
भोपाल। मध्यप्रदेश में कृषि और सौर ऊर्जा के संयुक्त विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 15 जून को मंत्रालय में राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता प्रदेश में एग्री वोल्टाइक मॉडल को बढ़ावा देने और किसानों को खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन से अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है।
एग्री वोल्टाइक एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें कृषि भूमि का उपयोग खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन दोनों कार्यों के लिए एक साथ किया जाता है। इस मॉडल के तहत किसान अपनी जमीन पर फसल उत्पादन जारी रखते हुए उसी खेत में सोलर पैनल स्थापित कर बिजली का उत्पादन कर सकते हैं। इससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम होती है, खाद्य सुरक्षा बनी रहती है और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों की संभावना भी घटती है।
राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के बीच हुई यह साझेदारी पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप राज्य में विशेष एग्री वोल्टाइक ढांचा विकसित करने में मदद करेगी। इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग की दक्षता सुधारने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और जलवायु अनुकूल ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। यह समझौता मई 2030 तक प्रभावी रहेगा।
इस परियोजना के अंतर्गत जर्मन सहयोगी संस्थाएं राज्य सरकार को तकनीकी और रणनीतिक सहायता प्रदान करेंगी। कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैस, भारत में जर्मन दूतावास के प्रतिनिधि, एग्री वोल्टाइक संगठन के एलेक्जेंडर तथा जीआईजेड (GIZ) के अधिकारी उपस्थित रहे।
एग्री सोलर पीवी मॉडल के तहत राज्य सरकार किसानों को आवश्यक सब्सिडी उपलब्ध कराएगी। किसान अपनी जमीन के स्वामित्व को बनाए रखते हुए खेती करेंगे और साथ ही उसी भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन भी कर सकेंगे। इस व्यवस्था से किसानों को फसल उत्पादन के साथ बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। यह मॉडल किसानों के लिए दोहरे लाभ की योजना साबित हो सकता है।
समझौते के तहत इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना राज्य में संभावित एग्री वोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी मूल्यांकन, आर्थिक विश्लेषण, डिजाइन तैयार करने, वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। इससे प्रदेश में एग्री सोलर ऊर्जा परियोजनाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित करने में मदद मिलेगी।
इस साझेदारी के तहत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), ऊर्जा विकासकर्ताओं, वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) तथा अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को एग्री वोल्टाइक मॉडल के लाभ, तकनीकी पहलुओं और आर्थिक संभावनाओं की जानकारी देना होगा।
कंपनी प्रदेश में ऐसी नीतियों और नियामक ढांचे के विकास में भी सहयोग करेगी, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हुए बिना सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। यह पहल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा के विस्तार के साथ ग्रामीण विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में सरकारी नीतियों, योजनाओं, शिक्षा-रोजगार, मौसम और क्षेत्रीय घटनाओं की अपडेट्स जानें। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित पूरे राज्य की रिपोर्टिंग के लिए MP News in Hindi सेक्शन पढ़ें — सबसे भरोसेमंद राज्य समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।