
MP Wheat Procurement Center Inspection: मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुगम और किसान हितैषी बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा कदम उठाया है। अब मुख्यमंत्री स्वयं प्रदेश के विभिन्न उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर किसी भी समय, किसी भी जिले में उतर सकता है।
मुख्यमंत्री का उद्देश्य केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि किसानों से सीधे संवाद कर यह जानना है कि शासन द्वारा घोषित सुविधाएं वास्तव में जमीन पर पहुंच रही हैं या नहीं। गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को समर्थन मूल्य, तौल व्यवस्था, पेयजल, छायादार स्थान और अन्य जरूरी सुविधाएं सही तरीके से मिल रही हैं या नहीं, इसकी पड़ताल खुद मुख्यमंत्री करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आने वाले दिनों में प्रदेश के विभिन्न गेहूं उपार्जन केंद्रों पर अचानक पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। वे किसानों से सीधे बातचीत कर यह समझेंगे कि उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही। सरकार की प्राथमिकता है कि किसान बिना किसी परेशानी के अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकें और उन्हें अनावश्यक इंतजार या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि इस बार निरीक्षण को विशेष रूप से गंभीरता से लिया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: Exit Poll Result 2026 : केरल में LDF को लगेगा झटका और असम में BJP की हैट्रिक? क्या कहते एग्जिट पोल
राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपार्जन केंद्रों पर कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। किसानों के लिए पीने के पानी, बैठने हेतु छायादार स्थान और अन्य जनसुविधाओं की व्यवस्था की गई है ताकि गर्मी के मौसम में उन्हें असुविधा न हो। इसके अलावा किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर गेहूं विक्रय कर सकते हैं। इससे किसानों को नजदीकी और सुविधाजनक केंद्र चुनने में आसानी होगी और भीड़ का दबाव भी कम होगा।
अक्सर किसानों की सबसे बड़ी शिकायत तौल में देरी को लेकर होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी है। जरूरत पड़ने पर जिलों को इससे अधिक तौल कांटे बढ़ाने की अनुमति भी दी गई है। इसके साथ ही हम्माल, तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसका उद्देश्य है कि किसान की उपज समय पर तौली जाए और भुगतान प्रक्रिया में देरी न हो।
इस बार सरकार ने गेहूं के एफएक्यू (FAQ) मापदंडों में भी शिथिलता प्रदान की है, जिससे अधिक किसानों को लाभ मिल सके। चमक विहीन गेहूं की सीमा 50 प्रतिशत तक कर दी गई है। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है, जबकि क्षतिग्रस्त दानों की सीमा भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। इस निर्णय से मौसम या अन्य कारणों से प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी और उनकी उपज अस्वीकृत होने की संभावना कम होगी।
राज्य सरकार किसानों से गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर कर रही है। इसके साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है। इस प्रकार किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है, जो सीधे उनके खाते में पहुंचाया जाएगा। यह किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उपार्जन केंद्रों की क्षमता के अनुसार अधिक किसानों से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन प्रति केंद्र स्लॉट बुकिंग की सीमा 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी गई है। जिले चाहें तो इसे बढ़ाकर 3000 क्विंटल प्रति केंद्र तक कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसानों की सुविधा के लिए प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग और खरीदी का कार्य जारी रहेगा।
जनसंपर्क विभाग द्वारा उपार्जन केंद्रों पर पोस्टर और बैनर लगाकर किसानों को सरकारी सुविधाओं और योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह आकस्मिक निरीक्षण स्पष्ट संकेत है कि सरकार केवल योजनाएं घोषित नहीं कर रही, बल्कि उनके क्रियान्वयन की निगरानी भी खुद कर रही है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कागजों में दर्ज व्यवस्थाएं वास्तव में खेत से मंडी तक किसान को महसूस हों। क्योंकि किसान का भरोसा सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले बदलाव से बनता है।
मध्य प्रदेश में सरकारी नीतियों, योजनाओं, शिक्षा-रोजगार, मौसम और क्षेत्रीय घटनाओं की अपडेट्स जानें। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित पूरे राज्य की रिपोर्टिंग के लिए MP News in Hindi सेक्शन पढ़ें — सबसे भरोसेमंद राज्य समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।