
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जून को आयोजित ज्ञान भारतम मिशन संबंधी बैठक में कहा कि प्रदेश के मठों, मंदिरों और आश्रमों के अलावा अनेक परिवारों के पास भी प्राचीन पाण्डुलिपियां सुरक्षित हैं। इन पाण्डुलिपियों में भारत की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा, विज्ञान, दर्शन और ऐतिहासिक स्मृतियां आज भी संरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इस धरोहर को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के माध्यम से देशभर में वर्ष 1950 से पूर्व की पाण्डुलिपियों के संरक्षण, संवर्धन और डिजिटलीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित करना है।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मिशन के तहत मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों, शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और निजी घरों में संरक्षित पाण्डुलिपियों को भी चिह्नित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ताड़पत्र, ताम्रपत्र, भोजपत्र, प्रस्तर लेख, पोथियों और अन्य प्राचीन दस्तावेजों के रूप में मौजूद ज्ञान-संपदा को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है, इसलिए यहां बड़ी संख्या में ऐसी दुर्लभ पाण्डुलिपियां उपलब्ध होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने के लिए आम नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों को इस मिशन से जोड़ने और अपने पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों की जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों, परिवारों और व्यापारिक संगठनों के पास मौजूद ऐतिहासिक दस्तावेजों को पहचानकर उनके संरक्षण की दिशा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की अनुमानित संख्या 10 लाख 24 हजार 571 है। इनके संरक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया गया है। ज्ञान भारतम मोबाइल एप के माध्यम से पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है और संबंधित जानकारी ऑनलाइन अपलोड की जा रही है। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार तथा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा प्रत्येक जिले में प्रतिनिधियों की नियुक्ति भी की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर पाण्डुलिपि धारकों से संवाद स्थापित किया जाए और उन्हें इस अभियान से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया ताकि प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण, अध्ययन और दस्तावेजीकरण का कार्य अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।
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