
खम्मम. यह वायरल तस्वीर तेलंगाना के हैदराबाद से करीब 200 किमी दूर खम्मम की है, जहां 2 जुलाई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी जनसभा करने पहुंचे थे। इसी दौरान पूर्व माओवादी विचारक और क्रांतिकारी गीतकार 'बल्लादीर गद्दार' ने राहुल गांधी को गले लगाकर चूम लिया। मशहूर तेलुगु गीतकार गुम्मदी विट्ठल राव को ही 'गद्दार' प्रचलित नाम(Gummadi Vittal Raopopularly known as Gaddar) से जाना जाता है।
तेलंगाना विधानसभा चुनाव: राहुल गांधी की रैली और गीतकार गद्दार की कहानी
पूर्व माओवादी विचारक और क्रांतिकारी गीतकार गद्दार ने हाल ही में अपनी 'गद्दार प्रजा पार्टी' बनाई है। उन्होंने रविवार को खम्मम में कांग्रेस की सार्वजनिक रैली में राहुल गांधी को गले लगाया और किस कर लिया। 'तेलंगाना गर्जना सभा' के मंच पर हुई इस घटना को देखकर लोग चौंक गए।
गद्दार ने राहुल गांधी से हाथ मिलाने के बाद उन्हें गले लगाया और दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच गालों पर चुंबन दिया। राहुल गांधी ने भी गद्दार को गले लगाया और उन्हें अपने बगल में बैठने के लिए आमंत्रित किया।
जनसभा स्थल पर पहुंचने से पहले गद्दार ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव पर उनके निरंकुश रवैये के लिए जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केसीआर का पतन शुरू हो गया है।
तेलंगाना विधानसभा चुनाव: क्या कांग्रेस में शामिल हो रहे गद्दार?
अभी यह साफ नहीं है कि गद्दार कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की योजना बना रहे थे या नहीं। 21 जून को उन्होंने 'गदर प्रजा पार्टी' के लिए भारत चुनाव आयोग को आवेदन दिया था। गद्दार ने उसी दिन मीडियाकर्मियों से कहा था कि यह लोगों की पार्टी होगी। उन्होंने कहा यह भी कहा था, "चूंकि जीने का अधिकार ही खतरे में है, इसलिए हमारी पार्टी भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त इस बुनियादी अधिकार की रक्षा के लिए लड़ेगी।"
उन्होंने साफ कहा था कि वह चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र का फैसला पार्टी करेगी। पॉल ने आरोप लगाया था कि पीएसपी में शामिल होने के बाद गद्दार ने तेलंगाना कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष रेवंत रेड्डी के साथ एक सौदा किया था।
2017 में माओवादियों से अपना नाता तोड़ने वाले गद्दार ने उसी साल खुद को मतदाता के रूप में नामांकित किया और अपने जीवन में पहली बार 2018 में अपना वोट डाला। पिछले साल सितंबर में अटकलें थीं कि वह कांग्रेस में शामिल होंगे।
कौन हैं पूर्व नक्सली गुम्मदी विट्ठल राव उर्फ गद्दार?
गुम्मदी विट्ठल राव1969-70 के दशक में तेलंगाना आंदोलन के दौरान उस्मानिया यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग कॉलेज के दिनों से ही एक क्रांतिकारी गायक और माओवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले थे। वह 1980 के दशक में भूमिगत हो गए और एक यात्रा थिएटर समूह जन नाट्य मंडली की स्थापना की।
गद्दार ने युवाओं को माओवादी विचारधारा की ओर आकर्षित किया। यह ग्रुप बाद में सीपीआई-एमएल पीपुल्स वॉर की सांस्कृतिक शाखा बन गया, जिसका 2004 में सीपीआई-माओवादी बनाने के लिए माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) में विलय हो गया।
गद्दार 1997 में एक कातिलाना हमले से बच गए थे। अज्ञात लोगों ने उसे हैदराबाद के बाहरी इलाके में उसके आवास पर गोली मार दी थी। उन्होंने हत्या के प्रयास के लिए पुलिस और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। 2017 में उन्होंने माओवाद छोड़ दिया और खुद को अंबेडकरवादी घोषित कर दिया।
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