बदले आवेदकों से राबड़ी देवी और मीसा के नाम से जमीनें ली गईं।

नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ''लैंड फॉर जॉब'' से जुड़े कथित घोटाले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा समेत 16 लोगों के खिलाफ समन जारी किया है। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 15 मार्च के लिए समन जारी किया है। आरोप है कि यूपीए सरकार में लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान, नौकरी के बदले आवेदकों से जमीनें और प्लाट लिए गए थे। सीबीआई इस भर्ती घोटाले की जांच कर रही थी। जांच में पहले लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बाद में राबड़ी देवी और मीसा को भी आरोपी बनाया गया।

लैंड फॉर जॉब घोटाला क्या है?

कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। उस दौरान रेलवे में भर्ती घोटाला हुआ। बिना विज्ञापन और सार्वजनिक नोटिस जारी किए 12 लोगों को ग्रुप डी में नौकरी देने का आरोप है। उसके बदले आवेदकों से राबड़ी देवी और मीसा के नाम से जमीनें ली गईं। ऐसी जमीनों का कुल रकबा 1,05,292 वर्गफुट है। पटना के रहने वाले लोगों को अलग-अलग जोन में नौकरी दी गई। उनकी तैनाती मुंबई, कोलकाता, जबलपुर व हाजीपुर स्थित जोनल कार्यालयों में की गई। भर्ती घोटाले में सीबीआई ने 23 सितम्बर 2021 को पीई (प्रारम्भिक जांच) दर्ज की थी। प्रारम्भिक जांच के बाद 18 मई 2022 को पीई को प्रा​​थमिकी में बदला गया।

इन पर भी है घोटाले का आरोप

पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला पर भी रेलवे भर्ती से जुड़े एक अन्य घोटाले का आरोप लगा है। बंसल भी यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे, मामले में सिंगला समेत 10 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।

नौकरी देने के लिए नेटवर्क

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी देने के लिए बाकायदा एक नेटवर्क था। आवेदकों से जमीन का सौदा किया जाता था। पहले उन्हें अस्थायी नौकरी दी जाती थी, जब जमीन लालू के परिवार के सदस्यों के नाम हो जाती थी, तब आवेदकों की नौकरी स्थायी कर दी जाती थी।

पहले 14 के खिलाफ दर्ज था मामला

भर्ती घोटाले के इस मामले में सीबीआई ने पहले 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जिसमें लालू यादव, राबड़ी देवी शामिल थीं। उन सभी लोगों के​ खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था। सीबीआई ने इस मामले में छापेमारी भी की थी। केंद्र सरकार से अभियोजन की मंजूरी भी मांगी गयी थी। अब कोर्ट ने 16 लोगों को 15 मार्च के लिए समन भेजा है।

IRCTC घोटाले का भी आरोप

आईआरसीटीसी (IRCTC) घोटाले का आरोप भी लालू यादव और उनके परिवार पर लग चुका है। उस वक्त भी वर्ष 2004 में लालू, रेल मंत्री थे। रेलवे बोर्ड ने उस समय, रेलवे की कैटरिंग और होटलों का संचालन आईआरसीटीसी को सौंप दिया था। उस दौरान जारी किए गए टेंडर में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आयी थीं। आरोप है कि होटलों के संचालन, विकास और रखरखाव के लिए जारी टेंडरों में भी धांधली हुई। जिसे यह टेंडर मिला था। उसके द्वारा भी लालू यादव के परिवार को पटना में तीन एकड़ जमीन दी गई थी। इस केस में लालू, राबड़ी व तेजस्वी समेत कई आरोपी हैं।

आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव पहले ही चारा घोटाले में जेल जा चुके हैं। वर्तमान में वह जमानत पर जेल से बाहर हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद उनका इलाज चल रहा है। ''लैंड फॉर जॉब'' घोटाले में कोर्ट के समन के बाद उनके परिवार की मुश्किलें बढ सकती हैं।

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