मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाएगी गीता-रामायण, शिवराज बोले- धर्म ग्रंथों का अपमान बर्दाश्त नहीं

Published : Jan 23, 2023, 09:02 PM ISTUpdated : Jan 23, 2023, 09:05 PM IST
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब गीता-रामायण का पाठ भी पढाया जाएगा

सार

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब गीता-रामायण का पाठ भी पढाया जाएगा। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की।

भोपाल(Madhya Pradesh). मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब गीता-रामायण का पाठ भी पढाया जाएगा। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की। सीएम ने कहा कि हम सरकारी स्कूलों में हमारे धर्म ग्रंथों की शिक्षा देंगे। गीता का सार, रामयाण, रामसेतु और महाभारत के प्रसंग पढ़ाएंगे। वहीं सीएम ने चेतावनी दी कि जो महापुरुषों को अपमान करते हैं, उनको सहन नहीं किया जाएगा।

राजधानी भोपाल के ओल्ड कैम्पियन ग्राउंड पर दो घंटे तक चले 'सुघोष दर्शन' कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम बच्चों को नैतिक बनाएंगे। सीएम ने कहा कि रामायण, महाभारत, वेद , उपनिषद,श्रीमद्भगवद्गीता यह हमारे अमूल्य ग्रंथ हैं। मैं मुख्यमंत्री होने के नाते भी कह रहा हूं। हम तो शासकीय विद्यालयों में भी हमारे ग्रंथो की शिक्षा देंगे। इन ग्रंथों में मनुष्य को नैतिक व संपूर्ण बनाने की क्षमता है। इन पवित्र ग्रंथों की शिक्षा देकर हम अपने बच्चों को पूर्ण भी बनायेंगे, नैतिक भी बनायेंगे। गीता का सार पढ़ाएंगे, रामायण , रामचरितमानस पढ़ाएंगे, महाभारत के प्रसंग पढ़ाएंगे।

धर्म ग्रंथों और महापुरुषों का अपमान बर्दाश्त नहीं

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुझे कहते हुए दुख होता है कि देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें हमारी संस्कृति, परंपरा, अध्यात्म और धर्म की आलोचना करने में आनंद आता है। वे नहीं जानते कि वे देश का कितना नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने कहा राम हमारे रोम-रोम में बसे है। देश में सुख हो या दुख हर समय राम का ही नाम लिया जाता है।

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से गर्म हुई सियासत

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के MLC स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरित मानस को लेकर विवादित बयान दिया था। जिसके बाद देश भर में सियासत हलचल तेज हो गई है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को कहा था कि- कई करोड़ लोग रामचरित मानस को नहीं पढ़ते। यह तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए लिखा है। सरकार को रामचरित मानस के आपत्तिजनक अंश हटाना चाहिए या इस पूरी पुस्तक को ही बैन कर देना चाहिए।

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