1000 साल बाद भी अडिग! सोमनाथ मंदिर की वो कहानी जो हर भारतीय को जाननी चाहिए

Published : Jan 06, 2026, 11:21 AM ISTUpdated : Jan 06, 2026, 11:22 AM IST

सोमनाथ मंदिर की 1000 वर्षों की संघर्ष, आस्था और पुनर्निर्माण की गौरवशाली गाथा। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा narendramodi.in पर साझा किए गए ब्लॉग में जानिए 1026 के आक्रमण से लेकर 1951 के पुनर्निर्माण और 2026 के ऐतिहासिक महत्व तक की पूरी कहानी।

PREV
15

पीएम मोदी का भावुक ब्लॉग: 1000 साल पुरानी आस्था की सबसे बड़ी मिसाल

सोमनाथ… यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की गूंज है। यह वह स्थान है, जहां इतिहास ने बार-बार आघात किए, लेकिन आस्था कभी टूटी नहीं। जहां विध्वंस की कोशिशें हुईं, लेकिन विश्वास हर बार नए वैभव के साथ खड़ा हुआ। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर, आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए संकल्प, स्वाभिमान और सनातन चेतना का जीवंत प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इसी भावभूमि पर आधारित एक विस्तृत और विचारोत्तेजक ब्लॉग अपनी आधिकारिक वेबसाइट narendramodi.in पर साझा किया है। यह लेख न सिर्फ सोमनाथ के इतिहास को स्मरण कराता है, बल्कि भारत की सभ्यतागत शक्ति और आत्मिक ऊर्जा को भी रेखांकित करता है।

25

ज्योतिर्लिंगों में प्रथम: सोमनाथ की आध्यात्मिक महत्ता

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम की पहली पंक्ति ही सोमनाथ से आरंभ होती है -“सौराष्ट्रे सोमनाथं च…” यह तथ्य ही इस पवित्र धाम की प्राचीनता और महत्ता को दर्शाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त करता है।

जनवरी 1026 में गजनी के महमूद द्वारा किया गया आक्रमण केवल एक मंदिर पर हमला नहीं था, बल्कि यह भारत की आस्था, संस्कृति और आत्मविश्वास पर सीधा प्रहार था। ऐतिहासिक स्रोतों में वर्णित उस विध्वंस और क्रूरता का विवरण आज भी हृदय को विचलित कर देता है। वर्ष 2026 इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का साक्षी है।

35

1951 का पुनर्निर्माण और 75 वर्षों की गौरवगाथा

बार-बार ध्वंस के बावजूद सोमनाथ कभी मिटा नहीं। हर पीढ़ी ने उसे फिर से खड़ा किया। आज जिस भव्य स्वरूप में सोमनाथ खड़ा है, वह 11 मई 1951 को साकार हुआ था। इस ऐतिहासिक पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी 2026 में पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। यह क्षण स्वतंत्र भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन गया।

45

सरदार पटेल, के.एम. मुंशी और ऐतिहासिक निर्णय

आजादी के बाद सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प सरदार वल्लभभाई पटेल ने लिया। 1947 में दीवाली के अवसर पर उनकी सोमनाथ यात्रा ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और यहीं से पुनर्निर्माण का संकल्प जन्मा। के.एम. मुंशी ने इस संकल्प को वैचारिक और साहित्यिक आधार दिया। उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’ आज भी इस विषय पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है।

हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस आयोजन को लेकर आशंकित थे, लेकिन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद अपने निर्णय पर अडिग रहे और इतिहास ने उनके साहसिक कदम को सही ठहराया।

55

स्वामी विवेकानंद से अहिल्याबाई होलकर तक

सोमनाथ केवल एक कालखंड की कथा नहीं है। देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने प्रयासों से यहां पूजा-पाठ की परंपरा को जीवित रखा। 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद जब यहां पहुंचे, तो यह स्थल उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया। उन्होंने कहा था कि सोमनाथ जैसे मंदिर किसी भी पुस्तक से अधिक हमारी सभ्यता को समझाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में स्पष्ट किया है कि सोमनाथ की कहानी विध्वंस की नहीं, बल्कि पिछले 1000 वर्षों से चले आ रहे भारतीय स्वाभिमान, आस्था और पुनर्निर्माण की गाथा है। महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन भारत की आत्मा को नहीं जीत सका। आज 2026 में भी सोमनाथ खड़ा है, यह संदेश देते हुए कि नष्ट करने की मानसिकता रखने वाले इतिहास में सिमट जाते हैं, जबकि आस्था पर खड़ी सभ्यताएं युगों तक जीवित रहती हैं।

प्रधानमंत्री ने इस प्रसंग को आधुनिक भारत से जोड़ते हुए लिखा है कि यही सभ्यतागत मूल्य आज भारत को वैश्विक मंच पर आशा का केंद्र बना रहे हैं। योग, आयुर्वेद, कला, संस्कृति और नवाचार—सब इसी चेतना से उपजे हैं।

सोमनाथ हमें सिखाता है कि यदि एक हजार वर्ष पहले खंडित हुआ मंदिर फिर से अपने वैभव के साथ खड़ा हो सकता है, तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ एक विकसित राष्ट्र बन सकता है। सोमनाथ आज भी आशा का नाद है, विश्वास का स्वर है और उस शक्ति का प्रतीक है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देती है।

Other Indian State News (अन्य राज्य समाचार) - Read Latest State Hindi News (अन्य राज्य की खबरें), Regional News, Local News headlines in Hindi from all over the India.

Read more Photos on

Recommended Stories