CM मोहन यादव ने किसानों को बताया कमाई बढ़ाने का तरीका, बोले- सिर्फ फसल नहीं, ये काम भी करें

Published : Aug 14, 2026, 09:37 PM IST
CM Mohan Yadav on Farmers CM Urges Farmers to Adopt New Technology Natural Farming and Food Processing

सार

Mohan Yadav Farmers Scheme: सीएम मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से नई तकनीक, प्राकृतिक खेती और फूड प्रोसेसिंग अपनाने की अपील की। उन्होंने किसान ऋण, दिन में सिंचाई बिजली और ड्रोन दीदी प्रभा वर्मा की सफलता का भी जिक्र किया।

भोपाल: खेती को सिर्फ फसल उगाने तक सीमित रखने के बजाय उसे कमाई का बड़ा जरिया बनाया जा सकता है। इसके लिए किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक, प्राकृतिक खेती और फूड प्रोसेसिंग को अपनाना होगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 अगस्त को विदिशा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए किसानों से यह अपील की। मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में बड़वानी से वर्चुअली जुड़े। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद जैन मुनि श्री 105 तत्व सागर जी महाराज का अभिवादन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए तकनीक और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया।

प्राकृतिक और जैविक खेती पर CM मोहन यादव का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव का उद्देश्य किसानों को नई कृषि तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ने की अपील की। डॉ. यादव ने कहा कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना खेती के लिए बेहद जरूरी है।

उनके मुताबिक, रासायनिक खाद के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, इसलिए जैविक और प्राकृतिक खाद के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, खेती में किसी भी तकनीक या इनपुट को अपनाने से पहले स्थानीय मिट्टी, फसल, लागत और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है। जैविक या प्राकृतिक खेती में बदलाव भी किसान की परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जाना बेहतर होता है।

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सिर्फ अनाज नहीं, फूड प्रोसेसिंग से बढ़ाएं आमदनी

मुख्यमंत्री ने किसानों को फसल उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान अगर अपने कृषि उत्पाद को सीधे बाजार में कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करें, तो उन्हें अधिक आमदनी का अवसर मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर अनाज से आटा, दाल या अन्य पैकेज्ड उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियां किसान की कमाई बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं। इसके लिए किसानों को बाजार, प्रोसेसिंग की लागत, पैकेजिंग और बिक्री की मांग को समझना भी जरूरी होगा।

किसानों के लिए ऋण और बिजली व्यवस्था का जिक्र

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की किसान-केंद्रित पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए फसल अल्पावधि ऋण की शर्तों में संशोधन किया गया है और 31 मार्च की ड्यू डेट हटा दी गई है। उन्होंने सिंचाई के लिए किसानों को रात के बजाय दिन में बिजली उपलब्ध कराने की बात भी कही।

इसके अलावा कवच योजना के माध्यम से डिफॉल्टर किसानों के ऋण खातों में सुधार किए जाने का जिक्र किया। इन योजनाओं का वास्तविक लाभ किसान तक कितना पहुंचता है, यह उनके क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर उपलब्धता पर निर्भर करेगा। किसानों के लिए जरूरी है कि वे संबंधित विभाग या बैंक से पात्रता और लागू नियमों की जानकारी जरूर लें।

Drone Didi प्रभा वर्मा से CM ने किया संवाद

कार्यक्रम का एक खास हिस्सा विदिशा की ड्रोन दीदी प्रभा वर्मा से मुख्यमंत्री का वर्चुअल संवाद रहा। प्रभा वर्मा ने बताया कि उन्होंने ड्रोन से खेतों में अब तक 1,160 स्प्रे किए हैं और प्रति स्प्रे 300 रुपये शुल्क लेती हैं।

उनके अनुसार, इस काम से अब तक वह 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी हैं और लखपति दीदी बनी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताते हुए कहा कि महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में अवसर तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रभा वर्मा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं में हौसले की कमी नहीं है और जरूरत उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने की है।

खेती में तकनीक और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस

बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री का संदेश साफ रहा, किसान सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि नई तकनीक, प्राकृतिक खेती, ड्रोन सेवाओं और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को भी आय के नए साधन के रूप में देखें। हालांकि, आधुनिक कृषि तकनीक की सफलता सिर्फ मशीन या नई पद्धति अपनाने से तय नहीं होती। लागत, प्रशिक्षण, बाजार और उत्पाद की मांग भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसानों के लिए तकनीक को स्थानीय जरूरतों और आर्थिक व्यवहार्यता के हिसाब से अपनाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

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